देशी जुगाड़ : पानी की टंकी को बनाया बायोगैस प्लांट, देखिए वीडियो 

बरेली। ऐसे तो आपने कई बड़े-बड़े बायोगैस प्लांट के बारे में सुना होगा जो ज्यादा पैसा लगाकर एक बायोगैस प्लांट तैयार करते है। लेकिन बरेली के एक पशुपालक ऐसे भी है जिन्होने पानी की 500 लीटर की टंकी में एक बायोगैस प्लांट तैयार किया हुआ है।

बरेली जिले से करीब 20 किमी दूर परदौली ब्लॉक में प्रतीक बजाज (25 वर्ष) का डेयरी फार्म बना हुआ है। प्रतीक के फार्म में 30 गाय-भैस है। प्रतीक बताते हैं, "इस प्लांट को लगाने के बाद सिलंडर की जरुरत नहीं पड़ती है। हर महीने के दो सिंलडर का खर्च भी बच जाता है और इसको बनाने में ज्यादा खर्चा भी नहीं आया। पहले गोबर से सिर्फ वर्मीकमोस्ट बनाते थे।"

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बायोगैस इसका मुख्य घटक हाइड्रो-कार्बन है, जो ज्वलनशील है और जिसे जलाने पर ताप और ऊर्जा मिलती है। बायोगैस का उत्पादन एक जैव-रासायनिक प्रक्रिया द्वारा होता है, जिसके तहत कुछ विशेष प्रकार के बैक्टीरिया जैविक कचरे को उपयोगी बायोगैस में बदला जाता है।

चूंकि इस उपयोगी गैस का उत्पादन जैविक प्रक्रिया (बायोलॉजिकल प्रॉसेस) द्वारा होता है, इसलिए इसे जैविक गैस (बायोगैस) कहते हैं। गैस के साथ ही खाद भी बनती है। जानवरों के गोबर को प्लांट में डाला जाता है और इससे निकलने वाला वेस्ट खाद के तौर पर खेतों में उपयोग होता है।

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प्लांट के बारे में जानकारी देते हुए बताते हैं, " दो घनमीटर गैस उत्पादन के इस प्लांट से करीब एक घंटे का गैस का चूल्हा जल जाता है। रोजाना 15 किलो गोबर और 20 लीटर पानी डाला जाता है। प्लांट बनाने के बाद बायोगैस की पूरी क्षमता उत्पन्न करने के लिए करीब एक महीने लगा। जैविक खाद के लिए प्लांट में गोबर और पानी डालने पर गैस बना चुका कचरा टब में गिरता है। कचरा सुखाने पर जैविक खाद तैयार हो जाती है जिसको खेतों में प्रयोग कर सकते है।"अपनी बात को जारी रखते हुए बताते हैं, "जिनके पास पशु है वो इस प्लांट को आसानी से बना सकते है और रसोई गैस के साथ खेत के लिए खाद भी बना सकते है।"

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