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किसान आंदोलन के तीन महीने पूरे होने पर मनाया गया युवा दिवस, आंदोलन में युवाओं के योगदान को किया गया याद

आंदोलन में शामिल लोगों ने कहा कि इस आंदोलन को बुजुर्गों ने होश, वहीं युवाओं ने जोश दिया है। लंगर का काम हो या फिर आंदोलन में शामिल बुजुर्ग मरीजों की सेवा, युवाओं ने इसे बखूबी संभाला है।

Amit PandeyAmit Pandey   27 Feb 2021 7:05 AM GMT

किसान आंदोलन के तीन महीने पूरे होने पर मनाया गया युवा दिवस, आंदोलन में युवाओं के योगदान को किया गया यादकिसान आंदोलन में युवा (सभी फोटो- अमित पांडेय)

26 फरवरी को किसान आंदोलन को दिल्ली के बॉर्डर पर आए हुए तीन महीने पूरे हो गए। संयुक्त किसान मोर्चा ने इस दिन को युवा किसान दिवस के रूप में मनाया। आंदोलन में युवाओं की भागीदारी को सम्मान देते हुए इस विशेष दिन पर आंदोलन की कमान युवाओं के हाथों में थमाई गईI इस दिन मंच का संचालन युवाओं ने की और केवल युवाओं ने ही भाषण दियाI दिन की शुरुआत में आंदोलन में शहीद हुए युवाओं को भी याद किया गयाI इसके अलावा युवाओं ने देश में बढ़ रहे बेरोजगारी के मुद्दे को भी उठायाI

गौरतलब है कि किसान आंदोलन में युवाओं की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण रही है। चाहे वो लंगर सेवा हो या आंदोलन में लाइब्रेरी और कपड़े धोने की व्यवस्था करना हो, किसान आंदोलन में युवाओं ने पहले दिन से ही पूरे तन और मन के साथ काम किया है। युवा इस आंदोलन में हर जगह सबसे आगे ही नजर आया है।

टिकरी बॉर्डर पर मंच के सामने वालंटरिंग कर रहे ऐसे ही एक युवा हसनप्रीत सिंह कहते हैं कि यदि बुजुर्गों ने इस आंदोलन को होश दिया, तो युवाओं ने जोश बढ़ाने का काम किया है। 26 साल के हसनप्रीत पिछले 2 महीने से टिकरी बॉर्डर पर वालंटियर के रूप में काम कर रहें है I सिंह बताते हैं कि उनकी शिक्षा केवल 12वीं तक हुई है और उसके बाद वे अपने भठिंडा के गांव रामपुर फूल में अपने माता-पिता के साथ खेती के काम में जुट गए।

"मैं यहाँ सुबह 6 बजे आ जाता हूं। मेरी मुख्य जिम्मेदारी ये देखना है कि यहाँ कोई गलत व्यक्ति नहीं आए या फिर मंच पर ज्यादा भीड़ न लगे," हसनप्रीत अपना काम हमें समझाते हैं। इसके अलावा हसनप्रीत व्यक्तिगत तौर पर आंदोलन की अपडेट अपने फेसबुक के माध्यम से भी देते रहते हैं।

"मैं रोजाना एक वीडियो बनाता हूं और अपने फेसबुक पर डालता हूं। 26 जनवरी के बाद टीवी मीडिया बता रहा था कि आंदोलन में अब कम लोग आ रहे हैं। मैं हर दिन की शुरुआत से लेकर अंत तक की वीडियो बनाकर बताता हूं कि आंदोलन में अभी भी भीड़ ज्यों की त्यों है," हसनप्रीत अपना फेसबुक वीडियो दिखाते हुए बताते हैं।

हसनप्रीत सिंह (फ़ोटो- अमित पांडेय)

आंदोलन में युवाओं ने कई स्थानों पर मेडिकल सुविधा के लिए भी कैंप लगाए हैं ताकि आंदोलन में मौजूद लोगों को किसी भी तरह की मुश्किल न झेलने पड़े। 28 वर्षीय जैल सिंह ने अपने दोस्तों के साथ टिकरी बॉर्डर पर ठीक इस प्रकार का कैम्प लगाया है, जहां महिलाओं के लिए सेनेटरी नैपकिन से लेकर खांसी जुकाम की दवा की सुविधा उपलब्ध है।

जैल कहते हैं कि उन्होंने चंडीगढ़ से नर्सिंग की पढाई पूरी की है और खेती से जुड़े होने के कारण वे इस मोर्चे पर आए हैं। "मैं और मेरे दोस्त यह कैंप सुबह 10 बजे खोलते हैं और यह रात के 10 बजे तक खुला रहता है। यदि किसी व्यक्ति को रात में भी कोई दिक्कत आती है तो हम उसे रात में ही दवाई उपलब्ध कराते हैं," जैल सिंह कहते हैं।

वह कहते हैं कि इस आंदोलन से उन्होंने कई नई चीजें सीखी हैं। उनके अनुसार इस आंदोलन से उन्हें हिम्मत, जज्बा और शांतिपूर्वक आंदोलन करने का पाठ मिला है, जिसे वे पूरी जिंदगी नहीं भूल पाएंगे।

सिंघु बॉर्डर पर किसानों के समर्थन में पंजाब यूनिवर्सिटी की छात्राएं। फोटो- यश सचदेव

पुरुष युवाओं के साथ महिला युवा भी इस आंदोलन में अग्रिम श्रेणी में रही हैं। फरीदकोट की 22 वर्षीय सुखप्रीत कौर बताती हैं कि 26 जनवरी के बाद मोर्चा थोड़ा शांत हो गया था। उन्होंने मोर्चे में जोश जगाने के लिए अपने मित्रों के साथ नारेबाजी की और ट्रॉली में बैठे बुजुर्गों के हौसले को बढ़ाया। वह मानती हैं कि उनके इस प्रयास से लोगों के अंदर का विश्वास फिर से बढ़ा है।

सुखप्रीत कहती हैं कि युवा इस आंदोलन की रीढ़ हैं, युवा हर जरूरी काम में हाथ बढ़ाता है और अपने नेताओं के आदेशों का पालन भी करता है। सुखप्रीत अपनी इकोनॉमिक्स की पढ़ाई पंजाब यूनिवर्सिटी से कर रहीं है। पढ़ाई के सवाल पर सुखप्रीत कहती हैं, "मैंने अपनी एक सत्र की पढाई मोर्चे पर रहकर पूरी की है। मैंने ठान लिया है कि पढाई और लड़ाई दोनों एक साथ जारी रहेगी।"

इस आंदोलन में युवाओं की बात पत्रकार मनदीप पुनिया और मजदूर कार्यकर्ता नोदीप कौर के बिना अधूरी है। इन दोनों लोगों को आंदोलन के दौरान जेल में जाना पड़ा। इसके अलावा आंदोलन की पत्रिका ट्रॉली टाइम्स भी इस आंदोलन में युवाओं की भूमिका की महत्व को दिखाता हुआ एक अच्छा उदाहरण है।

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