सरकारी धान खरीद केंद्र पड़े सूने, बस कागजों में हो रही बंपर खरीद  

सरकारी धान खरीद केंद्र पड़े सूने, बस कागजों में हो रही बंपर खरीद  फोटो: गाँव कनेक्शन 

सुनीता देवी/स्वयं कम्युनिटी जनर्लिस्ट

पीलीभीत। जनपद में करीब एक हफ्ते पहले धान कटाई का काम लगभग समाप्त हो चुका है। अधिकतर किसान या तो अपने खेत में गेहूं बोने की तैयारी कर रहे हैं या फिर अपने खेत में खड़े गन्ने की फसल को फैक्ट्री में डालने में व्यस्त हैं। इसके बाद भी सरकारी धान खरीद केंद्र सूने पड़े हैं। 25 सितंबर से पांच नवंबर तक लक्ष्य के मात्र 23 फीसदी धान की खरीद हुई थी। अगले 13 दिनों में 15 फीसदी बढ़कर 38.3 फीसदी हो गई। अब जो धान आढ़तियों व राइस मिलरों ने सीधे खरीदे थे। उनको सरकारी केंद्रों पर हुई खरीद दिखाने का बड़ा खेल चल रहा है।

वहीं कुछ किसान आढ़तियों को धान बेचते दिखाई दिए। जैसे ही जनपद में धान की फसल पककर तैयार हुई और किसानों ने सरकारी क्रय केंद्रों पर लाना शुरू किया। वहां पर उन्हें कभी धान में नमी, तो कभी बारदाना न होने का बहाना बनाकर वापस कर दिया गया। शुरू के 15 दिन इन क्रय केंद्रों पर मात्र रस्म अदायगी की गई।

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जब जनपद के धान किसानों को सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बिकता नजर नहीं आया तो उन्होंने मजबूरी में 1000-1100 रुपए प्रति कुंतल के हिसाब से मिल मालिकों व आढ़तियों को धान बेच दिया। जब किसानों का धान खत्म हो गया तो अब इन्हीं मिल मालिकों व आढ़तियों द्वारा सीधे खरीदे गए धान को सरकारी खरीद दिखाकर मोटा मुनाफा कमाया जा रहा है।

बरखेड़ा ब्लॉक के सुहास गाँव के रहने वाले किसान राम सिंह (48 वर्ष) किसान ने बताया, “जब धान लेकर बेचने सरकारी क्रय केंद्र पहुंचे तो कहीं नमी तो कहीं गंदा धान होने की बात कह कर टरका दिया जाता है। वहीं धान मंडी में आढ़तियों द्वारा 1300 रुपए प्रति कुंतल के दाम पर बिका। किसानों की मजबूरी का फायदा सरकार के अधिकारी और व्यापारी उठा रहे हैं। यदि हमारे क्षेत्र में ही क्रय केंद्रों पर धान की तौल हो रही होती तो मंडी लेकर क्यों जाना पड़ता।”

पिछले दिनों भी इसी तरह का फर्जीवाड़ा जनपद में नजर आया था। जिसमें किसानों के नाम से फर्जी खाते खुलवाए गए और उन्हीं किसानों की जोत बही राजस्व विभाग से प्राप्त करनी फर्जी किसानों से खरीद दिखाकर उनके खातों में भुगतान भेज दिया गया। जिन खातों को मंडी के व्यापारियों और राइस मिलर्स के द्वारा संचालित किए जा रहे थे।

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इस तरह एक बड़ा खेल मंडी अधिकारियों और आढ़तियों के बीच तालमेल से लंबे समय से चलता आ रहा है, जिससे जनपद के किसानों को सरकार द्वारा दिए गए धान का समर्थित मूल्य नहीं मिल पाता।

यहां अधिकारियों ने बड़े-बड़े दावे किए हैं कि अभी सरकारी के केंद्रों पर धान आ रहा है, लेकिन गाँव कनेक्शन की टीम ने मंडी सहित कई ग्रामीण क्षेत्र के क्रय केंद्रों का निरीक्षण किया, जहां पर कहीं धान बेचता कोई किसान नजर नहीं आया।

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शुरुआत में नमी के चलते धान खरीद नहीं हो पाई हो पा रही थी। कई अधिकारियों ने क्षेत्र में भ्रमण कर धान खरीद का निरीक्षण भी किया। मंडी के साथ ही क्रय केंद्रों पर भी काफी धान पहुंच रहा है।
डॉ. अविनाश चंद्र झा, डिप्टी आरएमओ

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