6,000 से ₹10,000 में होती है निजी लैब में इस बीमारी से जुड़ी जाँच, अब AIIMS में मिलेगी मुफ्त सुविधा
Gaon Connection | May 12, 2026, 15:09 IST
एम्स ने मिर्गी के मरीजों के लिए एक नई ब्लड टेस्ट सेवा शुरू की है। यह जांच मुफ्त है और दवाओं के स्तर की सटीक जानकारी देगी। इससे मरीजों के अनुसार दवा की सही खुराक तय होगी और साइड इफेक्ट से बचाव होगा। यह सुविधा दिल्ली एम्स और एन.सी.आई.-एम्स झज्जर में उपलब्ध है।
अब मुफ्त ब्लड टेस्ट से मिर्गी का सटीक इलाज
देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थान All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) ने मिर्गी (Epilepsy) के मरीजों के लिए एक उन्नत और बेहद उपयोगी ब्लड टेस्ट सेवा शुरू की है। यह नई सुविधा डॉक्टरों को मरीज के शरीर में एंटी-एपिलेप्सी दवाओं के स्तर की सटीक जानकारी देगी, जिससे इलाज को मरीज की जरूरत के अनुसार बेहतर बनाया जा सकेगा। खास बात यह है कि फिलहाल यह जाँच मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही है।
AIIMS द्वारा शुरू की गई इस तकनीक को Therapeutic Drug Monitoring (TDM) कहा जाता है। इसके जरिए मरीज के खून में दवा की मात्रा मापी जाती है ताकि यह पता चल सके कि दवा शरीर में सही स्तर तक पहुंच रही है या नहीं। शुरुआत में यह जांच दो प्रमुख एंटी-एपिलेप्सी दवाओं Levetiracetam और Lamotrigine के लिए की जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार हर मरीज का शरीर दवाओं पर अलग प्रतिक्रिया देता है। ऐसे में एक ही डोज किसी मरीज के लिए प्रभावी हो सकती है, जबकि दूसरे मरीज में वही मात्रा साइड इफेक्ट या विषाक्तता पैदा कर सकती है।
1. मरीज के अनुसार तय होगी दवा की सही डोज-यह टेस्ट डॉक्टरों को यह समझने में मदद करेगा कि मरीज के शरीर में दवा कितनी प्रभावी है। इसके आधार पर दवा की मात्रा घटाई या बढ़ाई जा सकेगी।
2. दवाओं के साइड इफेक्ट से बचाव-अगर दवा का स्तर शरीर में बहुत ज्यादा हो जाए तो मरीज को चक्कर, कमजोरी, उलझन या अन्य गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। TDM टेस्ट ऐसे जोखिमों को समय रहते पहचानने में मदद करेगा।
3. इलाज असफल होने की वजह का पता चलेगा-कई बार मरीज नियमित दवा लेने के बावजूद भी दौरे (Seizures) नियंत्रित नहीं कर पाते। इस जांच से यह पता लगाया जा सकेगा कि दवा शरीर में पर्याप्त मात्रा में पहुंच रही है या नहीं।
निजी प्रयोगशालाओं में इसी तरह की जांच की कीमत प्रति दवा लगभग ₹6,000 से ₹10,000 तक हो सकती है। ऐसे में AIIMS की यह मुफ्त सुविधा हजारों मरीजों को बड़ी राहत दे सकती है। यह सुविधा AIIMS दिल्ली के Neurosciences Centre और NCI-AIIMS झज्जर कैंपस में उपलब्ध होगी। OPD और भर्ती दोनों प्रकार के मरीज इसका लाभ उठा सकेंगे। डॉक्टरों ने बताया कि जाँच के लिए केवल थोड़े से खून के सैंपल की आवश्यकता होगी और रिपोर्ट e-Hospital तथा ORS पोर्टल पर ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी।
AIIMS के न्यूरोबायोकैमिस्ट्री लैब के डॉक्टर्स का कहना है कि यह सुविधा भारत में “Precision-based Epilepsy Care” को मजबूत करेगी। इससे लंबे समय तक दवा लेने वाले मरीजों की निगरानी अधिक वैज्ञानिक तरीके से हो सकेगी। डॉक्टर्स के मुताबिक मिर्गी के कई मरीजों को वर्षों तक नियमित दवा लेनी पड़ती है। ऐसे में सस्ती और सटीक मॉनिटरिंग सुविधा इलाज की गुणवत्ता बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
भारत में लाखों लोग मिर्गी की समस्या से जूझ रहे हैं। सही समय पर दवा की सही मात्रा न मिलने से मरीजों में बार-बार दौरे पड़ सकते हैं या दवाओं के गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। AIIMS की यह पहल न केवल इलाज को अधिक सुरक्षित बनाएगी बल्कि गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों पर आर्थिक बोझ भी कम करेगी।
क्या है नया ब्लड टेस्ट?
कैसे करेगा मरीजों की मदद?
2. दवाओं के साइड इफेक्ट से बचाव-अगर दवा का स्तर शरीर में बहुत ज्यादा हो जाए तो मरीज को चक्कर, कमजोरी, उलझन या अन्य गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। TDM टेस्ट ऐसे जोखिमों को समय रहते पहचानने में मदद करेगा।
3. इलाज असफल होने की वजह का पता चलेगा-कई बार मरीज नियमित दवा लेने के बावजूद भी दौरे (Seizures) नियंत्रित नहीं कर पाते। इस जांच से यह पता लगाया जा सकेगा कि दवा शरीर में पर्याप्त मात्रा में पहुंच रही है या नहीं।