बम्पर उत्पादन के बावजूद इस बार फिर से महंगी हो सकती हैं दालें

vineet bajpaivineet bajpai   18 Nov 2017 5:27 PM GMT

बम्पर उत्पादन के बावजूद इस बार फिर से महंगी हो सकती हैं दालेंदाल में फिर लग सकता है महंगाई का तड़का

लखनऊ। आप की थाली की दाल में फिर महंगाई का तड़का लगने वाला है। आने वाले कुछ दिनों में अरहर समेत कई दालें महंगी हो सकती हैं। हालांकि इस महंगाई की आशंका के बीच अच्छी बात ये है कि इस बार बंपर उत्पादन करने वाले देश को किसानों को दालों के अच्छे रेट मिल सकते हैं।

पिछले दिनों भारत सरकार ने दालों के निर्यात पर लगी रोक हटा दी है। भारत के खेतों में पैदा हुई दाल अब विदेश जाएगी। ये फैसला सरकार ने इस बार दालों के अच्छे उत्पादन के चलते लिया है।पिछले तीन वर्षों के मुकाबले इस वर्ष भारत में दालों का उत्पाद बम्पर मात्रा में हुआ है। लेकिन इसके बावजूद आम आदमी की थाली से दाल गायब हो सकती है। भारत से दालों के निर्यात के साथ कीमते बढ़ने की दूसरी वजह यह भी है कि इस बार कनाडा में दाल के उत्पाद में गिरावट आने की सम्भावना है। भारत सबसे ज्‍यादा दाल कनाडा से ही आयात करता है।

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महाराष्ट्र के जालना ज़िले के किसान गुरुदत्त शिंदे बताते हैं, ‘‘पिछली बार दालों का उत्पादन अच्छा हुआ था, लेकिन कीमतें कम होने के कारण ज्यादा फयदा नहीं हुआ। अगर आगे दालों की कीमतें बढ़ती हैं तो अच्छा फायदा हो सकता है।’’ गुरुदत्त अरहर, उड़द और मूंग की खेती करते हैं।

उन्होंने बताया, ‘‘अभी मेरे पास 25-30 कुंतल अरहर, दो कुंतल उड़द और 6-7 कुंतल मूंग है। कीमतें कम होने के कारण अभी तक बेचा नहीं। यदि कीमतें बढ़ गईं तो अब बेचूंगा।’’

वहीं मध्य प्रदेश के खरगौन जिले के किसान कमल पाटीदार करीब 22 एकड़ में दलहनी फसलों की खेती करते हैं। वो बताते हैं, ‘‘अभी रेट अच्छे नहीं हैं। अगर दालों के निर्यात की वजह से कीमतें बढ़ती हैं तो हम लोगों के लिए काफी अच्छा होगा।’’

भारत में वर्ष 2014-15 में 1 करोड़ 71 लाख 50 हजार टन दालों का उत्पादन हुआ, वर्ष 2015-16 में 1 करोड़ 63 लाख 50 हज़ार टन दालों का उत्पादन हुआ और वर्ष 2016-17 में 2 करोड़ 24 लाख टन दालों का उत्पादन हुआ।

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पिछले तीन वर्षों में दालों का उत्पादन।

लखनऊ दाल एवं राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भारत भूषण गुप्ता ने बताया, ''भारत में प्रति वर्ष दो करोड़ 40 लाख टन से अधिक दालों की खपत है। इस बार भारत में दालों का उत्पादन करीब दो करोड़ टन से अधिक हुआ, जिससे पिछले कुछ समय से दालों की कीमतें कम हैं। लेकिन निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटा देने से कीमतें आने वाले समय में बढ़ सकती हैं।''

उन्होंने बताया, ''हर साल करीब 40 लाख टन दालें (मटर, अरहर, चना, उड़द और मसूर) बाहर से आयात की जाती हैं। ऐसे में यदि कनाडा में दालों का उत्पादन कम होने से वहां से आयात में कमी आई तो आने वाले समय में दालों की कीमतें बढ़ सकती हैं।''

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भारत भूषण गुप्ता आगे बताते हैं, ''भारत में दलहनी फसलों की कटाई जनवरी से मार्च के बीच में होती है, वो फसलें इस समय अच्छी हैं, अगर आगे किसी तरह की समस्या नहीं आई तो दालों की कीमतों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।''

भारत सबसे ज्‍यादा दाल कनाडा से ही आयात करता है। कनाडा से मसूर, मटर और चना की आपूर्ति होती है। लेकिन इस साल भारत को दाल के आयात में कनाडा की ओर से झटका लग सकता है, क्योंकि वहां उत्‍पादन कम होने की आशंका जताई जा रही है।

कनाडा के एग्रीकल्‍चर एंड एग्रीफूड कनाडा (एएएफसी) ने दलहन (मसूर) उत्‍पादन के अनुमान में 4 लाख टन की कमी की है। एएएफसी की वेबसाइट के अनुसार कनाडा में साल 2017-18 में मसूर उत्‍पादन 35 लाख टन होने का अनुमान लगाया जा रहा था। लेकिन अब एएएफसी ने इसे 31 लाख टन कर दिया है। इसके अलावा वहां चने के उत्‍पादन में भी लगभग 20 फीसदी कमी की आशंका जताई गई है।

agriexchange.apeda.gov.in के अनुसार भारत में वर्ष 2016 में देखें तो 54 लाख 91 हज़ार 7 सौ 21 मीट्रिक टन दालों का कुल आयात किया गया था, जिसमे सबसे ज्यादा (2257035.00 मीट्रिक टन) दालें कनाडा से आयात की गई थीं।

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भारत इन 10 देशों से आयात करता है दालें।

उत्तर प्रदेश मंडी परिषद के सह निदेशक दिनेश चन्द्रा ने बताया, ''अभी फिलहाल कीमते बढ़ने की ज्यादा उम्मीद नहीं है, क्योंकि इस बार यहां (भारत में) भी दालों का उत्पादन भारी मात्रा में हुआ है और सरकार ने भी दालों का भंडारण कर लिया है।'' उन्होंने आगे बताया, ''दालों के निर्यात की वजह से अगले वर्ष कीमतें बढ़ सकती हैं।''

दालों की कीमतों में आई कमी

पिछले एक वर्ष में तुअर, मसूर, उड़द आदि के दामों में 50 फीसदी से भी ज्‍यादा की कमी आई है। फुटकर बाजार में 200 रुपए तक बिकने वाली तुअर इस समय 70 रुपए प्रति किलोग्राम पर है। भरत भूषण गुप्ता ने बताया, ''सितम्बर-अक्टूबर 2015 में जो दालें थोक बाज़ार में 175-180 रुपए में बिक रही थीं वो इस समय 55 से 60 रुपए प्रति किलो बिक रही हैं।''

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