इलाहाबाद : सैकड़ों गरीब बच्चों को मिला निजी स्कूलों में दाखिला 

इलाहाबाद : सैकड़ों गरीब बच्चों को मिला निजी स्कूलों में दाखिला प्रतीकात्मक तस्वीर।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

इलाहाबाद। पान की दुकान चलाने वाले गोविंदपुर निवासी भोला मौर्य के बेटे का दाखिला ज्वाला देवी शिक्षण संस्थान में हो गया है। इनका कहना है, “सरकार की यह अच्छी योजना है। अब हमारे बेटे को भी अच्छी शिक्षा मिल सकेगी और उसे मेरी तरह पान की दुकान नहीं करनी पड़ेगी।”

नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम-2009 के अनुपालन में जनपद के 581 गरीब बच्चों को निजी स्कूलों ने अपने यहां दाखिला दिया है। इस कानून को बने आठ साल हो गए, लेकिन जिले के निजी स्कूलों में गरीब बच्चों का प्रवेश इतने बड़े स्तर पर नहीं हो सका था, लेकिन इस बार शहर के दर्जन भर से अधिक स्कूलों ने गरीबों बच्चों को अपने स्कूल में प्रवेश दिया है।

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गरीब बच्चों को कॉन्वेन्ट स्कूलों में पढ़ाने के लिए सरकार की ओर से तमाम इंतज़ाम किए गए हैं। बावजूद इसके सात साल में 300 से भी कम गरीब बच्चों का निजी स्कूलों में दाखिला हो सका था, लेकिन इस बार यह आंकड़ा 581 तक पहुंच गया। शिक्षा सत्र 2015-16 में मात्र 97 बच्चों को ही अंग्रेजी माध्यम वाले स्कूल में प्रवेश मिल सका था। वहीं शिक्षा सत्र 2016-17 में बढ़कर यह संख्या 247 पर सिमट गई। इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों की दुकान करने वाले प्रीतम नगर निवासी भरत सिंह के बेटे का एडमिशन बाल भारती स्कूल में हुआ है।

भरत सिंह का कहना है, “सरकार की इन योजनाओं से सभी बच्चों को पढ़ाई करने का अच्छा अवसर प्राप्त हो रहा है।” एमएल कान्वेंट स्कूल में खुल्दाबाद निवासी आमिर की बेटी का एडमिशन हुआ है। आमिर का कहना है, “सरकार के इस प्रयास से बच्चों के बीच से ऊंच-नीच की भावना समाप्त हो जाएगी और पढ़ाई का सुअवसर प्राप्त होगा।”

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इन स्कूलों में मिला दाखिला

जगत तारन गोल्डन जुबली स्कूल, श्रीमहाप्रभु पब्लिक स्कूल, डीपी पब्लिक स्कूल एलनगंज, इलाहाबाद पब्लिक स्कूल, बाल भारती स्कूल सिविल लाइंस, गंगा गुरुकुलम फाफामऊ, ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मंदिर, न्यू आरएसजे पब्लिक स्कूल झूंसी, एमएल कान्वेंट स्कूल सहित कई अन्य स्कूलों में इस सत्र में दुर्बल वर्ग के बच्चों को दाखिला मिला है।

यह है नियम

नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम-2009 के तहत यह निर्देशित किया गया था की निजी स्कूलों, प्री- प्राइमरी और कक्षा एक के लिए स्कूल में उपलब्ध कुल सीटों के 25 फीसदी सीटों पर अलाभित रूप से दुर्बल वर्ग के बच्चों का एडमिशन करना अनिवार्य होगा।

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साथ ही यह भी नियम है कि गरीब बच्चों को उनके निवास स्थान के आसपास के निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इन बच्चों के प्रवेश से स्कूलों के होने वाले घाटे की भरपाई के लिए प्रत्येक बच्चों के हिसाब से सरकार 450 रुपए प्रतिमाह फीस के तौर पर देती है। बावजूद इसके स्कूलों में इतने बड़े स्तर पर स्कूलों में गरीब बच्चों को दाखिला नहीं मिल सका था। प्रतिमाह फीस के तौर पर मिलने वाली राशि के अलावा किताब और ड्रेस के लिए प्रत्येक बच्चों को प्रतिवर्ष पांच हज़ार सभी बच्चों को दिया जाता है।

बीएसए संजय कुमार कुशवाहा ने बताया आरटीई के आधार पर गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष अधिक गरीब वर्ग के बच्चों का एडमिशन हुआ है। इससे गरीबों के बच्चे भी बड़े स्कूलों में मिल रही शिक्षा का लाभ उठा सकेंगे।

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