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  • एक गीतकार जिसकी आंखों ने ज़माने को बदलते देखा

    गीत आज कम होता जा रहा है लेकिन गीत कभी मरेगा नहीं क्योंकि गीत का संबंध लय से है. जब जब आदमी सुख-दु:ख में रहेगा, वो गाएगा ही 'कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है' कविता में ज़िंदगी की ऐसी ज़िंदादिली समेटे उस शख्स की बूढ़ी आंखों ने दौर को बदलते देखा है, वो कहता है, 'कलम की स्याही औऱ मन...

  • सफ़दर हाशमी , वो जिसे सच कहने पर सज़ा ए मौत मिली

    सफ़दर हाशमी का नाम यूं तो नुक्कड़ नाटक की कला से जोड़ कर देखा जाता है लेकिन हक़ीकत तो ये है कि वो न सिर्फ नाटककार बल्कि निर्देशक, लेखक और गीतकार भी थे। 12 अप्रैल 1954 को सफदर का दिल्ली में पैदा हुए सफदर हाशमी की शुरुआती ज़िंदगी अलीगढ़ में गुज़री और बाद में वो दिल्ली आ गए।उनके घर का माहौल हमेशा से...

  • नुक्कड़ नाटक के जरिए सफ़दर हाशमी बयां करते थे लोगों का दर्द 

    एक नाटककार, कलाकार, निर्देशक, गीतकार जैसी कई प्रतिभाओं के साथ जीने वाले सफदर हाशमी जिनकी मात्र 35 वर्ष की उम्र में हत्या कर दी गई। सफदर हाशमी जो लोगों के बीच में जाकर लोगों की समस्या को समझते और उनकी पीड़ा को नुक्कड़ नाटक व गीतों के माध्यम से प्रदर्शित करते थे।ये भी पढ़ें- गायिकी से लेकर अभिनय तक...

  • पढ़िए क्यों अपनी ही नगरी में पहचान को मोहताज हो गए अमीर खुसरो

    पटियाली (कासगंज)। दिल्ली स्थित मशहूर सूफी सन्त हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह शरीफ पर जब आप पहुचेंगे तो आपको सबसे पहले उनके सबसे प्रिय शिष्य हजरत अमीर खुसरों के मजार पर हाजिरी देनी होगी। यह यहां की परम्परा है जो सदियों से चली आ रही है। अमीर खुसरो के लिए यह उपाधि खुद हजरत निजामुद्दीन औलिया ने दी...

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