विश्व कैंसर दिवस: वर्ष 2018 में सबसे अधिक फेफड़े और स्तन कैंसर के मामले सामने आए

भारत में स्तन कैंसर होने की औसत उम्र में गिरावट आ रही है और अधिकांश स्तन कैंसर अब 30-50 की उम्र में हो रहा है, जबकि विकसित देशों में 50-60 औसत उम्र में स्तन कैंसर होने का खतरा सबसे अधिक रहता है

Chandrakant MishraChandrakant Mishra   4 Feb 2019 9:44 AM GMT

विश्व कैंसर दिवस: वर्ष 2018 में सबसे अधिक फेफड़े और स्तन कैंसर के मामले सामने आए

लखनऊ। भारत सरकार की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 का लक्ष्य है कि गैर-संक्रामक रोग कैंसर का दर और असामयिक मृत्यु दर में 2025 तक 25 प्रतिशत गिरावट आये। लेकिन कैंसर दर और मृत्यु दर बढ़ोतरी पर है। हृदय रोग और पक्षाघात के बाद दुनिया का सबसे बड़ा मृत्यु का कारण कैंसर है। वैश्विक स्तर पर 2018 में 96 लाख लोगों की मौत कैंसर से हुई। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2018 में सबसे अधिक होने वाले कैंसर में फेफड़े और स्तन के कैंसर रहे रहे।

किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. सूर्य कान्त का कहना है, " विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार एक-तिहाई कैंसर का बचाव मुमकिन है, यदि तम्बाकू और शराब बंदी हो। पौष्टिक आहार, सही वजन और शारीरिक व्यायाम सही तरीके से किया जाए। 22 प्रतिशत कैंसर मृत्यु का कारण तो तम्बाकू सेवन ही है।"

ये भी पढ़ें: लाइलाज नहीं आंत का कैंसर, समय पर पता लग जाए तो हो सकता है इलाज


किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की वरिष्ठ स्तन कैंसर विशेषज्ञ और एंडोक्राइन सर्जरी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ पूजा रमाकांत ने बताया," यदि जल्दी सही जांच और इलाज मुहैया हो तो स्तन कैंसर से अधिक जान बच सकती हैं। गुणात्मक रूप से जीवन बेहतर होगा और इलाज का व्यय और जटिलता भी कम होगी।"

वर्ल्ड कैंसर डे वैश्विक अभियान की संयोजक यूनियन फॉर इंटरनेशनल कैंसर कंट्रोल की थू-खुक-बिलोन ने वर्ल्ड कैंसर डे वेबिनार में कहा, " कैंसर पर हर साल 1600 अरब (अमरीकी डालर) खर्च होता है। इस खर्च से बचा जा सकता है, अगर कैंसर नियंत्रण सशक्त हो और कैंसर होने का खतरा पैदा करने वाले तम्बाकू, शराब पर अधिक ध्यान दिया जाए।"

ये भी पढ़ें:कैंसर से बचना है तो इसे अपने खाने में करें शामिल

साभार इंटरनेटसाभार: इंटरनेट

विश्व में सबसे घातक कैंसर है फेफड़े का कैंसर

वर्ल्ड कैंसर डे वेबिनार में वियतनाम के नेशनल लंग हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ न्गुयेन विएत न्हुंग ने कहा," फेफड़े का कैंसर सबसे घातक कैंसर है। 71 प्रतिशत फेफड़े के कैंसर सिर्फ तम्बाकू सेवन के कारण होते हैं। यदि फेफड़े के कैंसर के दर और मृत्यु दर में गिरावट लानी है तो तम्बाकू नियंत्रण अत्यंत ज़रूरी है।"

ये भी पढ़ें: स्तन कैंसर: ये बदलाव दिखें तो तुरंत जाएं डॉक्टर के पास या खुद ऐसे करें जांच

महिलाओं में सबसे घातक कैंसर है स्तन कैंसर

इंडियन जर्नल ऑफ़ सर्जरी की एसोसिएट एडिटर और किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्तन कैंसर सर्जन डॉ. पूजा रमाकांत ने कहा, " यह चिंताजनक है कि भारत में स्तन कैंसर होने की औसत उम्र में गिरावट आ रही है और अधिकांश स्तन कैंसर अब 30-50 की उम्र में हो रहा है। जबकि विकसित देशों में 50-60 औसत उम्र में स्तन कैंसर होने का खतरा सबसे अधिक रहता है। भारत में 50-70 प्रतिशत स्तन कैंसर की जांच अत्यधिक विलम्ब से होती है जब रोग बहुत बढ़ चुका होता है और कैंसर के फैलने की सम्भावना भी बढ़ जाती है। यदि स्तन कैंसर से असामयिक मृत्यु को कम करना है तो यह अत्यंत ज़रूरी है कि स्तन कैंसर की जांच प्रारंभिक स्थिति में जल्दी और सही हो, और सही इलाज मिले।"

साभार इंटरनेटसाभार: इंटरनेट

कैंसर का सबसे बड़ा कारण जिससे पूर्ण बचाव मुमकिन है, वह है तम्बाकू

किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की तम्बाकू नशा उन्मूलन क्लिनिक के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. सूर्य कान्त ने कहा, 71 प्रतिशत फेफड़े कैंसर और 22 प्रतिशत कैंसर मृत्यु का कारण है तम्बाकू। यदि तम्बाकू नियंत्रण अधिक प्रभावकारी हो और तम्बाकू सेवन में अधिक गिरावट आएगी तो निश्चित तौर पर न सिर्फ कैंसर, बल्कि तम्बाकू जनित सभी जानलेवा रोगों में भी गिरावट आयेगी। तम्बाकू से 15 प्रतिशत कैंसर होने का खतरा बढ़ता है, जैसे कि मुंह के कैंसर, फेफड़े, लीवर, पेंट, ओवरी, ब्लड कैंसर।"

इनपुट सीएनएस

ये भी पढ़ें: डायबिटीज से कैंसर का खतरा


More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top