जून में आ सकता है तेज़ El Nino! ऑस्ट्रेलिया मौसम विभाग ने चेताया, जानिए भारत के लिए होगा कितना बड़ा संकट?
Preeti Nahar | May 27, 2026, 15:01 IST
ऑस्ट्रेलिया की मौसम एजेंसी ने बताया है कि El Nino जून में भारत की धरती पर दस्तक दे सकता है। इससे किसानों की चिंता में इजाफा हुआ है, क्योंकि यह मानसून और खरीफ फसलों के लिए खतरा बन सकता है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने इस स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एक समीक्षा बैठक बुलाई है।
Super El Nino
प्रशांत महासागर की जलवायु पर नजर रखने वाली दुनिया की सबसे भरोसेमंद एजेंसियों में शामिल ऑस्ट्रेलिया की मौसम एजेंसी Bureau of Meteorology (BoM) ने पहली बार साफ तौर पर अनुमान जताया है कि तेज़ El Nino कब दस्तक दे सकता है। एजेंसी के मुताबिक इसकी शुरुआत अब ज्यादा दूर नहीं है और आने वाले हफ्तों में इसके असर दिखाई देने लग सकते हैं।
इस अनुमान के सामने आने के ठीक एक दिन बाद भारत के केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान कृषि से जुड़े मुद्दों और El Nino के संभावित प्रभाव को लेकर समीक्षा बैठक करने वाले हैं। माना जा रहा है कि बैठक में मानसून, खरीफ फसलों और किसानों पर पड़ने वाले असर को लेकर विस्तार से चर्चा होगी।
भारत में इस समय लोग भीषण गर्मी और मानसून की देरी से परेशान हैं। इसी बीच ऑस्ट्रेलिया की मौसम एजेंसी Bureau of Meteorology (BoM) ने एक बड़ा अलर्ट जारी किया है। एजेंसी के मुताबिक 2026 में El Nino दोबारा लौट सकता है और इसकी शुरुआत जून से ही हो सकती है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर El Nino मजबूत हुआ, तो इसका असर भारत के मानसून, खेती, तापमान और पानी की उपलब्धता पर पड़ सकता है। यही वजह है कि भारत सरकार भी अलर्ट मोड में आ गई है।
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El Nino प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) से जुड़ी एक प्राकृतिक जलवायु घटना है। जब समुद्र के मध्य और पूर्वी हिस्से का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म होने लगता है, तो पूरी दुनिया के मौसम का संतुलन बदल जाता है। इसका असर एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका तक महसूस होता है। आसान भाषा में समझें तो El Nino बारिश के सिस्टम को कमजोर कर देता है। भारत में इसका सबसे बड़ा असर मानसून पर पड़ता है। कई बार मानसून कमजोर हो जाता है, बारिश कम होती है और गर्मी ज्यादा बढ़ जाती है।
ऑस्ट्रेलिया की मौसम एजेंसी BoM ने बताया है कि प्रशांत महासागर में तेजी से गर्मी बढ़ रही है। मई 2026 तक समुद्र के तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हुई है और जून से El Nino की स्थिति विकसित हो सकती है।
BoM के मुताबिक Niño 3.4 इंडेक्स तेजी से ऊपर जा रहा है, जो El Nino बनने का बड़ा संकेत माना जाता है। वहीं अमेरिकी एजेंसी NOAA ने भी मई से जुलाई 2026 के बीच El Nino बनने की संभावना 82% बताई है।
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भारत की करीब 70% सालाना बारिश जून से सितंबर के बीच होने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून से आती है। देश के लगभग 60% किसान सीधे मानसून पर निर्भर हैं।
ऐसे में अगर El Nino की वजह से मानसून कमजोर पड़ता है, तो सबसे ज्यादा असर खेती पर पड़ता है। धान, मक्का, सोयाबीन, दालें और कपास जैसी खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। बारिश कम होने से सिंचाई का खर्च बढ़ जाता है और कई इलाकों में सूखे जैसी स्थिति भी बन सकती है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि El Nino के दौरान तापमान सामान्य से ज्यादा रहता है। भारत में पहले से ही कई राज्यों में तापमान 45-47 डिग्री के पार पहुंच चुका है। अगर El Nino मजबूत होता है, तो जून और जुलाई में भी गर्मी और उमस बनी रह सकती है। विशेषज्ञ यह भी मान रहे हैं कि मानसून की शुरुआत देर से हो सकती है और बारिश का वितरण असमान रह सकता है। यानी कुछ इलाकों में भारी बारिश और कुछ जगहों पर सूखे जैसे हालात बन सकते हैं।
किसानों को डर है कि अगर मानसून कमजोर रहा तो बुवाई का पूरा चक्र बिगड़ सकता है। कई किसान पहले ही खेत तैयार कर चुके हैं। लेकिन बारिश में देरी से बीज खराब होने और दोबारा बुवाई की नौबत आ सकती है। इसके अलावा डीजल पंप से सिंचाई करनी पड़े तो लागत बढ़ जाएगी। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को कम अवधि वाली फसल किस्में अपनाने और मौसम अपडेट पर लगातार नजर रखने की सलाह दे रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने El Nino और मानसून की स्थिति को लेकर समीक्षा बैठक बुलाने का फैसला किया है। सरकार इस बात पर नजर रख रही है कि अगर बारिश कमजोर रहती है तो किसानों को कैसे राहत दी जाए।
ऐसा जरूरी नहीं है। कई बार El Nino के बावजूद भारत में सामान्य बारिश हुई है। लेकिन इतिहास बताता है कि अधिकतर El Nino वर्षों में मानसून कमजोर रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी पूरी तरह डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि हिंद महासागर की स्थिति और स्थानीय मौसम प्रणाली भी मानसून को प्रभावित करती हैं। हालांकि आने वाले 4-6 हफ्ते बेहद अहम माने जा रहे हैं।
अगर जून के आखिर तक El Nino मजबूत होता है, तो जुलाई और अगस्त की बारिश पर इसका असर दिख सकता है। इससे खेती, जलाशयों, बिजली उत्पादन और खाद्य कीमतों तक असर पड़ सकता है। फिलहाल IMD और अंतरराष्ट्रीय मौसम एजेंसियां लगातार प्रशांत महासागर के तापमान और मानसून की चाल पर नजर बनाए हुए हैं। किसानों और आम लोगों के लिए अगले कुछ हफ्ते बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।
इस अनुमान के सामने आने के ठीक एक दिन बाद भारत के केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान कृषि से जुड़े मुद्दों और El Nino के संभावित प्रभाव को लेकर समीक्षा बैठक करने वाले हैं। माना जा रहा है कि बैठक में मानसून, खरीफ फसलों और किसानों पर पड़ने वाले असर को लेकर विस्तार से चर्चा होगी।
ऑस्ट्रेलिया की मौसम एजेंसी ने जारी किया अलर्ट
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आखिर क्या होता है El Nino?
ऑस्ट्रेलिया की एजेंसी ने क्यों जारी किया अलर्ट?
BoM के मुताबिक Niño 3.4 इंडेक्स तेजी से ऊपर जा रहा है, जो El Nino बनने का बड़ा संकेत माना जाता है। वहीं अमेरिकी एजेंसी NOAA ने भी मई से जुलाई 2026 के बीच El Nino बनने की संभावना 82% बताई है।
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भारत के लिए क्यों खतरनाक माना जाता है El Nino?
ऐसे में अगर El Nino की वजह से मानसून कमजोर पड़ता है, तो सबसे ज्यादा असर खेती पर पड़ता है। धान, मक्का, सोयाबीन, दालें और कपास जैसी खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। बारिश कम होने से सिंचाई का खर्च बढ़ जाता है और कई इलाकों में सूखे जैसी स्थिति भी बन सकती है।