जरुरी नहीं कीटनाशक , मित्र कीट भी कीट-पतंगों का कर सकते हैं सफाया

गाँव कनेक्शन | Sep 09, 2017, 14:42 IST

विकास सिंह तोमर (कम्युनिटी रिर्पोटर)

महोली (सीतापुर)। टमाटर में रोपाई से लेकर फसल की कटाई तक बड़ी संख्या में कीटों का प्रकोप रहता है। ऐसे में किसान रासायनिक कीटनाशक का प्रयोग करता है, जो कि पर्यावरण और फसल दोनों के लिए नुकसानदायक होता है। ऐसे में किसान मुख्य फसल के साथ ही दूसरी फसलें लगाकर कीटों से बचाया जा सकता है। इसे ही कीट प्रबंधन करते हैं।

किसानों को दे रहे मुफ्त जानकारी

ऐसे में किसान टमाटर की फसल के साथ ही दूसरी फसल लगाकर इन कीटों से टमाटर की फसल को बचा सकते हैं। ऐसा करने से किसानों को अतिरिक्त आय भी हो जाती है। कृषि विज्ञान केन्द्र, कटिया के कृषि विशेषज्ञ डॉ. दयाशंकर श्रीवास्तव गाँव में किसानों इसकी जानकारी दे रहे हैं।

बाजरा लगाओ, सफेद मक्खी से राहत पाओ

कृषि विज्ञान केन्द्र, कटिया के कृषि डॉ दया शंकर श्रीवास्तव बताते हैं, "टमाटर की फसल में फल छेदक, माहू, सफेद मक्खी, और मकड़ी जैसे कीट उत्पादन तो कम करते ही हैं, साथ ही टमाटर पत्ती कर्ल वायरस जैसे को फैलने में मदद करते हैं।" वो आगे बताते हैं, "सफ़ेद मक्खी की समस्या को देखते हुए हम किसानों को सलाह देते हैं कि खेत की मेढ़ पर सघन रूप से बाजरा या ज्वार या मक्का की बुआई लगभग 15 इंच की चौड़ी लाइन लगाने से सफ़ेद मक्खी से बहुत हद तक निजात मिल जाती है।"

कृषि विशेषज्ञ डॉ. दयाशंकर श्रीवास्तव गाँव में किसानों जानकारी दे रहे हैं कीटों से बचने की।

निमेटोड के प्रकोप से मिलेगी राहत

साथ ही, अफ्रीकन गेंदा के पौधों की भी कम से कम एक लाइन खेत के चारों ओर लगाने से निमोटोड की रोकथाम के साथ साथ अन्य कीट से भी फसल को बचाव होता है। इसके साथ मित्र कीट भी खेत में आते है। कीट आकर्षित फसलें एक प्रकार की रक्षक फसलें होती हैं जो कीटों कों अपनी ओर आकर्षित कर मुख्य फसल को विभिन्न प्रकार के कीटों या अन्य जीव जैसे निमेटोड के प्रकोप से बचाने के लिये उगाई जाती हैं।

मित्र कीटों की ऐसे होगी बढ़त

गेंदा के फूलों को बेचकर किसान को टमाटर के साथ ही अतिरिक्त आमदनी भी हो जाती है। एक तो टमाटर और फूलों की खेती से दोहरी कमाई हो जाती है दूसरे गेंदे की वजह से फसलों को फायदा पहुंचाने वाले मित्र कीटों की भी वृद्धि होती है।

कीट आकर्षित फसल लगाने के लाभ

यह मुख्य फसल की गुणवत्ता को बनाये रखती हैं। यह मृदा स्वासथ्य व पर्यावरण के संतुलन को बनाये रखती हैं। फसल के उत्पादकता को बढाती हैं। जैव विविधता को बढ़ाने मे सहायक होती हैं। फसलों के मित्र कीटों को आकर्षित करती हैं। हानिकारक कीटों के प्रकोप से मुख्य फसल की रक्षा करती हैं। कीटनाशी के अधिक मात्रा में उपयोग को कम करती है।

इऩ नीली पीली पट्टियों से भी बचा सकते हैं फसल।

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