फीकी पड़ी बरेली के बांस के बने सजावटी सामान की चमक

फीकी पड़ी बरेली के बांस के बने सजावटी सामान की चमकफाेटो साभार: गूगल इमेज

बरेली। बाजार में बढ़ते सस्ते लकड़ी और स्टील के बने सस्ते उत्पादों के सामने बरेली में केन (बांस) से बना सजावटी सामान का कारोबार धीरे-धीरे दम तोड़ रहा है।

लंबे समय से चल रहे हस्तनिर्मित फर्नीचर, सजावटी सामान और दूसरी उपयोगी वस्तुएं तैयार करने वाले बरेली में केन के कारखाने एक-एक कर बंद हो रहे है। पिछले 50 वर्षों से बांस से सजावटी सामान बनाने का काम कर रह मो. आसिफ (32 वर्ष) बताते हैं," बाजारों में लकड़ी और स्टील के बने सामान सस्ते में मिल जाते हैं, जिससे केन के उत्पाद लोग ज्यादा नहीं खरीदते हैं। एक फर्नीचर बनाने में आठ दिन लग जाते हैं, इसलिए कीमत भी ज्यादा रहती है।"

बरेली जिले के जुनैद अंसारी (65 वर्ष) का खुद का कारखाना है। जुनैद बताते हैं, "केन से बने सोफ़ा सेट, रैक, कुर्सी, स्टूल, डाइनिंग टेबल, शीशा, फ्रेम, झूला आदि कई चीज़ों की मांग रहती है, जिसके लिए हमारे यहाँ से हर महीने 30-35 गाड़ी माल बाहर भेजा जाता था। यह माल पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात में माल भेजा जाता था पर अब 3-4 गाड़ी ही जा पाती है।"

अब सिर्फ दस कारखाने ही बचे

इस समस्या से जुनैद ही नहीं बल्कि बरेली जिले के कई केन उद्यमी इस समस्या से जूझ राजे रहे है। पिछले पांच साल में 30 कारखाने बंद हो चुके है, अब सिर्फ 10 कारखाने ही बचे हुए है। कच्चे माल की बढ़ती क़ीमतों को बड़ी समस्या बताते हुए मो. अहमद बताते हैं," पहले केन का बंडल 30 रूपए में मिल जाता था पर अब उसकी कीमत तीन हज़ार रूपए है। सामान को जीतने दाम में खरीदते है उतने में मेहनताना भी नहीं मिल पता है।"

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