हम रजाई से निकलने से डरते हैं, किसान गलन में जूझते हैं

हम रजाई से निकलने से डरते हैं, किसान गलन में जूझते हैंझुलसा से बचने के लिए आलू की फसल में पानी लगाता किसान

गुगरापुर(कन्नौज)। बीते तीन दिनों से पड़ रही गलन से जहां लोग रजाई से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं वहीं आलू किसानों के लिए सर्दी में ठंडे पानी से जूझना किसी बड़े युद्ध से कम नहीं है। कोहरे ने किसानों के चेहरों पर मायूसी ला दी है। गलन बढ़ने से आलू की फसल में झुलसा रोग की शुरुआत हो गयी है।

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कन्नौज जनपद की मुख्य फसल आलू है। पिछले साल करीब 48 हजार हेक्टेयर रकवे में आलू किया गया। उद्यान विभाग के मुताबिक इस साल भी करीब 45 हजार हेक्टेयर आलू हुआ है।

जिला मुख्यालय कन्नौज से करीब 28 किमी दूर ब्लाॅक गुगरापुर क्षेत्र के सद्दूपुर निवासी 58 वर्शीय रामानंद बाथम बताते हैं, ‘‘सर्दी तो लग रही है पर करें क्या। पानी नहीं लगाएंगे तो खाएंगे क्या। गलन, पाला और कोहरे में आलू की फसल में झुलसा लग जाता है। उत्पादन भी कम होता है। इसी से बचने के लिए पानी में लगाए हैं।’’

साइफन से आलू की फसल में होती सिंचाई

30 साल के सोनू मिश्र कहते हैं, ‘‘सर्दी तो बहुत है। कोहरा भी पड़ रहा है। बिजली भी नहीं आ रही। खेत सूख रहे हैं इसी वजह से आलू की फसल में पानी लगा रहे हैं।’’

‘‘तीन-चार दिन तक अगर ऐसा ही मौसम रहा तो आलू में नुकसान होगा। रेट भी बढ़ जाएंगे।’’
मनोज कुमार चतुर्वेदी डीएचओ- कन्नौज

हाड़कंपाऊ मौसम ज्यादा नुकसानदेह होता है। ज्यादा ठंड पड़ने से आलू का पौधा सिकुड़ कर मुरझा जाता है। जिसे झुलसा रोग कहा जाता है। झुलसा का असर आलू के उत्पादन पर पड़ता है। पौध मुरझाने से आलू की ग्रोथ वहीं रुक जाती है और उत्पादन घट जाता है। दो दिन की गलन से कन्नौज में आलू पर झुलसा का असर दिखने लगा है। समय पर दवा न डालने से एक बड़ा एरिया इसकी चपेट में आ गया है।

ठंड लगती तो अलाव तापते

सर्दी लगती है तो खेतों में काम करते-करते ऐसे राहत लेने का प्रयास करते हैं किसान

जो किसान खेतों में पानी लगा रहे हैं जब उनको ठंड से रहा नहीं जाता है तो वह अलाव तापने लगते हैं। पुआल जलाकर भी सर्दी दूर करने का प्रयास करते हैं। राहत मिलने पर फिर खेतों में पहुंचकर पानी का हाल देखते हैं।

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कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. वीके कनौजिया कहते हैं, “‘अगर चार-पांच दिन से ज्यादा मौसम ऐसे ही रहा तो नुकसान होगा। तापमान और गिरा तो पाला पड़ेगा, वह फसलों के लिए नुकसानदेय है। थोड़ा सा धूप निकल रही है तो सही, नहीं निकलेगी तो दिक्कत होगी। पौधे भोजन नहीं बना पाएंगे। सर्दी अधिक होती है तो पौधों को काम करने में दिक्कत होगी। ऐसे मौसम में खेतों में पानी लगाना जरूरी है आलू की फसल में नमी रहनी चाहिए, यह पाला से बचाव का अच्छा तरीका है। किसान गंधक का छिड़काव कर सकते हैं इससे पाला और सर्दी का असर कम होगा।”

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