सर्दी का सबसे कठिन दौर? अगले 4-5 दिनों तक घने कोहरे और शीतलहर का अलर्ट
Gaon Connection | Jan 05, 2026, 18:34 IST
उत्तर भारत में सर्दी का असर और तेज़ होने जा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार अगले 4-5 दिनों तक उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के कई हिस्सों में सुबह के समय घना से बहुत घना कोहरा छाया रहने की बहुत अधिक संभावना है।
उत्तर भारत में सर्दी का असर और तेज़ होने जा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार अगले 4–5 दिनों तक उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के कई हिस्सों में सुबह के समय घना से बहुत घना कोहरा छाया रहने की बहुत अधिक संभावना है। इस दौरान शीत दिवस और शीतलहर की स्थिति अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तारीख़ों पर बन सकती है, जिससे जनजीवन, यातायात और खेती पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
बीते 24 घंटों में कई राज्यों में दृश्यता खतरनाक स्तर तक गिर गई। पूर्वी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा और उत्तराखंड के हिस्सों में बहुत घना कोहरा दर्ज किया गया, जबकि हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बिहार और असम के कई इलाकों में घना कोहरा छाया रहा। गोरखपुर, आज़मगढ़, ग्वालियर, जबलपुर और श्रीगंगानगर जैसे स्थानों पर कुछ समय के लिए दृश्यता शून्य से 100 मीटर के बीच रही, जिससे सड़क, रेल और हवाई यातायात प्रभावित हुआ। मौसम विभाग ने आगाह किया है कि सुबह-शाम यात्रा करते समय अतिरिक्त सावधानी ज़रूरी है।
IMD के अनुसार 5 से 7 जनवरी के बीच पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में शीत दिवस की स्थिति बन सकती है। वहीं 6 से 10 जनवरी के दौरान पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पूर्वी-पश्चिमी राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड में शीतलहर चलने की बहुत अधिक संभावना जताई गई है। लगातार ठंड के कारण दिन का तापमान सामान्य से काफी नीचे रह सकता है।
तापमान के मोर्चे पर भी राहत के आसार नहीं हैं। उत्तर-पश्चिम भारत में अगले चार दिनों में न्यूनतम तापमान 2-3 डिग्री सेल्सियस और गिर सकता है, जबकि मध्य और पूर्वी भारत में भी अगले दो दिनों में इतनी ही गिरावट की संभावना है। मैदानी इलाकों में सबसे कम न्यूनतम तापमान 2.4°C (इटावा, उत्तर प्रदेश) दर्ज किया गया। कई क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे बना हुआ है, जिससे ठंड का असर और तीखा महसूस हो रहा है।
ऊपरी वायुमंडल में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभों के प्रभाव से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और आसपास के हिमालयी क्षेत्रों में 5-6 जनवरी को हल्की से मध्यम बारिश/बर्फबारी की संभावना है। 6 जनवरी को हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ इलाकों में भी बर्फबारी के आसार हैं। इन परिस्थितियों का असर मैदानी इलाकों में ठंडी हवाओं और कोहरे की तीव्रता बढ़ाने के रूप में दिख सकता है।
घने कोहरे और शीतलहर का स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ सकता है। लंबे समय तक ठंड और प्रदूषित कोहरे के संपर्क में रहने से सांस संबंधी समस्याएँ बढ़ सकती हैं, खासकर दमा और ब्रोंकाइटिस से पीड़ित लोगों में। बहुत घने कोहरे वाले इलाकों में बिजली लाइनों पर राइमिंग/ट्रिपिंग का जोखिम भी रहता है। मौसम विभाग ने ठंड में कंपकंपी, सुन्नता या सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करने की सलाह दी है।
मौसम विभाग का कहना है कि शीतलहर और कम तापमान से रबी फसलों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। ऐसे में खेतों में शाम के समय हल्की और बार-बार सिंचाई, मल्चिंग और सब्ज़ियों की नर्सरी/छोटे पौधों को ढकने जैसे उपाय ज़रूरी हैं। पशुपालकों को पशुओं को रात में शेड के अंदर रखने और पोल्ट्री में पर्याप्त गर्मी-रोशनी की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है।
कुल मिलाकर, IMD का यह अलर्ट संकेत देता है कि देश के बड़े हिस्से में सर्दी का यह दौर चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। घना कोहरा, गिरता तापमान और शीतलहर मिलकर जनजीवन को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में प्रशासन, नागरिकों और किसानों—सभी के लिए सतर्कता और मौसम अपडेट पर नज़र बनाए रखना बेहद ज़रूरी है।
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बीते 24 घंटों में कई राज्यों में दृश्यता खतरनाक स्तर तक गिर गई। पूर्वी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा और उत्तराखंड के हिस्सों में बहुत घना कोहरा दर्ज किया गया, जबकि हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बिहार और असम के कई इलाकों में घना कोहरा छाया रहा। गोरखपुर, आज़मगढ़, ग्वालियर, जबलपुर और श्रीगंगानगर जैसे स्थानों पर कुछ समय के लिए दृश्यता शून्य से 100 मीटर के बीच रही, जिससे सड़क, रेल और हवाई यातायात प्रभावित हुआ। मौसम विभाग ने आगाह किया है कि सुबह-शाम यात्रा करते समय अतिरिक्त सावधानी ज़रूरी है।
शीत दिवस और शीतलहर का फैलाव
इस दौरान राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, पंजाब, हरियाणा और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में शीत दिवस और शीतलहर की स्थिति बनने की संभावना है।
तापमान में और गिरावट के संकेत
पहाड़ों में बर्फबारी, मैदानी इलाकों पर असर
स्वास्थ्य, बिजली और रोज़मर्रा की चुनौतियाँ
किसानों और पशुपालकों के लिए सावधानी
सतर्कता ही सबसे बेहतर बचाव
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