Rain Forecast 2026: देश में सामान्य से कम बारिश की संभावना, एल नीनो का दिखेगा असर, इन फसलों को होगा नुकसान
Gaon Connection | Apr 14, 2026, 11:37 IST
भारत मौसम विभाग (India Meteorological Department) के ताज़ा पूर्वानुमान के अनुसार, साल 2026 में दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून से सितंबर) के दौरान पूरे देश में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। इसका मतलब है कि इस बार मानसून थोड़ा कमजोर रह सकता है, जो कृषि और जल संसाधनों पर असर डाल सकता है।
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भारत मौसम विभाग (India Meteorological Department) के अनुसार 2026 में दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है और पूरे देश में बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का 92% रहने का अनुमान है। अधिकांश क्षेत्रों में कम बारिश की संभावना है, जबकि कुछ हिस्सों जैसे पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम और दक्षिण भारत में सामान्य या अधिक वर्षा हो सकती है। मानसून पर El Niño-Southern Oscillation के तहत एल नीनो का असर पड़ने की आशंका है, जो बारिश को घटा सकता है। हालांकि, मानसून के अंत तक Indian Ocean Dipole के पॉजिटिव होने से कुछ राहत मिल सकती है। कुल मिलाकर, 2026 का मानसून खेती और जल संसाधनों के लिए चुनौतीपूर्ण संकेत दे रहा है।
मौसम विभाग के मुताबिक, 2026 में मानसूनी बारिश देशभर में लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का लगभग 92% रहने का अनुमान है। इसमें ±5% तक की त्रुटि संभव है। बता दें कि 1971 से 2020 के बीच मानसून की औसत बारिश (LPA) 87 सेंटीमीटर मानी जाती है। यानी इस साल बारिश औसत से कम रह सकती है, जो कई राज्यों के लिए चिंता का कारण बन सकता है।
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पूर्वानुमान के अनुसार, देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। हालांकि, पूर्वोत्तर भारत, उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिण प्रायद्वीपीय क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में बारिश सामान्य या उससे अधिक हो सकती है। इसका मतलब है कि मानसून का वितरण असमान रहेगा, जिससे कुछ क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है तो कहीं ज्यादा बारिश भी हो सकती है।
इस साल मानसून पर El Niño-Southern Oscillation का प्रभाव देखने को मिल सकता है। अप्रैल से जून के बीच ENSO-न्यूट्रल स्थिति रहने की संभावना है, लेकिन इसके बाद मानसून सीजन के दौरान एल नीनो बनने की प्रबल संभावना है। आमतौर पर एल नीनो के कारण भारत में मानसून कमजोर पड़ता है और बारिश कम हो जाती है।
वर्तमान में हिंद महासागर में Indian Ocean Dipole न्यूट्रल स्थिति में है। लेकिन मानसून के अंत तक पॉजिटिव IOD बनने की संभावना जताई गई है, जो मानसून के लिए अनुकूल माना जाता है। यह स्थिति कुछ हद तक एल नीनो के असर को कम कर सकती है और बारिश को संतुलित करने में मदद कर सकती है।
जनवरी से मार्च 2026 के दौरान उत्तरी गोलार्ध और यूरेशिया क्षेत्र में बर्फ की मात्रा सामान्य से थोड़ी कम रही है। यह स्थिति मानसून के लिए अनुकूल मानी जाती है, क्योंकि इससे गर्मी जल्दी बढ़ती है और मानसून की गतिविधियां तेज हो सकती हैं।
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कमजोर मॉनसून चावल, दालों और तिलहनों जैसी बारिश पर निर्भर फसलों के उत्पादन पर असर डाल सकता है, साथ ही खाने-पीने की चीजों की महंगाई बढ़ा सकता है और गाँवों में मांग को कम कर सकता है।
कमजोर मानसून का सीधा असर खेती, पानी की उपलब्धता और बिजली उत्पादन पर पड़ सकता है। ऐसे में किसानों को फसल चयन और बुवाई के समय को लेकर सतर्क रहने की जरूरत होगी। वहीं, सरकार और प्रशासन को भी जल प्रबंधन और सूखा राहत योजनाओं पर पहले से तैयारी करनी होगी। कुल मिलाकर, 2026 का मानसून कमजोर लेकिन पूरी तरह खराब नहीं रहने का संकेत दे रहा है, जहाँ कुछ प्राकृतिक कारक राहत देंगे तो कुछ चुनौती भी पेश करेंगे।
कितनी होगी बारिश? आँकड़ों में समझें
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किन क्षेत्रों में कम और कहाँ सामान्य बारिश?
IMD’s rain forecast brings cheer to NE farmers
एल नीनो का असर दिखेगा
IOD से मिल सकती है कुछ राहत
कहाँ कितनी बारिश?
बर्फबारी का भी है असर
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इन फसलों पर पड़ेगा असर
किसानों और आम लोगों के लिए क्या संकेत?
किसान भाई रखें खास ख्याल