रजनीगंधा की खेती से किसानों को होगा मुनाफा 

Divendra SinghDivendra Singh   30 Aug 2017 11:21 PM GMT

रजनीगंधा की खेती से किसानों को होगा मुनाफा रजनीगंधा के फूलों की बाजार में होती है अच्छी मांग। 

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क/गाँव कनेक्शन

लखनऊ। फूलों की खेती करने वाले किसान रजनीगंधा की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं, ये समय रजनीगंधा की खेती के सही समय होता है।

इसकी रोपाई कंद से की जाती है, इसकी खेती हर तरह की मिट्टी में की जा सकती है, विशेषकर ये बलुई-दोमट या दोमट मिट्टी में अधिक उगता है। रजनीगंधा की व्यावसायिक खेती पश्चिमी बंगाल, कर्नाटक, तामिलनाडु और महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, तथा हिमाचल प्रदेश होती है।

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राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. एसके तिवारी बताते हैं, "पिछले कुछ वर्षों में किसानों का रुझान रजनीगंधा की खेती की तरफ बढ़ रहा है, ये समय रजनीगंधा की खेती के सही समय होता है। संस्थान किसानों समय-समय पर इसकी खेती का प्रशिक्षण भी देता है।"

रजनीगंधा के पौधे 80-95 दिनों में फूलने लगते हैं। मैदानी क्षेत्रों में अप्रैल से सितम्बर और पहाड़ी क्षेत्रों में जून से सितम्बर माह में फूल निकलते हैं। ऐसी जगहों पर जहां दिन और रात के तापमान में अत्याधिक अन्तर न हो पूरे साल उगाया जाता है। उत्तर प्रदेश के मैदानी भागों में यह सम शीतोष्ण मौसम में अप्रैल से नवम्बर तक आसानी से उगाया जा सकता है।

इसकी खेती हर तरह की मिट्टी में की जा सकती है।

रजनीगंधा की खेती समस्त हलकी से भारी (जो हलकी अम्लीय या क्षारीय है) में की जा सकती है, खेत की अच्छी तैयारी व जल निकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। रजनीगंधा के लिये भूमि का चुनाव करते समय दो बातों पर विशेष ध्यान दें। पहला, खेत या क्यारी छायादार जगह पर न हो, यानी जहां सूर्य का प्रकाश भरपूर मिलता हो, दूसरा, खेत या क्यारी में जल निकास का उचित प्रबंध हो। सब से पहले खेत, क्यारी व गमले की मिट्टी को मुलायम व बराबर कर लें।

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साल भर फूल लेने के लिए प्रत्येक 15 दिन के अन्तराल पर कंद रोपण भी किया जा सकता है, कंद का आकार दो सेमी. व्यास का या इस से बड़ा होना चाहिए। हमेशा स्वस्थ और ताजे कंद ही इस्तेमाल करें। बल्ब को उसके आकार और भूमि की संरचना के अनुसार चार-आठ सेमी. की गहराई पर और 20-30 सेमी. लाइन से लाइन और और 10-12 सेमी. बल्ब से बल्ब के बीच की दुरी पर रोपण करना चाहिए रोपण करते समय भूमि में पर्याप्त नमी होना चाहिए। एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में लगभग 1200-1500 किलो ग्राम कंदों की आवश्यकता होगी है।

रजनी गंधा की फसल में फूलों की अधिक पैदावार लेने के लिए उसमे आवश्यक मात्रा में जैविक खाद, कम्पोस्ट खाद का होना जरुरी है। इसके लिए एक एकड़ भूमि में 25-30 टन गोबर की अच्छे तरीके से सड़ी हुई खाद देना चाहिए। बराबर-बराबर मात्रा में नाइट्रोजन तीन बार देना चाहिए। एक तो रोपाई से पहले, दूसरी इस के करीब 60 दिन बाद तथा तीसरी मात्रा तब दें जब फ़ूल निकलने लगे। (लगभग 90 से 120 दिन बाद) कंपोस्ट, फ़ास्फ़ोरस और पोटाश की पूरी खुराक कंद रोपने के समय ही दे दें।

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बल्ब रोपण के समय पर्याप्त नमी होना आवश्यक है जब बल्ब के अंखुए निकलने लगे तब सिंचाई से बचाना चाहिए। गर्मी के मौसम में फसल में पांच-सात दिन और सर्दी के मौसम में 10-12 दिन के अंतर पर आवश्यकतानुसार सिचाई करें सिंचाई की योजना मौसम की दशा फसल की वृद्धि अवस्था तथा भूमि के प्रकार को ध्यान में रखकर बनाना चाहिए। आवश्यकतानुसार माह में कम से कम एक बार खुरपी की मदद से हाथ द्वारा खरपतवार निकालना या निराई-गुड़ाई करना चाहिए।

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