लोहिया ग्रामीण बसों में नहीं दिखती सब्जी रखने वाली रैक

Update: 2017-02-10 11:35 GMT
बसों में किसानों को सब्जी, फल, गल्ला व दूध की बाल्टी रखने के लिए अलग से जगह (रैक) दी गई थी। परिवहन विभाग अब इन रैकों को हटवा रहा है।

लखनऊ। गाँव से आने वाले किसान व दुध विक्रेता अपने उत्पाद को आसानी से शहर की मंडी तक पहुंचा सकें इसके लिए मुख्यमंत्री ने लोहिया ग्रामीण बस सेवा शुरू की थी। इन बसों में किसानों को सब्जी, फल, गल्ला व दूध की बाल्टी रखने के लिए अलग से जगह (रैक) दी गई थी। परिवहन विभाग, उत्तर प्रदेश अब इन रैकों को हटवा रहा है।

प्रदेश के ग्रामीण अंचलों को बेहतर यातायात से जोड़ने के लिए प्रदेश सरकार ने वर्ष 2015 में लोहिया ग्रामीण सेवा शुरुआत की थी। इन बसों में गाँवों से आने वाले किसानों, गल्ला व्यापारियों और दूध वालों को लिए रोडवेज विभाग साधारण किराए के साथ-साथ सामान रखने की जगह भी प्रदान की जाती थी।

लोहिया बसों में फेरबदल होने के बारे में परिवहन निगम, उत्तरप्रदेश के क्षेत्रीय प्रबंधक (लखनऊ-फैज़ाबाद मंडल) रामजीत वर्मा बताते हैं, ‘’बसों में लगाई गई रैकों में सामान रखने के लिए पहले आवेदन पत्र एआरएम कार्यालय में जमा करना पड़ता था पर हमें आज तक इसके लिए कोई भी आवेदन नहीं मिले। एक बस में ये रैक छह सीटों की जगह घेरती है, इसलिए विभाग सुविधा को देखते हुए ये रैकों को हटवा रहा है।’’

बसों में लगाई गई रैकों में सामान रखने के लिए पहले आवेदन पत्र एआरएम कार्यालय में जमा करना पड़ता था पर हमें आज तक इसके लिए कोई भी आवेदन नहीं मिले। एक बस में ये रैक छह सीटों की जगह घेरती है, इसलिए विभाग सुविधा को देखते हुए ये रैकों को हटवा रहा है।
रामजीत वर्मा, क्षेत्रीय प्रबंधक, लखनऊ-फैज़ाबाद मंडल

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के अनुसार, विश्व में सबसे अधिक 33 लाख किमी क्षेत्र में फैले सड़क नेटवर्क के साथ भारत दुनिया का सबसे बड़ा राजमार्गों वाला देश है। देश के सड़क मार्गों में ज़्यादा योगदान ग्रामीण सड़कों का है, जिसका कुल क्षेत्र फल 26 लाख किमी. से भी ज़्यादा है।

‘’जो बसें पहले कानपुर कारखाने से बनकर आती थीं। उनमें फल, सब्जी और दूध रखने की खुली रैक फिट होकर आती थी पर अब विभाग में जो भी नई बसें आ रही हैं, उनमें रैक नहीं लगी हैं।” रामजीत वर्मा ने बताया। लोहिया बस सुविधा की शुरुआत में बसों में सामान रखने के लिए रैक लगवाई गईं थी। इन रैकों में किसान अपना सामान रखकर मंडी तक ला सकते थे, इससे उनके उत्पादों को मंडी ले जाने के लिए वाहन का भाड़ा भी बचता था।

उत्तर प्रदेश परिवहन निगम से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश में 656 ग्रामीण मार्गों पर पड़ने वाले 39,814 गाँवों तक लोहिया बसों का संचालन किया जा रहा है। लोहिया ग्रामीण सेवा के तहत प्रदेश में 565 लोहिया बसों का संचालन किया जा रहा है। इनमें से 80 फीसदी बसें ग्रामीण रूटों पर चलती हैं।

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