धान खरीद के लिए सहकारी बैंकों को 40.22 करोड़ रुपए की अग्रिम राशि जारी

धान खरीद के लिए सहकारी बैंकों को 40.22 करोड़ रुपए की अग्रिम राशि जारीधान

रायपुर (भाषा)। छत्तीसगढ़ में धान खरीद के लिए सहकारी बैंकों को मार्कफेड ने 40.22 करोड़ रुपए की अग्रिम राशि जारी कर दी है। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) के अध्यक्ष राधाकृष्ण गुप्ता ने आज यहां बताया कि राज्य की सहकारी समितियों के 1992 उपार्जन केंद्रों में धान खरीदी के लिए मार्कफेड ने सभी जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों को 40 करोड 22 लाख रुपए की अग्रिम राशि जारी कर दी है।

गुप्ता ने बताया कि राज्य सरकार ने किसानों से धान खरीदी के लिए मार्कफेड को नोडल एजेंसी के रुप में अधिकृत किया है। मार्कफेड द्वारा सहकारी समितियों के माध्यम से समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन इस महीने की 15 तारीख से शुरु कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि सहकारी समितियों में चालू खरीफ विपणन वर्ष 2017-18 में 15 लाख 78 हजार किसानों का पंजीयन किया गया है। उनसे करीब 70 लाख टन धान खरीदने का अनुमानित लक्ष्य है। किसान निर्धारित 15 क्विंटल की मात्रा को अलग-अलग तीन बार में अपनी सुविधा से बेच सकता है। मोटे धान के लिए 1550 रुपए और पतले धान के लिए 1590 रुपए प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया गया है।

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गुप्ता ने बताया कि उपार्जन केंद्रों में धान बेचने वाले सभी किसानों को मुख्यमंत्री रमन सिंह की घोषणा के अनुसार अगले वर्ष भी 300 रुपए प्रति क्विंटल की दर से बोनस दिया जाएगा। मार्कफेड अध्यक्ष ने बताया कि मार्कफेड के 64 कार्यशील संग्रहण केंद्रों में आवश्यकतानुसार धान का सुरक्षित भण्डारण किया जाएगा।

राज्य शासन की नीति के अनुसार चालू खरीफ विपणन वर्ष 2017-18 में समर्थन मूल्य पर उपार्जित धान 50 प्रतिशत नए बारदानों में और 50 प्रतिशत पुराने बारदानों में खरीदा जाएगा। नये बारदानों की खरीदी के लिए मार्कफेड द्वारा 459 करोड़ 22 लाख रुपए का क्रय आदेश भारत सरकार के कोलकाता स्थित पटसन आयुक्त को जारी कर दिया गया है। राज्य की सहकारी समितियों में एक लाख 67 हजार 836 गठान नए बारदाने पहुंचाए जा चुके हैं।

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गुप्ता ने बताया कि इसके साथ ही जरुरी होने पर समितियों को पीडीएस के बारदानों का भी उपयोग करने का निर्देश राज्य शासन ने दिया है। सभी सहकारी समितियों के कम्प्यूटरों में जिलेवार धान उपार्जन के लिए साफ्टवेयर में नया वर्जन अपलोड कर दिया गया है, जिससे ऑनलाईन भुगतान में किसी प्रकार की असुविधा ना हो पाए।

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उन्होंने बताया कि खरीदी शुरु होने से पहले ही संग्रहण केंद्रों में धान के सुरक्षित भण्डारण की सभी तैयारी पूर्ण कर ली गयी है। राईस मिलरों को धान उठाव के लिए अलग-अलग समितियों से संलग्न किया जा चुका है। किसी भी परिस्थिति में मिलरों को अग्रिम चावल जमा कर धान नहीं दिया जा रहा है।

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