यह किट बताएगी मछलियों में मिलावट है या नहीं

यह किट बताएगी मछलियों में मिलावट है या नहींकृषि मंत्री राधा मोहन सिंह।

सीआईएफटी ने एक ऐसी किट बनाई है जिससे अब मछलियों में अमोनिया तथा फॉर्मेल्‍डहाइड के मिलावट की जांच करना आसान हो जाएगा। इस किट का नाम त्‍वरित परीक्षण किट या सिफ्टेस्‍ट रखा गया है।

मछलियों को जल्दी खराब होने से रोकने और बर्फ में फिसलन खत्म करने के लिए अमोनिया तथा फॉर्मेल्‍डहाइड का इस्तेमाल किया जाता है। जांच किट मछलियों में दोनों रसायनों की उपस्थिति का पता लगाता है।

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सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज टेक्नालॉजी कोच्चि ने विकसित मछलियों में रासायनिक मिलावट या छिड़काव का पता लगाने वाली किट - त्‍वरित परीक्षण किट (सिफ्टेस्‍ट) को आज लांच किया। इस अवसर पर केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने बताया कि अमोनिया तथा फॉर्मेल्‍डहाइड के सेवन से मनुष्यों में अनेक स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी समस्‍याएं जैसे, पेट दर्द, बेहोशी जैसी कई समस्याएं पेदा हो जाती हैं, और लापरवाही बरतने पर व्यक्ति की मृत्‍यु भी हो सकती है।

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सभी प्रकार के मत्स्य पालन (कैप्चर एवं कल्चर) के उत्पादन को एक साथ मिलकर, 2016-17 में देश में कुल मछली उत्पादन 11.41 मिलियन टन तक पहुंच गया है।

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राधा मोहन सिंह बताते हैं कि मछली का सेवन स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अत्‍यंत लाभकारी होता है। मछलियां जल्दी खराब हो जाती हैं इसलिए उनका लंबे समय तक भंडारण नहीं किया जा सकता है। भारतीय घरेलु मत्‍स्‍य बाज़ार में फॉर्मेल्‍डहाइड तथा अमोनिया युक्‍त मत्‍स्‍य के व्रिकय होने की सूचनाएं आए दिन प्राप्‍त प्राप्त हो रही हैं, विशेषत: उन बाज़ारों में जो उत्‍पादन केंद्रों से दूरदराज स्थानों में स्थित हैं। राष्‍ट्रीय एवं अंर्तराष्‍ट्रीय विनियमों के अनुसार मत्‍स्‍य उत्पादों को सिर्फ बर्फ के माध्‍यम से संरक्षित किया जाना चाहिए तथा मत्‍स्‍य परिरक्षण के लिए किसी भी रसायन का उपयोग पूर्णत: वर्जित है।

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कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक दशक में जहां दुनिया में मछली और मत्स्य उत्पादों की औसत वार्षिक वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत दर्ज की गई वहीं भारत 14.8 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर के साथ पहले स्थान पर रहा। विश्व की 25 प्रतिशत से अधिक प्रोटीन आहार मछली द्वारा किया जाता है और मानव आबादी प्रतिवर्ष 100 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक मछली को खाद्य के रूप में उपभोग करती है।

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केन्द्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि भोजन में दूषित पदार्थों की नियमित जांच एक दीर्घकालिन प्रक्रिया है परन्तु कुछ व्यक्ति दूषित पदार्थों के रूप में अनेक विषैले रसायनों का प्रयोग करने लगे हैं। आज का उपभोक्‍ता भोजन की गुणवता की सुरक्षा को लेकर बहुत सजग है। उपभोक्‍ता को दूषित पदार्थों की जांच के लिए ऐसी तकनीक की जरूरत है, जो संवेदनशील सुवाद्य होने के साथ-साथ शीघ्रता से दूषित पदार्थों का पता लगा सके।

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उपभोक्‍ता इन परीक्षण किटों का प्रयोग सरल तरीकों से कर सकता है। किट के भीतर कागज़ की पट्टियां, रसायनिक द्रव्‍य तथा परिणाम जानने के लिए एक मानक चार्ट दिया गया है।

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फॉर्मेल्‍डहाइड एक कैंसर उत्‍प्रेरित करने वाला रसायन है, इसलिए मत्‍स्‍य परिरक्षण में इसका उपयोग चिंतनीय है। अतः मछलियों में अमोनिया तथा फॉर्मेल्‍डहाइड का सेवन स्वास्थ्य के लिए खतरा है, जिसे रोकना आवश्यक है।

गांव कनेक्शन/ इनपुट पीआईबी

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