इंटरव्यू : ब्लड प्रेशर और डायबिटीज पर रखें नियंत्रण वर्ना लकवे का हो सकते हैं शिकार 

Deepanshu MishraDeepanshu Mishra   29 Oct 2017 12:24 PM GMT

इंटरव्यू : ब्लड प्रेशर और डायबिटीज पर रखें नियंत्रण वर्ना लकवे का हो सकते हैं शिकार लकवा दो प्रकार का होता है एक तो जो मष्तिष्क की रक्त संचार करने वाली नालियां फट जाती हैं रक्त स्राव हो जाते है जिसे ब्रेन हैम्ब्रेज कहते हैं।

लखनऊ। आज विश्व अाघात दिवस (वर्ल्ड स्ट्रोक डे) है। वर्ष 1999 से प्रोफेसर और 2008 से किंग जॉर्ज मेडिकल युनिवर्सिटी स के न्यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ रवीन्द्र कुमार गर्ग बताते हैं, “न्यूरोलॉजी में तीन से चार बड़ी-बड़ी समस्याएं है सिरदर्द, मिर्गी, कमरदर्द और लकवा ये चार बड़ी समस्याएं हैं, अगर हम इन चारों बीमारियों को एक साथ रखें तो लगभग 99 प्रतिशत मरीज इन्हीं बीमारियों के होते हैं। पुरे दिन 300-400 तक मरीज रोजाना न्यूरोलॉजी विभाग में आते हैं।

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डॉ रवीन्द्र कुमार गर्ग बताते हैं, “दो तरह की बीमारियां ज्यादा घातक होती हैं एक तो पक्षाघात यानि की लकवा। लकवा दो प्रकार का होता है एक तो जो मष्तिष्क की रक्त संचार करने वाली नालियां फट जाती हैं रक्त स्राव हो जाते है जिसे ब्रेन हैम्ब्रेज कहते हैं। अगर ये बड़ा हो और रक्त काफी निकल जाता है तो व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। दूसरा पक्षाघात जो है उसमें जो मष्तिष्क को रक्त संचार करने वाली नालियां है वो बंद हो जाती हैं। इससे रक्त न पंहुचने से ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती है, जिस हिस्से में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती है वो हिस्सा मृत हो जाता और वो हिस्सा काम करना बन्द कर देता है। ये पक्षाघात शरीर के या फिर दायीं तरह होता है या फिर बायीं तरफ हो जाता है। इसमें चेहरा हाथ पैर काम करना बन्द कर देता है।”

किंग जॉर्ज मेडिकल युनिवर्सिटी से विभागाध्यक्ष डॉ रवीन्द्र कुमार गर्ग

पक्षाघात का एक मुख्य कारण है, जिससे काफी लोग ज्ञात भी नहीं है वो कारण है उक्त रक्तचाप। मोटापा, अकमर्णशीलता, डाईबिटीज और धुम्रपान ये सब मुख्य कारण माने जाते हैं।

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इससे बचने के डाईबिटीज को कण्ट्रोल में रखना चाहिए और रक्तचाप को भी कण्ट्रोल में रखना चाहिये,जिसके लिए समय-समय पर रक्तचाप को नापते रहना चाहिए, अगर रक्तचाप बड़ा हुआ है तो उसकी दवाएं लें।

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प्रदेश में न्यूरो की बहुत सारी समस्याएं हैं कुछ संक्रमण रोग होते हैं। इनमें जापानी इन्सेफिलाइटिस बहुत कारण है और पूरे प्रदेश में मष्तिष्क की टीबी लोगों को प्रभावित करने वाली है, जिसके बहुत सारे रोगी आते हैं, जिसका अगर समय पर इलाज न किया जाये तो व्यक्ति की मौत हो सकती है। इस बीमारी में तुरंत जांच, तुरंत पहचान और तुरंत इलाज बहुत ज्यादा जरुरी है। इस मौसम समय संक्रमण की बीमारियां ज्यादा होती हैं।

ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण
- शरीर के किसी एक तरफ के हिस्से पर लकवा या पैरेलेसिस हो जाना
- चेहरा टेढ़ा हो जाना
- हाथ या पैर का सुन्न होना
- देखने में दिक्कत होना
- बोलने में परेशानी होना
- चक्कर आना
- उलटियां होना

किसको हो सकता है
ब्रेन स्ट्रोक यूं तो किसी को भी हो सकता है, लेकिन नीचे लिखे लोगों को आशंका ज्यादा होती है
- उम्रदराज
- ब्रेन स्ट्रोक की फैमिली हिस्ट्री
- स्मोकिंग करने वाले
- दिल के मरीज
- शुगर के मरीज
- कॉलेस्ट्रॉल के मरीज
- ब्लड प्रेशर के मरीज

स्ट्रोक हो जाए तो

- अगर आपके आसपास किसी में ऊपर दिए लक्षण दिखें तो घबराएं नहीं।
- मरीज को मुस्कुराने, दोनों हाथ उठाने और कोई वाक्य बोलने को कहें। अगर मुंह में टेढ़ापन नजर आता है, हाथ उठाने या बोलने में दिक्कत होती है तो समझो ब्रेन अटैक हुआ है।
- इसके बाद मरीज को जमीन या बेड पर लिटा दें, ताकि दिमाग को ज्यादा-से-ज्यादा ब्लड सप्लाई हो सके।
- मरीज के आसपास भीड़ न लगाएं, उसे खुली और ठंडी हवा में रहने दें।
- उसका ब्लड प्रेशर चेक करें और फौरन डॉक्टर के पास ले जाएं।
- कई लोग मरीज को एस्प्रिन(जेनरिक नेम) देते हैं। डॉक्टर से बिना पूछे ऐसा न करें क्योंकि अगर ब्रेन हेमरिज होगा तो स्थिति बहुत खराब जाएगी।

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