स्ट्राबेरी की नई किस्म ‘अकिहिमे’ किसानों के लिए फायदेमंद, भारत में पहली बार हो रही खेती

स्ट्राबेरी की नई किस्म ‘अकिहिमे’ किसानों के लिए फायदेमंद, भारत में पहली बार हो रही खेतीस्ट्रॉबेरी की नई किस्म ‘अकिहिमे’ की पहली बार भारत में हो रही खेती।

पिछले कुछ वर्षों में देश में लगातार स्ट्रॉबेरी की खेती का विस्तार हो रहा है। पहले तो इसकी खेती सिर्फ ठंडे क्षेत्रों में होती थी लेकिन अब गर्म क्षेत्रों में भी इसकी खेती की जा रही है। इसके लिए किसान पौधों के अनुकूल वातावर खेत में बना कर रखते हैं। किसान इसकी खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। लेकिन भारत में हाल ही में स्ट्रॉबेरी की एक नई किस्म आई है जो दूसरी किस्मों के मुकाबले किसानों के लिए काफी फायदेमंद रहेगी। इस किस्म का नाम 'अकिहिमे' है।

जो भी किसान स्ट्रॉबेरी की खेती करता है वो इसके पौधे हिमाचल प्रदेश से मंगाता है। हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के ठाकुर अर्जुन चौधरी, जो सब्ज़ियों, फलों के बीज व पौध विक्रेता हैं बताते हैं, ''स्ट्रॉबेरी की ये नई किस्म अकिहिमे साउथ कोरिया से मंगाई है। भारत में इसकी खेती पहली बार की जा रही है।'' उन्होंने इसकी ख़ासियतों के बारे में बताया, ''इसका फल 22 से 40 ग्राम तक का होता है, जबकि दूसरी किस्मों का फल सिर्फ 15 से 30 ग्राम तक का ही होता है। इसके साथ ही इसका फल सख़्त होता है जिससे ये जल्दी खराब नहीं होता है। दूसरी किस्मों के फसल काफी मुलायम होते हैं जिससे वो जल्दी ख़राब हो जाते हैं।''

अगस्त से नवंबर तक मैदानी क्षेत्रों में स्ट्रॉबेरी की पौध की रोपाई की जाती है। एक एकड़ में स्ट्रॉबेरी के 32 हज़ार पौधे लगाए जाते हैं। दूसरे किस्म के एक पौधे से 400 से 600 ग्राम तक स्ट्रॉबेरी निकलती है जबकि इस नई किस्म के एक पौधे से 800 से 900 ग्राम तक स्ट्रॉबेरी का उत्पादन होता है। अर्जुन चौधरी ने बताया कि अभी तक मेरे पास इस किस्म के 30 लाख पौधों की मांग आ चुकी है और सितंबर 2017 से अभी तक करीब 7 लाख पौधे बेच भी चुका हूं।

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स्ट्रॉबेरी पहाड़ी इलाकों का पौधा है और देश के बारी इलाकों में ज्यादातर जगहों पर ये पॉली हाउस में उगाया जाता है। लेकिन कुछ किसान खुले में भी फसल ले रहे हैं। उत्तर प्रदेश में बाराबंकी के साथ गोरखपुर, मिर्जापुर, अंबेडकरनगर और बदायूं में भी कुछ किसान स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं।

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