जीरो बजट लागत से खेती करना सीखेंगे किसान

जीरो बजट लागत से खेती करना सीखेंगे किसानसुभाष पालेकर (बीच में)

लखनऊ। '' किसानों की आय अगर बढ़ाना है तो उन्हें शून्य लागत प्राकृतिक कृषि को अपनाना होगा। यही वह तरीका है जिससे देश की कृषि और किसानों की दशा सुधरेगी। '' जीरो लागत यानि शून्य लागत कृषि के जन्मदाता पद्मश्री सुभाष पालेकर ने सोमवार को यह बातें कहीं। लखनऊ में पहली बार मंगलवार को होने जा रहे रहे छह दिवसीय किसान प्रशिक्षण दिवस के बारे में जानकारी देने के लिए आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में बोल रहे थे।

लोक भारती संस्थान की तरफ से बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय लखनऊ में 20 से लेकर 25 दिसंबर तक शून्य लागत प्राकृतिक कृषि शिविर का आयोजन किया जा रहा है। आवासीय प्रशिक्षण शिविर का उदघाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुबह 10 बजे करेंगे। इस कार्यक्रम में प्रदेश के कृषि मंंत्री सूर्य प्रताप शाही उपस्थित रहेंगे।

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जीरो लागत प्राकृतिक कृषि प्रशिक्षण शिविर में उत्तर प्रदेश के 921 ब्लाक से कम से कम एक किसान और पूरे देश से 1500 किसान भाग लेंगे। इस शिविर में देश ही नहीं बल्कि श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश और मारीशस से किसान भाग लेंगे। इस प्रशिक्षण शिविर में शून्य लागत कृषि से प्राकृतिक खेती कैसे किसान करें यह जानकारी सुभाष पालेकर देंगे।


प्रशिक्षण दिवस के पहले दिन मंगलवार को किसान किस तरह जीरो लागत कृषि को अपनाएं यह बताया जाएगा। दूसरे दिन किसान खेती की जमीन को कैसे बलवान बनाएं यह जाकनारी दी जाएगी। तीसरे दिन पर्यावरण की रक्षा करते हुए कैसे खेती करें यह बताया जाएगा। चौथे दिन किसान हवा से पानी लेकर कैसे कम पानी में खेती कर सकें इसका गुर सिखाया जाएगा। पांचवे दिन किसानों को बिना कीटनाशक के जरिएफसल सुरक्षा कर सकें इसको बताया जाएगा। प्रशिक्षण शिविर के अंतिम दिन छठे दिन किसान अपनी उपज का बेहतर तरीके से कैसे विपणन करें पैसा काम सकें यह बताया जाएगा।

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देश-दुनिया में जीरो बजट खेती के तरीके के लिए प्रसिद्ध सुभाष पालेकर ने बताया कि देश में हरित क्रांति के नाम पर अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों, हानिकारक कीटनाशकों, हाईब्रिड बीजों और अत्यधिक भूजल के दोहन से भूमि की उर्वरा शक्ति कम हो रही है। रासायनिक खेती के इस तरीके से किसानों की लागत बढ़ रही और वह कर्ज में डूब रहे हैं, ऐस में बिना लागत के किसान प्राकृतिक खेती करके अपनी आय बढ़ा सकें इसके लिए देश में जीरो लागत प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने के लिए मिशन पर वह निकले हैं।


उन्होंने बताया कि किसान कृषि की बढ़ती लागत, खेत के लिए बाजार पर पूरी तरह निर्भरता और सरकार की कृषि के प्रति उदासीन नीति के कारण खेती छोड़ रहे हैं और आत्महत्या तक करने पर मजबूर हैं। सुभाष पालेकर ने बताया कि ऐसे में किसानों को ऐसी कृषि पद्धति अपनाने की जरुरत है जो किसान को बाजार के शोषणकारी व्यवस्था से बचाय जा सके। किसानों को बाजार से खेती करने के लिए कुछ भी खरीदना न पड़े इसके लिए शून्य लागत प्राकृतिक कृषि ही विकल्प है।

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उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न भागों में शून्य लागत कृषि का माडल अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ाने के साथ ही अच्छा अन्न पैदा कर रहे हैं। यह अन्न जो पूरी तरह विषाक्त और रासायनिक तत्वों से मुक्त है। सुभाष पालेकर से जीरो बजट खेती का गुर सीखकर हजारों किसान खेती को मुनाफे का सौदा बनाए हैं। उत्तर प्रदेश के फरूखाबाद जिले के शमसावाद ब्लाक के कुइयांधीर गांव के किसान हिमांशु गंगवार, हरियाणा के कुरक्षेत्र के किसान गुरदीप, राजस्थान के किसान किशन जाखड़, पंजाब के अमृतसर के किसान राजवीर सिंह और झांसी के किसान अयोध्या प्रसाद कुशवाहा शामिल हैं।

हिमांशू गंगवार


हिमांशु गंगवार ने गांव कनेक्शन को बताया ''मेरे पास 20 एकड़ खेती है, पहले इससे आमदनी नहीं होती थी लेकिन साल 2008 में जब उन्होंने जीरो लागत प्राकृतिक कृषि केा अपनाया तो आज खेती से अच्छी कमाई हो रही है। '' उन्होंने बताया कि आज वह सबकुछ प्राकृतिक तरीक से बिना रासायनिक खादों और कीटनाशकों के बिना उपजा रहे हैं। बाजार में उनके कृषि उत्पाद को अच्छी कीमत भी मिल रही है। किसान गुरजीत सिंह ने बताया ''जीरो लागत खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें खेती के लिए जो चीज भी चाहिए वह हम खुद बनाते हैं, बाजार से कोई भी चीज खरीदना नहीं पड़ता है। ऐसे में खेती करने में कोई लागत नहीं आती है और मुनाफा अच्छा होता है।''


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