उत्तर प्रदेश

पश्चिमी यूपी में अगर बंद नहीं होंगे ये काम, खतरे में पड़ जाएगा जन जीवन 

मेरठ। जनसंख्या घनत्व और डिमांड और सप्लाई के तालमेल ने वेस्ट यूपी के भूजल स्तर का पूरा गणित बिगाड़ कर रख दिया है। एक तो हर साल कम होते वर्षा के घनत्व और दूसरी और पानी की बढ़ रही मांग को पूरा करने के लिए भू. जल का जो अति दोहन हो रहा है, उसने निकट भविष्य के लिए पानी का संकट खड़ा कर दिया है। आज हालात यह है कि भूजल के अति दोहन ने मेरठ सहित वेस्ट यूपी को डेंजर जोन में पहुंचा दिया है। आगरा से लेकर सहारनपुर तक इस बार पानी का संकट मंडराने के आसार हैं।

ये भी पढ़ें- केपटाउन समेत भारत के कई इलाकों के जल संकट को कम कर सकती है ये मशीन

वेस्ट यूपी में लगातार हो रहे भूजल स्तर के दोहन के चलते शासन ने पिछली बार मेरठ सहित कई जनपदों को डार्क जोन में रखा था। विषेशज्ञों के अनुसार इस बार गर्मी ज्यादा पड़ेगी, जिसके चलते पानी का संकट आना लाजमी है। भूजल के अति दोहन को लेकर शासन सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जिन जनपदों में स्थिति क्रिटिकल हैं वहां नलकूप लगाने पूरी तरह बंद कर दिए जांए। आने वाले समय में अब इन जगहों में न कोई बोरिंग किया जा सकेगा और न ट्यूबवेल के लिए कोई कनेक्शन दिया जा सकेगा। सबसे अधिक चौंकाने वाली तो भू. जल मैनेजमेंट की रिपोर्ट है, जिसने मेरठ सहित वेस्ट यूपी पर मंडरा रहे खतरे की ओर इशारा कर दिया है।

लगातार गिरता जा रहा है जल स्तर।

ये भी पढ़ें- बोतल बंद पानी और RO छोड़िए , हर्बल ट्रीटमेंट से भी पानी होता है शुद्ध, पढ़िए कुछ विधियां 

डेंजर जोन मेरठ

लघु सिंचाई विभाग के आंकड़ों की मानें तो मेरठ, मुज्जफरनगर, षामली, हापुड़, बुलंदशहर, सहारनपुर, अमरोहा, मुरादाबाद पूरी तरह से डेंजर जोन में आकर खड़े हो गए है। जलापूर्ति के लिए अंधाधुंध तरीके से हो रहे भूजल दोहन का आलम यह है कि विगत साल मेरठ जोन के जनपदों में दर्जनों ऐसे स्थान थे, जहां नलों ने पानी देना मई के माह में बंद कर दिया था। सिंचाई विभाग अवर अभियंता आरपी त्यागी बताते हैं कि वेस्ट में गाड़ी की धुलाई सेंटर, स्वीमिंग पूल, आरओ सहित कई सुविधाओं में करोड़ों लीटर पानी प्रतिदिन बर्बाद होता है। जिसके चलते धरती के गर्भ में ही पानी की कमी आने लगी है। यदि समय रहते नहीं जागा गया तो हालात विकट होने वाले हैं।

शासनादेश के मुताबिक प्रतिबंधित क्षेत्रों में नए नलकूपों की स्थापना पर पूर्ण रूप से पाबंदी लगा दी गई है। मेरठ में पांच ब्लॉकों की स्थिति अधिक खराब है वहां नए वित्तीय वर्ष में कोई नलकूप नहीं लगाया जा सकेगा।
विश्राम यादव, अधिशासी अभियंताए लघु सिंचाई विभाग

मानकों की कसौटी पर खतरे में वेस्ट यूपी

भू जल संसाधन के मुताबिक भूजल स्तर को तीन केटेगरी में रखा जाता है। इन्हें डार्क जोन यानी अति. दोहितए क्रिटिकल व सेमी क्रिटिकल जोन के रूप में कैटेग्राइज किया जाता है। डार्क जोन में उन जनपदों को शामिल किया गया हैए जिन में तदाद से अधिक भूजल का दोहन किया चुका है और जमीन एक भी नलकूप का बोझ सहन नहीं कर सकती। वहीं क्रिटिकल जोन में शामिल जिले डार्क जोन के मुहाने पर खड़े माने गए हैंए इसलिए इस इसको भी डेंजर जोन में शामिल किया गया है। सेमी क्रिटिकल जोन में खतरा अभी अपनी शुरुआती दौर में हैए हालांकि इसको डेंजर जोन में नहीं रखा गया है।

डार्क जोन में किसी निजी नलकूप को कनेक्शन जारी नहीं किए जा रहे हैं। धरती का जल स्तर लगातार घटता जा रहा है। यह बहुत ही संवदेनशील मामला है।
आशुतोष निरंजन, एमडी पीवीवीएनएल

नहीं लग सकेंगे नलकूप

सूखती जा रही हैं नदियां।

ये भी पढ़ें- आजादी के 70 साल बाद भी 10 करोड़ से ज्यादा लोग जहरीला पानी पीने को मजबूर

भू-जल संसाधन आकलन पर आए शासनादेश के मुताबिक अब अति. दोहित और क्रिटिकल जोन में आए किसी भी ब्लॉक में एक भी बोरिंग व नलकूप नहीं लगाया जा सकेगा। इसके लिए शासन ने लघु सिंचाई और बिजली विभाग को पत्र भेजते हुए सख्त निर्देश दिए हैं कि शासनादेश के अनुपालन में इन ब्लॉक में न तो कोई सरकारी नलकूप स्थापित किया जाए और न ही किसी गैर सरकारी नलकूप को बिजली का कनेक्शन जारी किया जाए।

क्या कहती है यूपी की सर्वे रिपोर्ट

कुल ब्लॉक . . 820

डार्क जोन . . 111

क्रिटिकल . . 68

सेफ जोन . . 559

संकट में 179 ब्लॉक

स्थिति देखकर लगेंगे नलकूप

जमीन से कम होते जा रहे पानी के स्तर पर चिंता व्यक्त करने हुए शासन ने प्रदेश के संबंधित सभी विभागों चेताते हुए सख्त आदेश जारी किए हैं। आदेशों के मुताबिक डार्क व क्रिटिकल जोन में रखे गए ब्लॉकों में कोई नया बोरिंग नहीं किया जा सकेगा। शासनादेश के अनुसार इन ब्लॉकों में लघु सिंचाई एवं सिंचाई विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं व निशुल्क बोरिंगए मध्यम गहरी बोरिंग, गहरी बोरिंग, राजकीय नलकूप व सामूहिक नलकूप आदि पर पूरी तरह से प्रतिबंधित है।

ये है मेरठ की स्थिति

यह कम वर्षा और लगातार कम होते जा रहे भूजल स्तर का परिणाम है कि पिछले एक दशक में मेरठ को दो बार सूखा घोषित किया जा चुका है। कम वर्षा के कारण शासन ने जनपद को 2005 व 2008 में सूखा घोषित कर दिया था। इस पर विशेषज्ञों ने अपनी रिपोर्ट में भूजल से छेड़छाड़ के परिणामों को ही सूखे का कारण बताया था।

फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।