'दिल्ली चलो' आंदोलन से पहले हरियाणा में किसान नेताओं को हिरासत में लिया गया, पंजाब में किसानों की दिल्ली कूच की तैयारी

हरियाणा पुलिस ने कहा कि कोविड प्रोटोकाल के चलते इन किसान नेताओं को हिरासत में लिया जा रहा है ताकि इनके आह्वान पर सैकड़ों लोग इकट्ठा नहीं हो सकें। हालांकि पंजाब में अभी तक ऐसी कोई भी गिरफ्तारी नहीं हुई है।

दिल्ली चलो आंदोलन से पहले हरियाणा में किसान नेताओं को हिरासत में लिया गया, पंजाब में किसानों की दिल्ली कूच की तैयारी

- राहुल यादव, हरियाणा, गांव कनेक्शन

देश की राजधानी दिल्ली में 26 नवंबर को प्रस्तावित किसानों के आंदोलन से पहले हरियाणा में किसान नेताओं को हिरासत में लिया गया। 24 नवंबर को सुबह तड़के ही राज्य के अलग-अलग जगहों से बड़े पैमाने पर किसान नेताओं की गिरफ्तारियां हुईं और लगभग एक दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। इसमें लाडवा से करण सिंह, करनाल से जगदीप सिंह, तोशाम से रमेश पंघल, गोहाना से सत्यवान नरवाल, रोहतक से सुंदर सिंह और अनिल नांदल, यमुनानगर से सुभाष गुर्जर, सिरसा से एसपी सिंह, राम चंदर और झज्जर से सूबेदार सत्यनारायण प्रमुख हैं।

खरकड़ी से गिरफ्तार रमेश पंघाल ने गांव कनेक्शन को फोन पर बातचीत में बताया कि उन्हें सुबह 5:00 बजे तोशाम पुलिस स्टेशन ले जाया गया और उन्हें यह भी नहीं बताया कि उन्हें हिरासत में क्यों लिया जा रहा है। हालांकि, तोशाम पुलिस स्टेशन में तैनात एसआई सज्जन सिंह ने बताया कि रमेश पंघाल को केवल हिरासत में लिया गया है, गिरफ्तार नहीं किया गया है।

यह पूछने पर कि उन्हें क्यों हिरासत में लिया गया और किस आरोप में, एसआई सज्जन सिंह ने कहा, "चल रहे कोविड-19 महामारी को ध्यान में रखते हुए, इन लोगों को राज्य भर में हिरासत में लिया जा रहा है ताकि उन्हें यह समझाया जा सके कि वे विरोध के लिए भीड़ इकट्ठा ना करें। उन्होंने कहा कि किसान नेताओं को इस मार्च से बचना चाहिए अपने साथी किसानों से भी आग्रह करना चाहिए।

भारतीय किसान यूनियन (चडुनी समूह) के सदस्य बलकार सिंह ने कहा कि ये गिरफ्तारियां प्रदर्शनकारी किसानों को डराने के लिए की गई हैं क्योंकि हरियाणा सरकार आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है। लेकिन वे वापस नहीं आएंगे और 26-27 नवंबर को दिल्ली का किसी भी कीमत पर घेराव करेंगे।

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वहीं पंजाब में कृषि आंदोलन को व्यापक और सफल बनाने के लिए किसानों और कृषि नेताओं ने जोर-शोर से तैयारियां करना शुरू कर दिया है। महिला किसानों ने दिल्ली का दो दिन तक घेराव के लिए आनाज इकट्ठा करना शुरू कर दिया है। वे भी पुरूष किसानों के साथ दिल्ली कूच करने की तैयारी में हैं। गौरतलब है कि पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार ने कृषि कानूनों का विरोध किया है और उसके विरोध में विधानसभा में कानून भी बनाए हैं। वही हरियाणा में बीजेपी की मनोहर लाल खट्टर की सरकार है, जो इस विरोध को दबाने की तैयारी कर रही है।

आपको बता दें कि अध्यादेश के रूप में पेश किए जाने के बाद से ही नए कृषि कानूनों का पंजाब और हरियाणा राज्य में भारी विरोध हो रहा है। संसद के भीतर और बाहर विरोध के बावजूद बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार ने 20 सितंबर, 2020 को संसद के दोनों सदनों से इन विधेयकों को पारित करने में कामयाबी हासिल की। हरियाणा और पंजाब के किसान यूनियनों ने किसानों के लिए इस तिथि को "काला दिवस" कहा।

इन कानूनों का पूरी तरह वापिस लेने के लिए, एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) को किसानों का कानूनी अधिकार बनाने के लिए प्रमुख कृषि यूनियनों और केंद्र सरकार के बीच वार्ता भी हुई थी, जो बिना किसी निष्कर्ष पर ही पहुंचे समाप्त हो गई।

इसके बाद से देश भर में 400 से अधिक कृषि संगठनों ने 26-27 नवंबर, 2020 को दिल्ली घेराव का फैसला किया है। इस मार्च के लिए पंजाब और हरियाणा में बड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। महिला और पुरूष किसानों ने राशन इकट्ठा करना शुरू कर दिया है, ट्रैक्टर - ट्रॉलियां तैयार की जा रही हैं। वहीं दिल्ली की दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) ने इन किसानों का समर्थन देते हुए लंगर की भी व्यवस्था की है।

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