इलाहाबाद: भेड़ के बालों की बिक्री थमी,25 रुपए बिकने वाला बाल अब 5 रूपए में भी नहीं बिक रहा

गाँव कनेक्शन | Sep 22, 2017, 13:15 IST
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अंकित तिवारी, स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

इलाहाबाद। जिले के ग्रामीण इलाकों में भेड़ पालन कर जीविकोपार्जन करने वाले लोग गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। भेड़ों के बाल बेचकर गृहस्थी चलाने वाले पालकों को ग्राहक नहीं मिल रहे हैं, जिस वजह से उनके घरों में भेड़ का बाल तो इकट्ठा है पर वे आर्थिक कमी से जूझ रहे हैं।

विरहना निवासी देवीशंकर पाल (45 वर्ष) कहते हैं, “पहले बाल के ग्राहक बड़ी संख्या में आते थे जो 25 रुपए प्रति किलो की दर से बालों को खरीद लेते थे, लेकिन अब बाल खरीदने वाले नहीं आ रहे हैं और कभी कोई खरीदने आ गया तो बाल की कीमत गिराकर बात करता है। 25 रुपए किलो की दर से बिकने वाले भेड़ों की बाल को पांच रुपए किलो का भी मूल्य नहीं मिल रहा है। आने वाले खरीदार तीन से चार रुपया किलो बाल मांगते हैं।”

पहले प्रदेश के बाहर से भेड़ के बाल की खरीदारी करने वाले व्यापारी आते थे, लेकिन केंद्र में सरकार बदलते ही वे व्यापारी बाल खरीदने आना बंद कर दिए। पिछले तीन साल से भेड़ के बाल की बिक्री को लेकर संकट का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में भेढ़ पालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, और उनका घर चलना भी मुश्किल हो रहा है।

बड़े स्तर पर भूमिहीन ग्रामीण करते हैं भेड़ पालन

जिले के यमुनापार क्षेत्र में बड़े स्तर पर भूमिहीन ग्रामीण भेड़ पालन कर अपना जीविकोपार्जन करते हैं। जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर मेजा ब्लाक के तीन गाँव उरनाव, गोसाइना खुर्द, विरहना गाँव के पाल बस्ती में सैकड़ों की संख्या में भेड़ों का पालन किया गया हैं। जहां के पालक भेड़ो के बाल बेचने के लिए परेशानी का सामना कर रहे हैं।

यदि समय पर भेड़ो के बाल नहीं काटे जाय तो वे एक निश्चित समय पर गिर जाते हैं और देर से बाल काटने पर भेड़ों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। जिस वजह से भेड़ो के बाल काटकर घर में रखा गया है। इस सम्बंध में चीफ वेटनेरी ऑफिसर डॉ चन्दन शर्मा कहते हैं, “भेड़ों के पालन में बीमारियों से बचाव की जिम्मेदारी हमारी है लिए इस समस्या के निराकरण के लिए एक परियोजना अधिकारी की नियुक्ति की गई है, जिन्हें तीन मंडलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।”

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