इन युवाओं ने खोजा मोती की खेती का बहुउद्देशीय तरीका, मुनाफ़ा कई गुना ज्यादा 

इन युवाओं ने खोजा मोती की खेती का बहुउद्देशीय तरीका, मुनाफ़ा कई गुना ज्यादा कैलाश मीणा और सीताराम चौधरी ने मोती की खेती करने का निकाला अनूठा तरीका 

आप मोती की खेती करने वाले कई किसानों से मिले होंगे जो अच्छा मुनाफा कमा रहे होंगे लेकिन हम आपको मिलवाते हैं कुछ ऐसे युवा किसानों से जो सिर्फ खेती से ही नहीं, मोती व उसके कवच यानि सीप से बने उत्पादों से भी मुनाफा कमा रहे हैं। यही नहीं वे इसके लिए इस्तेमाल होने वाले तालाब से भी पैसे कमा रहे हैं यानि आम के आम गुठलियों के दाम...

अगर आप भी मोती की खेती करने के शौक़ीन हैं तो राजस्थान के इन युवाओं से जरूर मिलें। जिन्होंने मोती की खेती बहुउद्देशीय तरीके से न सिर्फ खुद की है बल्कि कई राज्यों में इनके सिखाए किसान बहुउद्देशीय तरीके से मोती की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। इन युवा किसानों ने अपनी सूझ-बूझ से 12 से 15 महीने वाली मोती की खेती को इस तरह से किया है जिससे इस खेती से साल भर लाभ लिया जा सके।

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इनके तालाब को कई किसान आते हैं देखने।

ये ख़राब हुए सीपों से आर्टीफीशियल ज्वैलरी बनाते हैं, उसी तालाब में मछली और बत्तख पालन करते हैं। तालाब के आस-पास कई तरह की सब्जियां उगाते हैं। जैविक खाद बनाते हैं साथ ही बकरी पालन करते हैं। एक सीप जहां 10 से 12 रुपए की मिलती हैं वहीं एक सीप से दो मोती निकलते हैं। इस समय एक मोती की कीमत बाजार में 800 से 1200 रुपए है, अगर इस मोती में थोड़ी सी डिजाइनिंग कर दी जाए तो ये एक मोती 2500 से 3000 का बिकता है। राजस्थान के कैलाश मीणा (25 वर्ष) और सीताराम चौधरी (27 वर्ष) ने इस खेती की शुरुआत मार्च 2017 में की थी। इन्होंने देश के कई राज्यों के 180 किसानों को प्रशिक्षित किया जिसमें 50 से ज्यादा किसान मोती की बहुउद्देशीय खेती कर रहे हैं।

मिल रहा सीधा लाभ

एम कॉम की पढ़ाई कर चुके कैलाश मीणा गांव कनेक्शन को फ़ोन पर बताते हैं, “किसान कोई भी एक फसल करता है तो उसी पर निर्भर हो जाता है। अपने अनाज को किसान बाजार में सीधे बेच देता है जिससे उसे सही लाभ नहीं मिलता। इसलिए मैंने ये सोचा क्यों न इसके कई तरह के उत्पाद बनाकर ग्राहकों तक सीधे पहुंचाएं जिससे इसका लाभ सीधे मुझे मिले।”

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सीपों की सर्जरी करते किसान।

फेसबुक पर मोती की खेती का एक वीडियो देखने के बाद मध्य प्रदेश से ट्रेनिंग लेकर आए कैलाश मीणा अपना अनुभव साझा करते हुए बताते हैं, “मुझे लगा मोती की खेती का उत्पादन 12 महीने बाद मिलेगा, इसलिए मैंने इस तालाब में ही मछली पालन किया। चार महीने में 50 हजार की मछली बेच ली। जो सीप खराब हो जाती हैं उनकी आर्टीफीशियल ज्वैलरी के अलावा पेन स्टैंड जैसे कई तरह के सामान बनाकर बेचते हैं।”

राजस्थान के जयपुर जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर हिंगोनिया के पास मुख्य सड़क पर सुन्दरियावास गांव के कैलाश मीणा ने 70 हजार रुपए की लागत से तालाब में 3 हजार सीप डाली थीं जिससे मार्च-अप्रैल में मोती निकलेंगी। इसमें डिजाइनर मोती, गोल मोती, हाफ राउंडर मोती निकलेंगी।

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खराब सीपियों से इस तरह बनती है आर्टीफीशियल ज्वैलरी।

सीताराम चौधरी का कहना है, “नौ कीमती धातुओं में हीरे के बाद दूसरे नम्बर पर मोती आता है। अगर किसान मोती की खेती करता है और इसकी डिजाइनिंग का कहीं से प्रशिक्षण ले लेता है तो वो कई गुना मुनाफा कमा सकता है। अगर तालाब आपके पास है तो मोती की खेती में बहुत ज्यादा लागत नहीं आती है। 12 महीने बाद अगर सीधे मोती ही बाजार में बेचा जाए तो पांच से छह लाख आसानी से कमाए जा सकते हैं।”

वो आगे बताते हैं, “देश में हर साल चाइना और जापान से 100 करोड़ का मोती आता है जिसका कारोबार होता है। अगर किसान खुद मोती का उत्पादन करे और उसकी डिजाइनिंग करे तो मुझे लगता है सभी फसलों में इस खेती का अच्छा स्कोप है।”

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सीताराम चौधरी किसानों को प्रशिक्षण देते हुए।

मोती की खेती के लिए ये हैं जरूरी बातें

मोती की खेती की शुरुआत एक साधारण किसान 20 हजार से कर सकता है। अगर किसान के पास तालाब है तो सीप खरीदकर उसे चार- पांच दिन पानी में रखकर वहां के आक्सीजन के अनुकूल बनाया जाता है। अगर किसान ने ट्रेनिंग खुद ली है तो इसकी सर्जरी करके एंटीबायोटिक देते हैं जिससे सीप 10 से 20 प्रतिशत की खराब होती हैं। इसकी खेती को करने का सही समय मार्च-अप्रैल, सितम्बर और अक्टूबर महीना है। पीएच मान सात से आठ होना चाहिए। तालाब का पानी महीनें में एक से दो बार बदला जाता है। इन सीप का खानपान बहुत महंगा नहीं होता है।

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तालाब के आस-पास कई तरह की सब्जियां।

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