रसोई बदली, भोजन बदला, बिगड़ी जीवनशैली ने बनाया रोगी

Manisha KulshreshthaManisha Kulshreshtha   20 Sep 2018 7:09 AM GMT

रसोई बदली, भोजन बदला, बिगड़ी जीवनशैली ने बनाया रोगी

एक समय था भारत में शाकाहारी लोगों की संख्या अधिक थी। शराब का चलन हिन्दू‚ सिख और मुस्लिम सभी में निषिद्ध था। भोजन में हमेशा दाल‚ चावल‚ रोटी सब्जी‚ दही या छाछ और सलाद एक आम व्यक्ति को भी सहज सुलभ था। सब्जियां सस्ती थीं और मौसमी फलों के भाव आम जन की पहुंच में थे। और गांवों में तो खेत की पैदावार हो या मक्खन निकाली छाछ हमेशा आस–पास में बांटी जाती थी। नाश्ते में नमक-अजवाईन के परांठे पर मक्खन की डली रख कर खाने वाले मेहनती भारतीय नागरिक या ग्रामीण उच्च रक्तचाप के शिकार न थे। मिठाईयां भी तब बस त्यौहारों पर बनतीं वह भी गृहणियों के नपे तुले हाथों।

गांवों में भी जीवन तेजी से बदल रहा है। ब्रेड, नूडल्स, बिस्किट्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स, बियर सहज उपलब्ध है।

रसोई से गृहणी उकताने लगी तो घरों में ब्रेड आई व मैदा और बेकिंग पाउडर का उपभोग बढ़ा

पहले गांवों में ब्रेड बहुत कम चलन में थी‚ नाश्ते में दो बिस्किट खा कर रह जाने वाले न थे गांव-कस्बों के बच्चे। सुबह शाम बच्चे ताज़ा दूध पीते थे‚ टिफिन में रोटी‚ सब्जी लेकर जाते थे।

हर जगह धीरे–धीरे जीवन–शैली में बदलाव आया‚ महिलाओं ने रसोई के साथ–साथ आर्थिक मोर्चा संभाला‚ संयुक्त की जगह एकांगी परिवारों में बढ़ोत्तरी हुई। लम्बी भोजन विधियों और सुबह-शाम रसोई में बिताने से गृहणी उकताने लगी तो‚ ब्रेड घरों में आई। रिफाइन्ड मैदा और बेकिंग पाउडर का उपभोग बढ़ा‚ केक‚ मैगी‚ आइसक्रीम‚ बिस्किट‚ जैम‚ कस्टर्ड आदि के जरिए कई खाद्य रंगों‚ इमल्सीफायर‚ प्रिजर्वेटिव आदि के रूप में कई रसायन हम उदरस्थ करने लगे। हमारे भोजन में रेशे और पोषक तत्वों की भारी कमी आने लगी। बच्चे–बड़े अन्य आकर्षणों के चलते दूध पीने से कतराने लगे।

सांस्कृतिक परंपरा से छूटे तो धूम्रपान‚ शराब और मांसाहार का चलन भी बढ़ गया। अब यह हाल है कि पिछले दो दशकों में उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों की संख्या‚ करीब चौगुनी हो गई है। यह चौंकाने वाली बात है, इस विषय पर कुछ दिशानिर्दशों की आवश्यकता है।

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अभी कुछ समय पूर्व ही द एसोसिएशन ऑफ फिजीशियन्स ऑफ इण्डिया (एपीआई)‚ कार्डियोलॉजी सोसायटी और द हाइपरटेन्शन सोसायटी ने मिलकर अपने स्तर पर दो वर्ष से अधिक का समय लगा कर भारतीय परिस्थितियों‚ बदलती भारतीय जीवन शैली को ध्यान में रख कर दिशानिर्देशों की एक सूची तैयार की है।

हमें बेकिंग सोडा युक्त बेकरी आइटमों की जगह भोजन में अनाजों‚ फल व सब्जियों का प्रयोग बढ़ाना चाहिए।

रक्त का सामान्य दबाव एक सहज बात है जिसकी वजह से रक्त शरीर की प्रत्येक कोशिका तक पहुँचता है। हृदय एक पम्प की तरह काम करता है‚ जब दिल धड़कता है तो वह धमनियों तक रक्त प्रवाहित करता है‚ धमनियों में इस वजह से पैदा होने वाले सर्वाधिक दबाव को सिस्टोलिक प्रेशर कहते हैं। और जब दो बार दिल धड़कने के बीच के समय में धमनियों में जो दबाव होता है वह डायस्टोलिक प्रेशर कहलाता है। रक्तचाप के मापने का उपर वाली संख्या सिस्टोलिक प्रेशर तथा नीचे वाली संख्या डायस्टोलिक प्रेशर के माप को दर्शाती है। रक्तचाप की आदर्श स्थिति र्है 120/80 इससे उपर खतरे की घंटी है।

अभी तक भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन और इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ हाइपर टेंशन की ओर से जारी दिशानिर्देश ही प्रचलित थे। किन्तु अब इन नए भारतीय दिशानिर्देशों में भारतीय जलवायु‚ खानपान‚ जीवनशैली‚ उपलब्ध दवाओं और संस्कृति को ध्यान में रखा गया है। भारत की विभिन्न जलवायु और संस्कृति की विभिन्नता को भी सामने रखा गया।

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ये दिशानिर्देश चाहे चिकित्सकों के लिए हों पर आम आदमी को भी इनसे वाकिफ होना चाहिए। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात कि उच्च रक्चाप से प्रभावित होने के लिए कोई आयु निश्चित नहीं है। न ये समाज के किसी खास वर्ग के लिए है। यह किसी भी वर्ग‚ आयु और किसी भी स्त्री–पुरुष को प्रभावित कर सकता है। मोटापा और मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों में इसकी आशंका बहुत अधिक होती है। एपीआई के पूर्व अध्यक्ष डॉ. वाई.पी. मुंजाल कहते हैं, ''उच्च रक्तचाप का पता करना तो बहुत आसान है किन्तु फिर भी दुनिया भर में 100 में से केवल 25 रोगियों का ही पता लग पाता है।'' वे यह भी कहते हैं कि, " कमर का माप 40 से अधिक होते ही खतरा बढ़ जाता है। गर्भवती महिलाओं में अध्ययन के बाद यह पता चला कि 100 में से 5 उच्च रक्तचाप से प्रभावित होती हैं और यह ही प्रसव के दौरान और बाद में उनकी मृत्यु की वजह बन सकता है।"

रोज तेज कदमों से सैर करने से वजन भी घटेगा और उच्च रक्तचाप भी।

इस रोग का परहेज और इलाज दोनों हमारी जीवन शैली से जुड़े हुए हैं। मसलन हम कितना शारीरिक श्रम करते हैं और खाते क्या हैं? अगर मोटे होने पर मात्र साढ़े चार किलो वजन घटाने से रक्तचाप में कमी आ सकती है तो इसके लिये हमें तेज कदमों से सैर करने से नहीं कतराना चाहिये। भारतीय दिशानिर्देशों में नमक कम खाने पर ज़ोर दिया गया है। ब्रेड और बेकिंग सोडा युक्त बेकरी आइटमों को कम इस्तेमाल करना चाहिये। भोजन में रेशों से भरपूर अनाजों‚ सब्जियों का प्रयोग बढ़ाना चाहिए।

शाकाहारी लोग मांसाहारी लोगों की अपेक्षा अधिक सुरक्षित हैं। इस तरह से वे सैचुरेटेड फैट कम मात्रा में उपभोग में लाते हैं। मांसाहार में मछली एक अच्छा विकल्प है। इसके अलावा वे सब्जी‚ फलों के जरिये रक्तचाप कम करने में सहायक पोटेशियम की आवश्यक मात्रा ले लेते हैं। सुबह नाश्ते में केले और पपीता खाना फायदेमंद साबित हो सकता है। शराब‚ चाय‚ कॉफी‚ तम्बाकू को अलविदा कहना या कम मात्रा में लेना ही उपयोगी रहेगा।

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दिशानिर्देशों में शराब के दो छोटे पैग से ज्यादा कतई नहीं पीना चाहिये। धूम्रपान तो एकदम छोड़ देना ही फायदेमंद है और इसके फायदे आप स्वयं एक साल में ही देख सकते हैं। तो बस आज ही धूम्रपान छोड़ दें और मुझसे एक साल बाद इस विषय पर बात करें। उच्च रक्तचाप से निजात के लिये योग‚ ध्यान और प्राकृतिक चिकित्सा का भी काफी महत्व साबित हो चुका है।

उच्च रक्तचाप की नियमित जांच एक निश्चित अंतराल में अवश्य कराते रहें। याद रखें स्वस्थ जीवन की कुंजी का रहस्य आपकी स्वस्थ जीवनशैली में ही छिपा है।

(मनीषा कुलश्रेष्ठ हिंदी की लोकप्रिय कथाकार हैं। अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों, सम्मानों, फैलोशिप्स से सम्मानित मनीषा के सात कहानी कहानी संग्रह और चार उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं। मनीषा आज कल संस्कृति विभाग की सीनियर फैलो हैं और ' मेघदूत की राह पर' यात्रावृत्तांत लिख रही हैं। उनकी कहानियां और उपन्यास रूसी, डच, अंग्रेज़ी में अनूदित हो चुके हैं। गांव कनेक्शन में उनका यह कॉलम अपनी जड़ों से दोबारा जुड़ने की उनकी कोशिश है। अपने इस कॉलम में वह गांवों की बातें, उत्सवधर्मिता, पर्यावरण, महिलाओं के अधिकार और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगी।)

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