मध्य प्रदेश में देसी बीजों को बचा रहा एक किसान

मध्य प्रदेश में देसी बीजों को बचा रहा एक किसानमध्यप्रदेश के 40 जिलों में यात्रा की और धान सहित 200 किस्मों के देसी बीज एकत्रित कर लिए हैं।

लखनऊ। मध्य प्रदेश के 74 वर्षीय किसान बाबूलाल दहिया पर देसी बीज बचाने का जूनून कुछ इस तरह से सवार है कि उनके पास देसी धान की 130 किस्में हैं। इन बीजों को इकट्ठा करने के लिए इन्होंने मध्यप्रदेश के 40 जिलों में यात्रा की और धान सहित 200 किस्मों के देसी बीज एकत्रित कर लिए हैं।

मध्यप्रदेश के सतना जिले से 12 किलोमीटर दूर पिथौराबाद गाँव में रहने वाले बाबूलाल दहिया कविताएं, कहानी, लेख, मुहावरें, लोक्तियां लिखने के बहुत शौकीन है। देशी बीजों के संग्रह को लेकर अपना अनुभव साझा करते हुए बताते हैं, “ज्यादातर कहावतें देसी बीजों से जुड़ी होती थी, मैंने सोचा देशी बीज विलुप्त होते जा रहे हैं तो मेरी कहावतें लिखने से कोई फायदा नहीं है, इसलिए वर्ष 2007 से बीज बचाने का काम शुरू कर दिया।” वो आगे बताते हैं, “शुरुआत में हमारे पास दो तीन किस्म के ही देशी बीज थे, धान सबसे अच्छा पैदा होता था , उसकी ज्यादातर प्रजातियां विलुप्त हो गयी थी, धान की किस्मों को बचाना हमारा मुख्य उद्देश्य था।”

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देशी बीजों का हो अधिक प्रयोग

बाबूलाल बताते हैं, “वर्ष 1965 तक सारे किसान सिर्फ देशी किस्म के ही बीज बोते थे, जब से हरित क्रांति आयी किसानों की बाजार पर निर्भरता ज्यादा बढ़ गयी और धीरे-धीरे देशी बीज विलुप्त होते गये | इनका कहना है, “अगर किसान को आगे बढ़ना है और अपने परिवार का स्वास्थ्य बेहतर रखना है तो देशी बीजों का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना होगा।”

परम्परागत बीज में हजारों गुण धर्म मौजूद-

परम्परागत बीज में हजारों गुण धर्म मौजूद है, सत्तर के दशक में पूरे देश में एक लाख दस हजार देशी बीजों की प्रजातियां थीं।” वो आगे बताते हैं, “देशी बीजों की हम बिक्री नहीं करते हैं, किसानों को बीज के बदले बीज देते हैं, 5/5 के भूखंडों में देशी बीज बोते हैं जिससे हर साल हमारे पास नया बीज होता है, कोदों, कुटकी, सावां, मक्का जैसे तमाम बीजों की कई किस्में हमारे पास हैं, हम एक दूसरे किसान से नए-नए बीज एकत्रित करते रहते हैं।

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