कांग्रेस ने प्रवासी मजदूरों के लिए बस चलाने की मांगी इजाजत तो योगी सरकार ने कहा- 'ओछी राजनीति', फिर माना प्रस्ताव
हाईवे पर लगातार पैदल चलकर घर पहुंचने की कोशिश में लगे मजदूरों के लिए कांग्रेस ने 1000 से अधिक बसों के इंतजाम का दावा किया। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखके यह भी बताया कि औरैया के दर्दनाक सड़क दुर्घटना के बाद कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के अंदरूनी हिस्सों में भी एक हजार बसों को चलाने के लिए यूपी सरकार से इजाजत चाहती है। उन्होंने लिखा, "देश के विभिन्न हिस्सों से लाखों की संख्या में प्रवासी मजदूर पैदल ही यात्रा कर अपने घर वापस जा रहे हैं और उनके लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। ऐसे समय में राष्ट्र निर्माण करने वालों को उनके हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता है। इसलिए हम गाजियाबाद और नोएडा सीमाओं से 500-500 बसों का संचालन करना चाहते हैं।"
प्रियंका गांधी के इस चिट्ठी का योगी सरकार ने कड़े लहजे में जवाब दिया। मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक ट्वीट करते हुए कहा कि इस वैश्विक महामारी के समय में कांग्रेस पार्टी द्वारा की जा रही नकारात्मक एवं ओछी राजनीति की जा रही है, जिसकी निन्दा होनी चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि सरकार प्रवासी श्रमिकों की सकुशल वापसी के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। इसलिए उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की 12 हजार बसें राज्य के अलग-अलग हिस्सों में लगाई गई हैं, जो मजदूरों को बैठाकर उनके गंतव्य तक छोड़ रहे हैं। इसके अलावा अब प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी को 200 अतिरिक्त प्राइवेट बसों के प्रबंधन का आदेश दिया गया है ताकि उनके जिले में पैदल चल रहे यात्रियों को बस की सुविधा मुहैया कराई जा सके।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस संकट के समय में अगर कोई संस्था या पार्टी सहयोग करना चाहती है तो वह प्रदेश सरकार को उसकी सूची दें, उन्हें लॉकडाउन के नियमों के अनुसार अनुमति दी जाएगी और उनके इस पहल का स्वागत भी किया जाएगा। बाद में प्रदेश सरकार ने प्रियंका गांधी के इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और कांग्रेस से सभी बसों को लखनऊ पहुंचाने की अपील की।
इस पर कांग्रेस ने जवाब देते हुए कहा है कि प्रदेश सरकार द्वारा गाजियाबाद-नोएडा बॉर्डर पर खड़े बसों को खाली लखनऊ बुलाया जाना ना सिर्फ पैसे और समय की बर्बादी है, बल्कि अमानवीय भी है क्योंकि बॉर्डर पर हजारों की संख्या में मजदूर खड़े हैं और बसों को खाली लखनऊ बुलाया जा रहा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार मजदूरों को सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से वापस नहीं लाना चाहती और महामारी के समय भी राजनीति कर रही है।
क्या है जमीनी सच्चाई?
इन सबके बीच जमीनी सच्चाई यह है कि प्रदेश के अलग-अलग हाईवे पर मजदूरों का पैदल चलकर घर पहुंचने का सिलसिला जारी है, हालांकि यह पहले की तुलना में कुछ कम जरूर हुआ है। गांव कनेक्शन संवाददाता को बुंदेलखंड के छतरपुर हाईवे पर धर्मेंद्र और उनका परिवार मिला, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। उन्होंने बताया कि वह दिल्ली के नरेला से हमीरपुर (बुंदेलखंड) के लिए पैदल चले थे। रास्ते में उन्हें कुछ दूरी के लिए सरकारी बस तो मिला था लेकिन वह भी आधे रास्ते छोड़कर चला गया।
इसी तरह लखनऊ से गोरखपुर होते हुए बिहार जाने वाले हाईवे एनएच-27 पर भी पैदल चलने वाले प्रवासी मजदूरों का सिलसिला जारी है। इन मजदूरों में से एक अररिया के अशरफ ने बताया कि उन्हें कहीं-कही ट्रक तो मिला, लेकिन अभी आगे की यात्रा पैदल ही करनी है। अशरफ और उनके नौ साथी मुंबई से चले हैं और अभी गोरखपुर तक पहुंचे हैं।
एनएच-27 पर ऐसे प्रवासी मजदूरों के लिए भोजन-पानी का वितरण कर रहे लल्लू मिश्रा ने गांव कनेक्शन को बताया कि पिछले दो दिनों की तुलना में रविवार को पैदल आने वालों की संख्या घटी है। उन्होंने बताया कि अब अधिकतर लोग बसों में सवार होकर आ रहे हैं, जिनको रूकवा कर खाना-पानी दिया जा रहा है। राज्य सरकार का दावा है कि बसों पर मजदूरों को बिठाकर उनकी स्क्रीनिंग की जा रही है और उन्हें भोजन और पानी का बोतल दिया जा रहा है। हालांकि इनमें से अधिकतर संख्या उन मजदूरों की है, जो श्रमिक ट्रेन से राज्य के कुछ चुनिंदा स्टेशनों पर उतर रहे हैं और फिर अपने गृह जिलों की तरफ जा रहे हैं। इसके अलावा लॉकडाउन में ढील मिलने से अपने निजी वाहनों जैसे- साईकिल, मोटरसाईकिल, टेम्पो, रिक्शा, ठेलिया से आने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ी है।
अशरफ और उनके साथी
लल्लू मिश्रा ने यह भी बताया कि अभी भी प्रवासी ट्रकों की छत पर बैठकर आ रहे हैं, जो कि काफी खतरनाक है। उन्होंने कहा, "ट्रक पहले से ही ओवरलोड चलते हैं और उस पर भी आदमी सवार हो जाएं, तो यह खतरनाक है ही।" गौरतलब है कि हाईवे पर पैदल या ट्रक से आ रहे ये मजदूर लगातार हादसे का शिकार हो रहे हैं। ताजा हादासा उत्तर प्रदेश के औरैया का है, जिसमें 24 मजदूरों की जान चली गई और 35 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए लगाये गये देशव्यापी लॉकडाउन की वजह से देश में प्रतिदिन 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है। 51 दिनों में (14 मई तक) अब तक 516 लोगों की जान जा चुकी है। इसमें पैदल जा रहे मजदूरों की संख्या सबसे ज्यादा है। पिछले तीन दिनों में (14 से 16 मई के बीच) भी देश के अलग-अलग हिस्सों में हुई सड़क दुर्घटनाओं में 50 से ज्यादा मजदूरों की जान जा चुकी है।
इन आंकड़ों को तकनीकी जानकारों की एक निजी वेबसाइट www.thejeshgn.com ने जुटाया है। इस वेबसाइट के अनुसार लॉकडाउन की वजह से देश में अब तक कुल 516 मौतें ऐसी हुई हैं जिन्हें कोरोना नहीं था। ये आंकड़े देशभर की मीडिया रिपोर्टस को लेकर तैयार किये गये हैं। देशभर में कोरोना की वजह से अब तक 3000 से अधिक मौतें हो चुकी हैं।
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