नीलेश मिसरा से सुना रहे हैं कहानी बाजबहादुर बटुकेलवी

Gaon Connection | Feb 06, 2026, 13:48 IST
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क्या ट्रक के पीछे लिखी दो पंक्तियाँ भी शायरी हो सकती हैं? क्या एक साधारण “सायर” भी कभी “असली शायर” बन सकता है? ‘बाजबहादुर बटुकेलवी’ एक दिल छू लेने वाली कहानी है—एक ऐसे आदमी की, जो ट्रकों और टेम्पो के पीछे लाइनें लिखता है, और सपने देखता है शायरी के मंच पर खड़े होने के।

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