मेरठ में बे-असर साबित हो रहा बचपन बचाओ अभियान, नशा सुंघाकर मंगवाई जा रही भीख 

मेरठ में बे-असर साबित हो रहा बचपन बचाओ अभियान, नशा सुंघाकर मंगवाई जा रही भीख फोटो प्रतीकात्मक 

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

मेरठ। शहर के चौराहों पर अक्सर औरत की गोद में बेसुध लेटा हुआ बच्चा दिख जाता है और औरत उसको अपना बेटा बताकर इलाज के लिए पैसों की गुहार लगाती है। दरअसल ये बच्चे बीमार नहीं बल्कि नशे के कारण लाचार होते हैं। तेजगढ़ी चौराहा, जीरो माइल चौराहा, बेगमपुल, रेलवे रोड सहित मेरठ के दर्जनों स्थानों पर महिलाएं एक वर्ष से दस वर्ष तक के बच्चों को नशीली दवा सुंघाकर बेहोश कर देती हैं। इसके बाद इन बच्चों के इलाज के नाम पर भीख मांगी जाती है। कुछ एनजीओ से मिली जानकारी के अनुसार, मेरठ में भीख मांगने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है।

आबुलेन पर भीख मांग रहे दस साल के बच्चे ने बताया, “मैं मध्यप्रदेश के मुरैना का रहने वाला हूं। घर की स्थिति सही नहीं होने के कारण मैं घर छोड़कर दिल्ली आ गया था। वहां से दो युवक मुझे मेरठ ले आए। शुरू में मैं कोई नशा नहीं करता था, लेकिन दोनों युवक मुझे भीख मांगने के लिए प्रताड़ित करते थे। साथ ही पाउडर भी सुंघाया जाता था। अब मैं उस पाउडर का आदी हो गया हूं, उससे मजबूरी में भीख मांगनी पड़ती है।” तेजगढ़ी चौराहे पर भीख मांगने वाली सात साल की लड़की ने बताया, “मुझे ऐसा करने के लिए मजबूर किया जाता है। यहां कुछ लोग हैं, जो बच्चों को पैसे मांगने के लिए मारते-पीटते हैं और बाद में सारा पैसा छीन लेते हैं।”

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घर ही सुरक्षित है

माई होम इंडिया के संस्थापक व महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में सलाहकार बोर्ड में सदस्य सुनील देवधर बताते हैं, “कई शहरों में बच्चे मानव तस्करी या खुद भागकर आते हैं। संस्था के कार्यक्रम सपनों से अपनों तक के माध्यम से पिछले ढाई वर्षों में 700 बच्चों को उनके घर भेजा गया है।” बच्चों की काउंसलिंग के दौरान पाया गया कि बच्चे आर्थिक तंगी, नशा, किसी के कहने और अपने सपने पूरे करने के लिए घर से निकलते हैं और गलत हाथों में पड़ जाते हैं। वो आगे बताते हैं, “बच्चों का सही विकास उनके माता-पिता के पास ही हो सकता है। केन्द्र सरकार इसके लिए गंभीर है और जल्द ही परिणाम देखने को मिलेंगे।”

केस स्टडी

  • नौचंदी थानाक्षेत्र का बच्चा दो माह से गायब था, 23 अगस्त को वह चौराहे पर भीख मांगता मिला। पूछने पर पता चला कि कुछ लोग जबरन उसे भीख मांगने के लिए मारते-पीटते हैं।
  • तीन मार्च को पांडवनगर निवासी रिंकू अचानक घर से गायब हो गया था। दो माह बाद वह रुड़की के सरकारी अस्पताल में घायल अवस्था में मिला। पूछने पर पता चला कि उसे भीख मांगने के लिए प्रताड़ित किया जाता है। उसने ये करने से मना किया तो बुरी तरह पीटकर सड़क पर फेंक दिया गया।

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चाइल्ड ट्रैफिकिंग कर बच्चों से भीख मंगवाने का धंधा हर बड़े शहर में चल रहा है। अब इसकी आंच मेरठ तक पहुंच गई है। चाइल्ड होम भी बच्चों का सही पालन-पोषण नहीं कर पा रहे हैं, जिसके चलते बच्चे नशे की जद में जा रहे हैं।
अनीता राणा, अध्यक्ष चाइल्ड लाइन, मेरठ

चाइल्ड ट्रैफिकिंग रोकने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं, पिछले दिनों शास्त्रीनगर स्थित होम से बच्चों को सूचना पर आजाद कराया गया था।
अशोक शर्मा, प्रभारी, हयूमन ट्रैफिकिंग यूनिट

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