यूपी में दबंगों ने फूंका एक दलित का घर 

यूपी में दबंगों ने फूंका एक दलित का घर हरिशंकर बनवासी (जिनका घर जला दिया गया )

अंकित तिवारी

स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

इलाहाबाद। सूबे के मुखिया आदित्य योगी नाथ प्रदेश की सत्ता सम्हालते ही दबंगो और गुंडों को सबक सिखाने को लेकर कटिबध्ध थे। लेकिन इसका कोई असर दिखता नज़र नही आ रहा। बानगी के तौर पर जिले के मेजा तहसील अंतर्गत उरुवा ब्लाक के शिव बंशी का पूरा गॉव की घटना को देखा जा सकता है। जहाँ गॉव के ही एक दबंग ने मुसहर जाति के हरिशंकर बनवासी का घर दिन दहाड़े फूंक दिया जिससे पूरा परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है।

घटना के पंद्रह दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई सहायता नही प्रदान की जा सकी है। प्रशासन कानूनी कार्रवाई के पूरा होने का इंतज़ार कर रहा है। घटना के कुछ दिन तक पुलिस भी कुंभकर्णी नींद में तल्लीन थी, लेकिन मामला तूल पकड़ने पर पुलिस ने आपराधिक मामला दर्ज कर आरोपी को जेल भेज अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया।

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जानकारी के मुताबिक उरुवा ब्लाक मुख्यालय से 10 किलो मीटर उत्तर दिशा में स्थित शिव बंशी का पूरा गॉव के निवासियों के मुताबिक तहसीलदार नामक एक युवक ने हरिशंकर बनवासी की झोपड़ी बिना किसी पूर्व विवाद के फूंक डाला जिससे बनवासी की पूरे गृहस्थी का सामान जलकर स्वाहा हो गया। दो जून की रोटी के लाले पड़ गए। आस पड़ोस के लोगों ने कपड़ा और अन्न देकर हरिशंकर के जरूरतों को पूरा करने का काम किया। पीड़ित हरिशंकर बनवासी(45) के मुताबिक प्रशासन की ओर से कोई पूछने तक नही आया। हरिशंकर का यह भी कहना है की आरोपी युवक पर पहले भी कई बार आपराधिक आरोप लगे है। घर फूंकने की सूचना पुलिस को तुरंत दी गई लेकिन पुलिस की ओर से कोई मौके पर नहीं पहुंचा।

पांच पीढ़ी से गॉव में दोना और पत्तल बनाकर करते थे गुजारा

शिवबंशी के पूरे गॉव में लगभग 20-25 घरों में मुसहर जाति के लोग निवास करते है, जिनका मुख्य व्यवसाय पत्तल और दोना बनाकर बेचना है। ये पूरी तरह से भूमिहीन है। गांव के निवासी के तौर पर इनके पास आधार कार्ड से लेकर राशन कार्ड है लेकिन इनका कहना है की सुविधा के नाम पर हम हमेशा उपेक्षित महसूस करते है। इनकी आबादी पर पेयजल का समुचित इंतज़ाम भी नही है। गॉव के तोता राम (40) का कहना है की हम आज भी कुवें का पानी पीने को मजबूर हैं। वही हुकूम (50) का कहना है की सरकार की ओर से इस आबादी में आज तक एक भी शौचालय का निर्माण नही हुआ है। गाँव की सभी महिला से पुरुष सभी खुले में शौच जाने के लिए मजबूर है। मुसहर आबादी के राजेन्द्र (52) ने बताया की राशन कार्ड पर मिलने वाला सस्ता अनाज और अन्य सुविधाएं हमेशा प्राप्त नही होती।

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इस गंभीर मसले पर हमने बात की बी.के.राय तहसीलदार, मेजा (इलाहाबाद) से उनका कहना था कि घटना की जानकारी है लेकिन हमारे पास मानव अपराध से होने वाले नुकसान पर मदद के लिए कोई बजट नही है। इस पर मुकदमे के बाद कोर्ट का जो आदेश होगा उसका पालन कराया जाएगा। हम केवल दैवीय आपदा पर सहायता मुहैय्या करा सकते हैं।

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