नोटबंदी के बाद भी नहीं उबर पा रही हैं ग्रामीण बैंक की शाखाएं

Rajeev Shukla | Jun 16, 2017, 20:41 IST
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नोटबंदी के बाद भी नहीं उबर पा रही हैं ग्रामीण बैंक की शाखाएं
स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

कानपुर। नोटबंदी के कई महीने बीत जाने के बाद भी ग्रामीणों क्षेत्रों में अभी भी पैसे की किल्लत कम नहीं हुई है। स्थिति है कि कोई बड़ी रकम की निकासी के लिए जाता है तो उसे लौटा दिया जाता है। कानपुर नगर के बिधनू ब्लॉक के भारतीय स्टेट बैंक में जब रामरतन यादव अपने बेटी की शादी के लिए पैसे निकालने गए तो बैंक में उसे जवाब दिया गया कि आप जितने पैसे निकालने आए हैं, उतने तो आपको अभी नहीं मिल सकते अभी ऐसा करें कि 25 हजार रुपए निकालने जबकि राम रतन डेढ़ लाख रुपए निकालने गए थे। जो कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से धीरे-धीरे करके बैंक के अपने बचत खाते में जमा किए थे।

यह हाल केवल रामरतन का ही नहीं बहुत से लोगों का है, नौबस्ता के रहने वाले अभिनव गुप्ता जब अपने खाते से 70000 निकालने गए थे तो बैंक में उनसे कहा गया कि आप 20-20 हजार रुपए करके तीन से चार दिन में निकाल लें।

यह हाल इन्हीं दोनों बैंकों का नहीं वरन भारतीय स्टेट बैंक की कई शाखाओं का है पैसे निकालने के लिए पहुंचे लोगों को उनकी आवश्यकता के अनुसार धनराशि नहीं उपलब्ध कराई जा रही है। बैंक अपने आधार पर उनसे राशि की निकासी के लिए कह रहा है।

भारतीय स्टेट बैंक की शाखा गोविंद नगर में 50000 रुपए की निकासी के लिए कांति देवी बताती हैं, "मेरी बेटी की शादी तीन जुलाई को है, जिसकी खरीदारी के लिए मुझे पैसे की जरूरत है यहां आने पर कैसी है मैडम बोल रही हैं कि आज तो इतना पैसा नहीं है आप ऐसा करिए कि 15000 रुपए आज निकाल लीजिए बाकी फिर किसी दिन आकर निकाल लीजिएगा।"

भारतीय स्टेट बैंक गोविंद नगर के शाखा प्रबंधक पी एन मिश्रा बताते हैं, "एक दो बार ऐसी समस्या हुई है लेकिन धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होती जा रही है बैंक में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को भुगतान किया जा रहा है।"

वहीं भारतीय स्टेट बैंक बिधनू में कार्यरत एक कर्मचारी ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया, "अभी भी बैंक नोट बंदी से नहीं करा पाए हैं, ग्रामीण शाखाओं में नगदी की समस्या अभी भी है, धीरे-धीरे स्थिति या सामान्य तो हो रही है, लेकिन कोई यह बताने वाला नहीं है कि स्थितियां पूरी तरह से कब ठीक होगी हम लोग भी चाहते हैं कि आने वाले व्यक्ति को भुगतान कर दिया जाए लेकिन मजबूरी होती है।"

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