सीतापुर में कस्तूरबा की छात्राएं निकालती हैं बाल अखबार

सीतापुर में कस्तूरबा की छात्राएं निकालती हैं बाल अखबारसीतापुर के मानपुर कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में अखबार दिखातीं छात्राएं।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

सीतापुर। कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की छात्राएं समूह में मिलकर अपना साप्ताहिक बाल अखबार ‘नई सुबह’ के नाम से निकाल रहीं हैं। एक चार्ट पेपर में ये छात्राएं कई तरह की खबरें लिखती हैं। एक बड़े चार्ट पेपर में खबरों के साथ चुटकले, कहानी, कई तरह के फूल और फलों की आकृति बनाकर उसके अंदर लिखती हैं।

सीतापुर जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर बिसवां तहसील के मानपुर में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय है। जिसमें 25 गाँव की 100 छात्राएं पढ़ती हैं। आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली फिजा खातून बताती हैं, “हम सब सहेलियां मिलकर पेपर को अच्छे से सजाते हैं, जिसकी कला अच्छी होती है वो कला बनाती हैं, जिसकी राइटिंग अच्छी होती है वो लिखती हैं। खेल-खेल में दो-तीन घण्टे में हम अपना अखबार तैयार कर लेते हैं।” वो आगे बताती हैं, “नई सुबह अखबार से हर दिन हम कुछ नया सीख पाते हैं, इसमें कई जानकारियां होती हैं।”

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ये अखबार कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में उन छात्राओं को पढ़ने का मिलता है, जिनकी या तो पढ़ाई छूट चुकी होती है या फिर मजदूरों की बेटियां होती हैं। सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली मुस्कान वर्मा का कहना है, “गाँव के स्कूल में कभी ये सब नहीं सिखाया गया। यहां पर पढ़ाई के साथ-साथ कई तरह की चीजें सिखाई जाती हैं। हमें ताइक्वांडो भी आता है। पूरे स्कूल में पेड़ लगाए हैं।”

वो खुश होकर बताती हैं, “जब पूरा अखबार बन जाता है तो हम आपस में कॉम्पिटिशन करते हैं, किसका अच्छा पेपर बना है किसका खराब। हर बार नये ढंग से पेपर बनाते हैं और कुछ नया लिखते हैं।” विद्यालय की वार्डेन मिथलेश सिंह बताती हैं, “बच्चे कुछ नया सीखें ये हमारी हमेशा कोशिश रहती है। हम इन्हें पढ़ाई के साथ रंगमंच, स्कॉउड गाइड, ताइक्वांडो, खेलकूद, बागवानी जैसी कई तरह की गतिविधियां कराते रहते हैं।” वो आगे बताती हैं, “इस तरह की गतिविधियों से इनका पढ़ने में मन लगा रहता है और वो कुछ नया सीखती रहती हैं।”

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महिला समाख्या की जिला समन्यवक अनुपम लता बताती हैं, “जिले में दो कस्तूरबा स्कूल महिला समाख्या की देखरेख में चल रहे हैं। बच्चों ने अपने-अपने नाम के पौधे लगाए हैं, उसकी देखरेख खुद ही करते हैं, ये मजदूर और गरीबों के बच्चे हैं, ये आगे बढ़ रहे हैं हमे इन्हें आगे बढ़ते देखकर खुशी होती है।”

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