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उत्तर भारत में अगले सात दिन कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का अलर्ट

Gaon Connection | Jan 03, 2026, 16:52 IST
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भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार अगले सात दिनों तक उत्तर भारत के कई हिस्सों में रात और सुबह के समय घना से बहुत घना कोहरा छाया रह सकता है। मौसम विभाग ने लोगों और किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
 मौसम विभाग ने चेताया है कि यह दौर केवल एक-दो दिन का नहीं है और अलग-अलग क्षेत्रों में इसका असर अलग-अलग तारीख़ों तक बना रह सकता है।
उत्तर भारत में सर्दी ने एक बार फिर तीखा रुख अपना लिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार अगले सात दिनों तक उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में रात और सुबह के समय घना से बहुत घना कोहरा छाया रह सकता है। इसके साथ ही कई राज्यों में शीतलहर और शीत दिवस की स्थिति बनने की भी प्रबल संभावना है। मौसम विभाग ने चेताया है कि यह दौर केवल एक-दो दिन का नहीं है और अलग-अलग क्षेत्रों में इसका असर अलग-अलग तारीख़ों तक बना रह सकता है।

बीते 24 घंटों के दौरान उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड के कई हिस्सों में दृश्यता बेहद कम दर्ज की गई। अमृतसर, आगरा, ग्वालियर, उधमपुर और कानपुर जैसे शहरों में कुछ समय के लिए दृश्यता शून्य तक पहुंच गई। घने कोहरे के कारण हाईवे पर वाहन रेंगते नज़र आए, ट्रेनों और उड़ानों में देरी हुई और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में भी सुबह और देर रात यही हालात बने रह सकते हैं।

गिरता तापमान और शीत दिवस की स्थिति

तापमान के मोर्चे पर भी ठंड लगातार बढ़ रही है। उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में न्यूनतम तापमान में अगले कुछ दिनों के दौरान दो से चार डिग्री सेल्सियस तक और गिरावट आने की संभावना है। देश के मैदानी इलाकों में सबसे कम न्यूनतम तापमान पूर्वी राजस्थान के फतेहपुर में 2.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कई क्षेत्रों में दिन का तापमान भी सामान्य से नीचे बना हुआ है, जिसे मौसम विभाग ने शीत दिवस की स्थिति के रूप में चिह्नित किया है।

पहाड़ों में बारिश और बर्फबारी के संकेत

ऊपरी वायुमंडल में सक्रिय मौसम प्रणालियों के चलते पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में भी मौसम बदलने के आसार हैं।IMDके अनुसार पांच और छह जनवरी को जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और आसपास के इलाकों में बारिश और बर्फबारी हो सकती है, जबकि छह जनवरी को हिमाचल प्रदेश में भी कुछ स्थानों पर बर्फ गिरने की संभावना है। इससे पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड और बढ़ने के साथ-साथ यातायात और दैनिक जीवन प्रभावित हो सकता है।

स्वास्थ्य पर बढ़ता जोखिम

लगातार घना कोहरा और कड़ाके की ठंड का असर स्वास्थ्य पर भी साफ दिखाई देने लगा है। लंबे समय तक ठंड और प्रदूषित कोहरे के संपर्क में रहने से सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। दमा और ब्रोंकाइटिस से पीड़ित लोगों, बुज़ुर्गों और बच्चों के लिए यह स्थिति अधिक संवेदनशील मानी जा रही है। मौसम विभाग ने सलाह दी है कि ठंड में कंपकंपी, सांस लेने में परेशानी या सुन्नता जैसे लक्षणों को नज़रअंदाज़ न किया जाए।

खेती और ग्रामीण जीवन पर असर

मौसम विभाग के मुताबिक इन हालात का असर खेती पर भी पड़ सकता है। शीतलहर और कम तापमान के कारण रबी फसलों की बढ़वार प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में किसानों को सिंचाई और फसल सुरक्षा के उपायों पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है। पशुपालन और मुर्गीपालन से जुड़े ग्रामीण इलाकों में भी ठंड से बचाव की अतिरिक्त तैयारियां जरूरी हो गई हैं।

सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

कुल मिलाकर, मौसम विभाग का यह अलर्ट संकेत देता है कि उत्तर भारत में आने वाले दिन चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं। घना कोहरा, गिरता तापमान और शीतलहर मिलकर जनजीवन को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिकों और किसानों को भी पूरी सतर्कता बरतने की आवश्यकता है, ताकि इस सर्द मौसम के दौर से सुरक्षित तरीके से निपटा जा सके।

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