बदलती जीवनशैली से बढ़ी दिल की बीमारियां  

बदलती जीवनशैली से बढ़ी दिल की बीमारियां  प्रतीकात्मक तस्वीर।

लखनऊ। आज के आधुनिक लाइफस्टाइल में 30 से 40 साल की उम्र में ही लोगों को दिल के रोग होने लगे हैं। पिछले दो दशकों में भारत में गलत लाइफस्टाइल, तनाव, एक्सरसाइज न करने और खाने-पीने में लापरवाही की वजह से लोगों को दिल संबंधित गंभीर रोग होने लगे हैं।

इंडियन हार्ट एसोसिएशन की एक रिपोर्ट के अनुसार, 50 प्रतिशत हार्ट अटैक भारतीय पुरुषों में 50 साल तक की उम्र में आते हैं और 25 प्रतिशत हार्ट अटैक भारतीय पुरुषों में 40 साल तक की उम्र में आते हैं।

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”ज़्यादातर मामलों में हृदय को ब्लड पहुंचाने के लिए जिम्मेदार ब्लड वेसल (वाहिका) में खून के थक्के जम जाते हैं, उससे हार्ट अटैक होता है।”
डॉ. विजयंत देवेनराज ,सहायक प्रोफेसर,केजीएमयू

डॉ. विजयंत देवेनराज ,सहायक प्रोफेसर,केजीएमयू

उन्होंने बताया, ”दिल की बीमारी पुरुषों में होने वाली बीमारी के रूप में जानी जाती रही है। यह शायद पिछले अध्ययनों से पता लगा है कि महिलाओं में एस्ट्रोजन नामक हार्मोन उन्हें सुरक्षा प्रदान करता है।“

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में करीब 12 प्रतिशत दिल के मरीजों की उम्र 40 वर्ष से कम है। यह आंकड़ा पश्चिम के देशों से दोगुना है। बीते सालों में 15-20 प्रतिशत हृदयाघात के पीड़ित 25 से 40 साल के रहे हैं। 2005 में लगभग 2.7 करोड़ भारतीय दिल की बीमारी से पीड़ित थे, जो कि 2010 में बढ़कर यह संख्या 3.5 करोड़ और 2015 तक 6.15 करोड़ पर पहुंच गई है।

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वह आगे बताते हैं, ‘’ दिल की बीमारी कई प्रकार की होती हैं। पैदाशीय और समय के साथ दो तरह की बीमारियां दिल की होती हैं। पैदाशीय बीमारियों में दिल में छेद होना, खून का नीला पड़ना के साथ अन्य कई तरह की बीमारियां बच्चों में पाई जाती हैं। समय के साथ बीमारियों में दिल में चर्बी का जमना, हार्ट अटैक आना, खून की नली का ब्लॉक हो जाना, जिसके कारण ही हार्ट अटैक का आना होता है, वाल्व खराब हो जाना, दिल की धड़कने की रफ़्तार का धीमें हो जाना, दिल की ऊपरी परत मोटी हो जाना होती हैं।’’

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में दिल के दौरे से हर 33 सेकेंड में एक व्यक्ति की मौत हो रही है और हर साल करीब 20 लाख लोग दिल के दौरे से पीड़ित हैं, जिनमें ज़्यादातर युवा हैं। शहर में रहने वाले पुरुषों को, गाँव में रहने वाले पुरुषों से दिल के दौरे की संभावना तीन गुणा अधिक होती है।

दिल शरीर का जीवन वॉल्व है, जो इंसान के जिंदा होने का सूचक होता है। लेकिन इस वॉल्व के बीते सालों में खराब होने की संख्या बढ़ी है। वर्तमान में दिल की बीमारी पूरी दुनिया में एक गंभीर समस्या बनकर उभरी है। देश में ही 2016 के दौरान दिल के मरीजों की संख्या 2000 की तुलना में बढ़कर तीन गुना अधिक होने की संभावना है।

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