आप पानी नहीं, जहर पी रहे हैं

इन पाउचों में खाद सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसएसएआई) का पंजीकरण भी नहीं होता है। बावजूद इसके ये पानी के पाउच बाजार में खुले आम बिकते है। जब प्यास लगे तो दो रुपए में आराम से आप अपनी प्यास बुझा सकते हैं।

जब चिलचिलाती गर्मी में प्यास लगती है तो सिर्फ पानी ही है जो प्यास बुझाती है। भले ही वो पानी आपके सेहत के लिए हानिकारक ही क्यों न हो। आजकल बाजारों में पानी के पाउच खुले आम बिक रहे है। ज्यादातर पानी के पाउच में खास बात ये है कि उनमें न तो उसके पैकिंग की तारीख होती है न ही तो उसकी उपभोग करने की अंतिम तिथि पड़ी होती है। इतना ही नहीं इन पाउचों में खाद सूरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसएसएआई) का पंजीकरण भी नहीं होता है। बावजूद इसके ये पानी के पाउच बाजार में खुले आम बिकते है। जब प्यास लगे तो दो रुपए में आराम से आप अपनी प्यास बुझा सकते हैं। इन प्लास्टिक की थैलियों में पैक किया हुआ पानी शरीर के लिए कितना नुकसानदायक है इसके लिए गाँव कनेक्शन के संवाददाता से बात-चीत के दौरान फिजीशियन संजय मिश्रा ने बाताया ...

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बाजारों में जो पानी आता है उसका कोई मानक निर्धारित नहीं होता है कि कैसे उसकी पैकिंग की गई है इतना ही नहीं उसमें पानी की एक्सपायरी डेट भी नहीं होती है जिससे कि ये पता नहीं चल पाता है कि ये पानी कितने दिनों तक पीने के योग्य है। इसको पीने से इसके बहुत से साइडइफेक्ट्स शरीर में हो सकते हैं, इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि पानी के पाउच पैकिंग करने के बाद बोरी में भरकर ऐसे ही खुले में डाल दिया जाता है, धूप लगने की वजह से पानी गरम हो जाता है। जिसकी वजह से प्लास्टिक के जो कैमिकल्स होते हैं वो पानी की डेंसिटी (घनत्व) बढ़ा देते हैं। जिसकी वजह से पानी काफी हद तक नुकसान दायक हो जाता है। डॉक्टर मिश्रा ने बताया कि सस्ता होने की वजह से इसकी उपलब्धता हर जगह है। इसलिए ये आसानी से उपलब्ध हो जाता है।

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लगातार इस्तेमाल से हो सकता है कैंसर

डॉक्टर मिश्रा ने बताया कि ऐसा नहीं है कि सिर्फ गाँव के ही लोग इस पानी का इस्तेमाल करते है बल्कि शहर के लोग भी इसका भरपूर इस्तेमाल करते हैं। इस पानी से होने वाले नुकसान को जानने के बावजूद लोग इस पानी का इस्तेमाल करते हैं। इस पानी के लगातार इस्तेमाल से कई तरह की बीमारियां फैल सकती है इससे लीवर में इंफेक्शन हो सकता है और अगर अलग अलग प्लास्टिक के पाउच में पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं तो कैंसर तक की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए पाउच वाले पानी को पीने से कहीं बेहतर है कि हम अपने साथ पानी की बोतल लेकर चलें।

समय-समय पर चलाया जाता है अभियान

एफएसएसएआई द्ववारा पंजीकृत न होने के बावजूद भी पानी खुलेआम बाजारों में बिक रहे हैं इस बारे में जब हमने एफएसएसएआई अधिकारी, उन्नाव सुधीर कुमार सिंह से पूछा तो उन्होंने बताया कि जिले में जितने पंजीकृत प्लांट हैं वो तो मानक के अनुसार ही बाजार में पानी के पाउच बेच रहे हैं लेकिन उनकी आड. में कुछ लोग गलत तरीके से पानी के पाउच बाजारों में बेच रहे हैं। ऐसे लोगों को हम लोग ट्रेस कर रहे हैं उनकी धरपकड. के लिए अभियान चला रहे हैं। ये पूछने पर कि अभी जिले में कितने ऐसे प्लांट हैं जो पंजीकृत है इस पर एस के सिंह ने बताया अभी तक जिले में सात प्लांट पंजीकृत हैं।

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