बालदिवस/डायबिटीज डे विशेष:  इन लक्षणों से पहचानिए कि कहीं आपके बच्चे को डायबिटीज तो नहीं 

बालदिवस/डायबिटीज डे विशेष:  इन लक्षणों से पहचानिए कि कहीं आपके बच्चे को डायबिटीज तो नहीं बच्चों में डायबिटीज की समस्या क्यों बढ़ रही।

एक समय था जब डायबिटीज जैसी बीमारी सिर्फ बुढ़ापे में होती थी ऐसी मान्यता थी और ज्यादातर ऐसा होता भी था। लेकिन ऐसा नहीं है डायबिटीज(शुगर) की बीमारी की अब कोई उम्र सीमा नहीं रही। बड़ों के साथ-साथ यह बीमारी बच्चों में भी देखने को मिलती हैं।

अगर आपके बच्‍चे को बहुत जल्दी-जल्दी प्‍यास लगती है, ज्यादा भूख लगती है, या फिर वो बार-बार पेशाब करने जाता है, तो इसे सामान्य ना समझे। डायबिटीज की बीमारी आपके बच्चे के लिए इतनी ज्‍यादा खतरनाक हो सकती है कि इससे उनकी आंखें और किडनियां तक प्रभावित हो सकती हैं। बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज ज्यादा होता है। बालदिवस पर हम बता रहे हैं कि बच्‍चों में डायबिटीज के लक्षणों को किस प्रकार पहचान सकते हैं। इस बारे में हमें बता रही हैं लखनऊ की बालरोग विशेषज्ञ डॉ रुपा शर्मा---

ज्यादा प्‍यास लगना

जब बच्‍चों में शुगर लेवल असामान्य रूप से बढ़ जाता है, तो उन्‍हें बहुत ज्यादा प्यास लगती है। वो पानी पीने के अलावा, जूस और कोलड्रिंक जैसी लिक्विड चीजों का भी ज्यादा सेवन करना चाहते हैं। अगर आपके बच्चे की प्यास अचानक से काफी बढ़ गई है तो आप उसे डॉक्टर को दिखाना न भूलें।

बार-बार पेशाब लगना

डायबिटीज का ये सबसे सामान्य लक्षण है, जो बड़े लोगों में भी पाया जाता है। जब बच्चे की प्यास बढ़ेगी और वो ज्यादा लिक्विड लेगा तो जाहिर है, उसे बार बार पेशाब जाना पड़ेगा। अगर आपके बच्चे में ऐसा लक्षण दिख रहा है तो होशियार हो जाइये, ये लक्षण डायबिटीज की शुरुआत भी हो सकती है।

भूख बढ़ना वजन कम होना

बच्चे को अगर डायबिटीज की समस्या हो जाए तो अक्सर उनकी भूख बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए होता है कि उनमें ऊर्जा की कमी हो जाती है, इस कमी को दूर करने के लिए शरीर को खाना चाहिए होता है। डायबिटीज की बीमारी होने के बाद बच्चा कितना भी ज्यादा खाना खा ले, लेकिन उसका वजन बढ़ने की बजाए कम होने लगेगा। डायबिटीज से ग्रस्त बच्चों का ये सबसे सामान्य लक्षण होता है।

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थका हुआ रहना

डायबिटीज से पीड़ित बच्चे सामान्य बच्चों की तरह सक्रिय नहीं रहते। इन्सुलिन की मात्रा घटने के कारण बच्चों में ऊर्जा की कमी हो जाती है। वो थके थके और बाकी बच्चों की तुलना में सुस्त लगने लगते हैं। अगर आप अपने बच्चे में इन लक्षणों को शुरुआत में ही पहचान लेते हैं, तो आपका बच्चा इस समस्या से जल्दी मुक्त हो सकता है।

प्रमुख कारण : बच्चों में डायबिटीज का कारण बताते हुए लखनऊ के डायबिटीज विशेषज्ञ डॉ अमित मोहन बताते हैं, “जंक फूड, मोटापा, शारीरिक व्यायाम में कमी, बढ़ते तनाव, टेलीविजन और कम्प्यूटर पर लंबे समय तक बैठना भी हो कसता है।”

70 हजार बच्चे पीड़ित

देश भर में टाइप-1 मधुमेह से पीड़ित अंडर-15 बच्चों की संख्या 70 हजार है जबकि टाइप-2 मधुमेह से पीड़ितों की संख्या 40 हजार है। इस संख्या में हर साल पांच प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। 68 प्रतिशत शहरी बच्चे नियमित व्यायाम नहीं करते हैं। बच्चों में मोटापा का यह भी एक आम कारण होता है। डायबिटिज फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अनुसार देश में मधुमेह से करीब 5.1 करोड़ लोग ग्रस्त हैं। 2025 तक यह आंकड़ा 8 करोड़ पहुंचने की उम्मीद है, जिससे देश दुनिया की मधुमेह राजधानी बन सकता है।

बच्चों में मधुमेह।

मधुमेह होने की संभावना किसमें होती है ज्यादा

  • लड़कियों में।
  • अधिक वजन वाले बच्चों में।
  • मधुमेह के इतिहास वाले, परिवार के बच्चों में।
  • इंसुलिन प्रतिरोध वाले व्यक्तियों में।

कैसे बचें इस बीमारी से

स्वस्थ आदतों को बनाए रखें

टाइप 2 मधुमेह से बच्चों को दूर रखना है तो उन्हें पौष्टिक भोजन खिलाएं। उनका आहार पूरी तरह से संतुलित होना चाहिए। रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और सुगर का कम से कम सेवन करना चाहिए। मिठाई, सफेद रोटी, पेस्ट्री, सोडा, और अन्य अत्यधिक संसाधित या परिष्कृत खाद्य पदार्थ बच्चों में मोटापा टाइप 2 मधुमेह को बढ़ाने का काम करते हैं।

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व्यायाम करना

बच्चों में मधुमेह के लक्षण और उपचार मधुमेह को रोकने के लिए नियमित व्यायाम महत्वपूर्ण है। बच्चों में टाइप 2 मधुमेह की बीमारी न हो इसलिए उन्हें व्यायाम करना सीखाना चाहिए। उन्हें इंडोर गेम खेलने के बजाय आउटडोर गेम खेलने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

अपने वजन को संतुलित बनाएं रखें

बच्चों में टाइप 2 मधुमेह की बीमारी न हो इसलिए उनका वजन हमेशा संतुलित रखें। स्वस्थ आहार और व्यायाम की आदतें बच्चों को स्वस्थ वजन बनाए रखने में मदद कर सकती है

मां बाप की जिम्मेदारियां

बच्चे, खासकर जिनकी उम्र बहुत कम हो, उनमें टाइप 2 डायबिटीज पर नियंत्रण पाना बहुत मुश्किल होता है। यहां कुछ ऐसे टिप्स दिए गए है जिनके द्वारा इस स्थिति में आपको काफी मदद मिल सकती है:

  • आप अपने बच्चों से उसके स्वास्थ्य और वजन के बारे में ईमानदारी से बात करें। उनकी सहायता करें। उन्हें प्रोत्साहित करें ताकि वह आपसे खुल कर अपनी चिंताओं के बारे में बात कर सकें।
  • जिन गतिविधियों से आपके बच्चों को ख़ुशी मिलती है उसमें खुद भी आनंद लें। अपने बच्चें के साथ शारीरिक गतिविधियों में शामिल हों।
  • उन्हें दूसरे बच्चो से अलग न रखें। उनके साथ विशेष तरह का व्यवहार ना करें। उसके लिए अलग से खाना तैयार न करें बल्कि आपके पूरे परिवार के लिए भी वह खाना स्वास्थ्य वर्धक है। इसीलिए इस तरह से खाना तैयार करें कि वह आपसे अलग-थलग महसूस न करे। विशेषज्ञ, या अन्य मधुमेह विशेषज्ञों से संपर्क में रहें।

जंकफूड बच्चों का दुश्मन।

डायबिटीज के प्रकार

मधुमेह (डायबिटीस) दो प्रकार की होती है, टाईप 1 डायबिटीज, इसे डायबिटीज इन्सिबिडस भी कहा जाता है। इस तरह की डायबिटीज में शरीर एंटी-डाययुरेटिक हार्मोन (ADH) की अल्पता हो जाती है, अग्न्याशय पूरी तरह से इंसुलिन निर्माण बंद कर देता है। दूसरे प्रकार की डायबिटीस टाईप 2 डायबिटीज कहलाती है जिसे डायबिटीज मेल्लीटस भी कहा जाता है। इस तरह की डायबिटीज में शरीर में अग्न्याशय इंसुलिन का अल्प निर्माण करता है यानि इंसुलिन का निर्माण आवश्यकता से कम होता है। ऐसी स्थिति में अक्सर शरीर भी अल्प मात्रा में बने इंसुलिन को पहचान नहीं पाता और इसका उपयोग नहीं हो पाता, इसे इंसुलिन प्रतिरोधकता भी कहा जा सकता है।

आखिर क्या करता है इंसुलिन

हम जब भोज्य पदार्थों का सेवन करते हैं तो यह भोजन शरीर द्वारा विभिन्न प्रक्रियाओं के बाद कार्बनिक पदार्थों में रूपांतरित कर दिया जाता है और इसी प्रक्रिया में ग्लुकोज यानि शर्करा भी बनती है। हमारे शरीर को कोशिकाएं इस ग्लुकोज का उपयोग कर शरीर को ताकत, वृद्धि, और अन्य क्रिया-कलापों के लिए सक्षम बनाती है। किंतु, इससे पहले कि कोशिकाएं इस ग्लूकोज का उपयोग करे, यह ग्लुकोज रक्त वाहिनियों में बहता हुआ हर एक कोशिकाओं तक पहुंचता है। कोशिकाओं तक ग्लुकोज को पहुंचने के लिए इंसुलिन हार्मोन की आवश्यकता होती है। जैसे ही रक्त में ग्लुकोज पहुंचता है, अग्न्याशय स्वत: ही इंसुलिन हार्मोन की एक निश्चित मात्रा का निर्माण करता है ताकि यह कोशिकाओं में ग्लूकोज को अवशोषित करने में मदद कर पाए। इंसुलिन के नहीं होने पर कोशिकाएं रक्त में उपस्थित शर्करा को अवशोषित नहीं कर पाती है। और यही वजह है कि डायबिटीस से ग्रस्त रोगी कमजोर हो जाता है और अक्सर इन्हें जल्दी थकान लगती है।

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डायबिटीस नियंत्रण के लिए आदिवासी हर्बल नुस्खे

  • मधुमेह की शिकायत होने पर रोगी को प्रतिदिन सुबह खाली पेट इसकी कचनार की कच्ची कलियों का सेवन करना चाहिए।
  • डाँग- गुजरात के आदिवासी कटहल की पत्तियों के रस का सेवन करने की सलाह मधुमेह (डायबिटीज) के रोगियों को देते है।
  • यदि छुई-मुई की 100 ग्राम पत्तियों को 300 मिली पानी में डालकर काढ़ा बनाया जाए तो यह काढ़ा मधुमेह के रोगियों को काफी फ़ायदा होता है।
  • जामुन के बीजों को छाँव में सुखाकर तैयार किया गया चूर्ण प्रतिदिन सेवन करने से मधुमेह में काफी फ़ायदा होता है।
  • डाँग- गुजरात के आदिवासियों के अनुसार नीम के गुलाबी कोमल पत्तों को चबाकर रस चूसने से मधुमेह रोग मे आराम मिलता है।
  • शतावरी की जड़ों के चूर्ण का सेवन बगैर शक्करयुक्त दूध के साथ लगातार किया जाए तो मधुमेह के रोगीयों को काफी फ़ायदा होता है।
  • अदरख को कुचलकर प्रतिदिन रस सेवन से भी मधुमेह में काफी फायदा मिलता है, आधुनिक शोध भी इस बात की पुष्टि करती हैं।

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