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Weather Update : कई राज्यों में बारिश, ऐसे में क्या करें गेहूँ, आलू और सरसों किसान?

Divendra Singh | Jan 23, 2026, 14:06 IST
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आज देश के कई इलाकों में बारिश हुई है, भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार आने वाले कुछ दिनों में अभी बारिश और बर्फ़बारी हो सकती है। ऐसे में किसानों के जानना ज़रूरी है कि वो इस समय नुकसान से बचने के लिए क्या करें?
ये काम करके अपनी फसल बचा सकते हैं किसान।
अगले कुछ दिनों में उत्तर भारत के कई राज्यों में बारिश की संभावना है, इस समय गेहूँ, आलू और सरसों जैसी रबी फसलें खेतों में हैं, ऐसे में जानना ज़रूरी है कि ये बारिश खेती के लिए नुकसानदायक है या फिर फायदेमंद।

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में गेहूँ की बुवाई लगभग 334.17 लाख हेक्टेयर में हुई है। ऐसे में ये बारिश गेहूँ किसानों के लिए कैसे रहेगी, इस भारतीय गेहूँ एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल, हरियाणा के प्रधान वैज्ञानिक डॉ अनुज कुमार गाँव कनेक्शन से बताते हैं, "इस बार पिछले कई महीनों से बारिश नहीं हुई, इसलिए अगर बारिश होती है तो वो किसानों के लिए फायदेमंद होगी। इसलिए किसानों के लिए सलाह है कि अभी गेहूँ की सिंचाई न करें और न ही उसमें कोई छिड़काव करें।"

जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसके अलावा जम्मू, पंजाब और पूर्वी राजस्थान के कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की घटनाएं दर्ज की गई हैं। वहीं जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी भी हुई है, जिससे ठंड बढ़ने के साथ जनजीवन प्रभावित हुआ है।

मौसम विभाग के अनुसार, एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई है, जबकि जम्मू-कश्मीर में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा दर्ज की गई है। पश्चिमी विक्षोभ का असर अभी भी बना हुआ है और इसके चलते आज भी कई इलाकों में बारिश, गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज़ झोंकों वाली हवाओं की संभावना बनी हुई है।

मौसम विभाग ने जम्मू, कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तरी राजस्थान के लिए अगले तीन घंटे के दौरान बारिश, गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज़ हवाओं को लेकर नाउकास्ट अलर्ट जारी किया है।

इस समय उत्तर भारत के राज्यों में खेत में आलू की फसल है, ऐसे में बारिश का असर आलू की फसल पर भी पड़ सकता है। आईसीएआर-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला के निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह किसानों को सलाह देते हुए कहते हैं, "जिन किसानों ने देर से आलू की बुवाई की है, उनकी फसल को तो कोई नुकसान नहीं होगा, लेकिन आलू की फसल तैयार है और ऊपर से पत्तियाँ काट दी गईं हैं तब आलू की फसल को नुकसान हो सकता है। इसलिए अगले कुछ दिनों तक आलू की फसल को ऐसे ही रहने दें, नहीं तो पानी भरने से आलू की फसल खराब हो सकती है।"

क्या बारिश से होगा सरसों की फसल को नुकसान।
क्या बारिश से होगा सरसों की फसल को नुकसान।
इस बार रबी फसलों में तिलहन की बुवाई लगभग 89.36 लाख हेक्टेयर में हुई है, इस समय कहीं पर सरसों में फूल हैं तो कई किसानों की फसल में फलियाँ लग गईं हैं।

भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान, भरतपुर के निदेशक डॉ वीर विक्रम सिंह बताते हैं, "क्योंकि अभी हल्की से मध्यम बारिश हो रही है तो सरसों के लिए फायदेमंद ही है, लेकिन अगर तेज़ बारिश होती है तो क्योंकि अभी सरसों में फूल लगे हुए है्र उससे फूल झड़ जाएँगे, जिससे उत्पादन भी असर पड़ सकता है। साथ ही अगले कुछ दिन तक किसान न तो कोई छिड़काव करें और न सिंचाई करें, क्योंकि सिंचाई करने से अगर तेज़ हवा चलती है तो पौधे गिर सकते हैं।"

वो आगे कहते हैं, "इस समय सरसों में चेपा (Aphid) कीट का प्रकोप रहता है, बारिश होने से कीट धुल जाता है, जो किसानों के लिए फायदेमंद ही है।"

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भारत मौसम विज्ञान विभाग ने भी अलग-अलग राज्यों के किसानों के लिए मौसम आधारित सलाह जारी की है। प्रभावित राज्यों के किसानों को सतर्क रहने और फसलों की सुरक्षा के लिए ज़रूरी कदम उठाने की सलाह दी है।

जम्मू-कश्मीर के किसानों के लिए कहा गया है कि गेहूं, सरसों, चना, मटर और सब्जियों के खेतों से पानी निकालने की उचित व्यवस्था करें। अगर बर्फबारी होती है तो ऐसी स्थिति में पेड़ों को हल्के से हिलाकर उनकी डालियों से बर्फ तुरंत हटाएं, ताकि टहनियां टूटने से बच सकें।

हिमाचल प्रदेश में जिन किसानों की सब्जियों की फसल तोड़ने को तैयार हैं, वो जल्द से जल्द तोड़कर उन्हें सुरक्षित जगह पर रख दें। साथ ही खड़ी फसलों और सब्जियों के खेतों से बारिश का अतिरिक्त पानी निकालने के लिए उचित जल निकासी व्यवस्था करें।

उत्तराखंड किसान सरसों की तैयार फसल और गन्ने की फसल की कटाई कर लें और सुरक्षित जगह पर रख दें, जबकि खड़ी फसलों और सब्जियों के खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था करना जरूरी है।

उत्तरी पंजाब के किसान गेहूं, सरसों, गन्ना, बागवानी और सब्जी वर्गीय फसलों के खेतों में पानी भराव से बचाव के लिए जल निकासी व्यवस्था मजबूत करें।

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