Top

वर्ल्ड एनिमल डे विशेष : देश में घटती जा रही गधों की संख्या

वर्ल्ड एनिमल डे विशेष : देश में घटती जा रही गधों की संख्यादेश में इस समय बचे हैं केवल 3.1 करोड़ गधे। फोटो: विनय गुप्ता

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के समय नेताओं के बयानों में भले ही गधों का जिक्र बढ़ गया गया था, लेकिन वास्तविकता में देश में लगातार गधों की संख्या कम हो रही है।

18वीं पशुगणना के मुताबिक जहां गधों की संख्या 4.3 करोड़ थी वहीं 19वीं पशुगणना में इनकी संख्या घटकर 3.1 करोड़ है। इनमे प्रतिवर्ष अंतर 27.17 प्रतिशत है। गधों और खच्चरों के हित में काम करने वाली संस्था द डंकी सैंक्च्युरी के प्रंबधक विनोद खुराना ने बताया, “हमारी संस्था गधों के स्वास्थ्य संरक्षण और उनकी मौजूदा हालत पर काम करती है। इसके साथ ही गधे मालिकों को जागरूक भी करते हैं।”

ये भी पढ़ें- वर्ल्ड एनिमल डे विशेष : इलाहाबाद में स्थापित किया जाएगा कछुआ अभयारण्य

अपनी बात को जारी रखते हुए खुराना बताते हैं, “गधे शब्द का प्रयोग अगर कोई भी करता है तो यह अपशब्द नहीं बल्कि एक उपमा है क्योंकि गधे जितना ईमानदार, जिम्मेदार, वफादार और मेहनती शायद ही कोई दूसरा जानवर होता हो।” डंकी सैंक्च्युरी यूके ने अंडर द स्किन रिपोर्ट जारी की थी जो यह बताती है कि वैश्विक व्यापार में एक चीनी पारंपरिक दवा इजाओ की मांग पूरी करने के लिए उनकी खाल के लिए उन्हें बेरहमी से मारा जा रहा है।

पिछले दस वर्षों से गधों से जो काम होते थे वो अब कम हो गए है। उनकी जगह पर वाहनों का प्रयोग होने लगा है। साथ ही लोगों के पास रहने की इतनी ज्यादा कमी है इसलिए वो गधे मालिकों को उनका मेहताना नहीं मिल पाता है इसलिए वह गधों में रुचि नहीं लेते हैं।
विनोद खुराना, प्रबंधक, संस्था द डंकी सैंक्च्युरी

इजाओ एक कठोर जेल है, जो गर्म पानी अथवा एल्कोहल में मिलाकर भोजन या पेय में प्रयोग किया जाता है। यह सौन्दर्य प्रसाधनों जैसे फेस क्रीम में भी प्रयोग किया जाता है। डंकी सैंक्च्युरी यूके के सीईओ माइक बेकर ने जारी एक बयान में कहा कि ये सिर्फ एक उदाहरण है गधों की चमड़ी के व्यापार का। माइक बेकर ने उस बयान में यह भी कहा था कि गधों की तेज़ी से घटती संख्या और गधों पे आश्रित गरीब समुदाय के आजीविका के साधन को बचाने के लिए कदम उठाना अनिवार्य है जो पशु एवं मनुष्यों दोनों के कल्याण के हित में है।

ये भी पढ़ें- वर्ल्ड एनिमल डे विशेष : गाय भैंस के लिए कृत्रिम गर्भाधान बेहतर लेकिन ये हाईटेक उपकरण और जानकारी ज़रूरी

रिपोर्ट यह भी बताती है कि इजाओ की मांग पूरी करने के लिए दस मिलियन गधों को कत्ल करने के लिए दुनिया भर से आउटसोर्स किया जा रहा है। “पिछले दस वर्षों से गधों से जो काम होते थे वो अब कम हो गए है। उनकी जगह पर वाहनों का प्रयोग होने लगा है। साथ ही लोगों के पास रहने की इतनी ज्यादा कमी है इसलिए वो गधे मालिकों को उनका मेहताना नहीं मिल पाता है इसलिए वह गधों में रुचि नहीं लेते है।“ विनोद खुराना ने कहा।

ये भी पढ़ें- गाय-भैंसों को बांझपन से बचाना है तो ऐसे रखें उनका ख्याल

Next Story

More Stories


© 2019 All rights reserved.