मई-जून महीने में देश के 80 करोड़ लोगों को फिर मिलेगा 5 किलो ज्यादा मुफ्त राशन

राशन कार्ड धारकों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मई और जून में मिलेगा प्रति व्यक्ति 5 किलो अतिरिक्त गेहूं-चावल, देश में कोविड के बढ़ते मामलों और कई राज्यों में लगे लॉकडाउन के चलते लिया गया निर्णय।

मई-जून महीने में देश के 80 करोड़ लोगों को फिर मिलेगा 5 किलो ज्यादा मुफ्त राशन

सरकार की इस योजना से 80 करोड़ लोगों का लाभ मिलेगा। फोटो: गाँव कनेक्शन

देश में कोविड के बढ़ते मामलों और कई राज्यों में लगे लॉकडाउन से लोगों का काम प्रभावित हुआ है। कोई भूखा न रहे है ऐसे में फिर राशन कार्ड धारकों को हर महीने पात्रता से अधिक (प्रति व्यक्ति पांच किलो) अनाज दिया जाएगा।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (एनएफएसए) के अंतर्गत आने वाले लगभग 80 करोड़ लाभार्थियों को अगले दो महीनों यानी मई और जून में सार्वजनिक राशन वितरण प्रणाली के माध्यम से प्रत्येक परिवार में प्रति व्यक्ति के हिसाब से 5 किलोग्राम अतिरिक्त अनाज की घोषणा की गई है।

2020 में कोरोना के कारण लगाए गए लॉकडाउन का सबसे अधिक असर गरीब और निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ा था। लाखों लोगों का रोजगार छूट गया और लोग बड़े-बड़े शहरों को छोड़कर अपने घर लौट आए। ऐसे में रोज कमाकर खाने वाले लोगों के सामने राशन की समस्या आयी थी। सरकार ने लॉकडाउन लागू होने के कुछ दिनों बाद 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना' के तहत सार्वजनिक राशन वितरण प्रणाली में अतिरिक्त अनाज देना शुरू किया था। यह योजना नवंबर 2020 तक चली थी।

साल 2020 में भारत के सबसे बड़े ग्रामीण मीडिया प्लेटफॉर्म गांव कनेक्शन ने लॉकडाउन के बाद ग्रामीण भारत में इसका प्रभाव जानने के लिए देशव्यापी सर्वे किया था। सर्वे के अनुसार लगभग 71 फीसदी राशन कार्डधारकों ने कहा कि उन्हें मुफ्त राशन मिला। हालांकि जिनके पास राशन कार्ड नहीं थे, उनमें से लगभग तीन चौथाई (73 फीसदी) लोग को इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया। इनमें से सिर्फ 27 फीसदी लोगों को ही इस मुफ्त राशन योजना का लाभ मिल पाया। (पूरा सर्वे यहां पढ़ें)

गाँव कनेक्शन के सर्वे के अनुसार पिछले साल 71 प्रतिशत राशन कार्ड धारकों का मुफ्त राशन मिला था।

गाँव कनेक्शन द्वारा किया गया सर्वे देश के 20 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों के 179 जिलों में 25,000 से ज्यादा ग्रामीणों के बीच हुआ। 30 मई से 16 जुलाई के बीच चले इस सर्वे में ग्रामीणों ने लॉकडाउन से उपजे हालात को गांव कनेक्शन के साथ साझा किया।

गाँव कनेक्शन ने अपने सर्वे में पाया कि राशन ना मिलने की दिक्कत उन लोगों को अधिक हुई, जिनके पास राशन कार्ड नहीं था। इस सर्वे के अनुसार 25,371 उत्तरदाताओं में 83 फीसदी लोग ऐसे थे, जिनके पास राशन कार्ड था। इनमें से 71 फीसदी लोगों को राशन मिला, जबकि 29 फीसदी लोगों की एक बड़ी संख्या भी ऐसी थी, जिन्हें राशन कार्ड होने के बावजूद भी मुफ्त राशन की सुविधा नहीं मिली।

इस सर्वे में यह भी पता चला कि उन जिलों में लोगों को मुफ्त राशन लेने में अधिक दिक्कत हुई जो लोग रेड जोन में थे। सर्वे के मुताबिक जहां ग्रीन जोन में 77 फीसदी लोगों को मुफ्त राशन मिला, वहीं रेड जोन में रहने वाले सिर्फ 60 फीसदी लोगों को ही यह सुविधा मिल पाई। जबकि ऑरेन्ज जोन में रहने वाले 70 फीसदी लोगों को राशन मिला। ये जोन भारत सरकार के एक मई, 2020 के शासनादेश के अनुसार निर्धारित किए गए थे।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (एनएफएसए) के तहत, एनएफएसए के दोनों श्रेणियों - अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) और प्राथमिकता वाले गृहस्वामी (पीएचएच) - के तहत कवर किए गए लगभग 80 करोड़ एनएफएसए के लाभार्थियों को मुफ्त अनाज (चावल/गेहूं) का अतिरिक्त कोटा आने वाले महीने मई और जून में 5 किलोग्राम प्रति व्यक्ति की दर से दिया जाएगा, जोकि एनएफएसए के तहत उनकी नियमित मासिक पात्रता से अधिक और अतिरिक्त होगा।

भारत सरकार इन खाद्यान्नों की लागत, उनके अंतरराज्यीय परिवहन आदि पर होने वाले 26,000 करोड़ रुपये से अधिक का सारा खर्च राज्यों/केन्द्र-शासित प्रदेशों को केंद्रीय सहायता के हिस्से के तौर पर वहन करेगी।

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