कन्नौज शहर में न तो नारी निकेतन केंद्र न ही बाल सुधार गृह

कन्नौज शहर में न तो नारी निकेतन केंद्र न ही बाल सुधार गृहशहर में न तो नारी निकेतन केंद्र है और न ही बाल सुधार गृह।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

कन्नौज। मानसिक रूप से परेशान, सताई गई महिला, भटकते बच्चे, लावारिश या मंदबुद्धि बालकों को रखने के लिए शहर में कोई महफूज जगह नहीं है। कन्नौज जिले को बने हुए 20 साल गुजर गए, लेकिन कई जरूरी सुविधाओं के लिए यह दूसरे जनपद के कंधों के सहारे चल रहा है। शहर में न तो नारी निकेतन केंद्र है और न ही बाल सुधार गृह।

10 मई को तड़के तीन बजे यूपी पुलिस की डायल 100 गाड़ी से एक महिला को ‘आपकी सखी रानी लक्ष्मी बाई आशा ज्योति केंद्र’ लाया गया। सीआईसी काउंसलर किरन सागर बताती हैं, ‘‘महिला तिर्वा-रसूलपुर गाँव के निकट मिली थी। मानसिक रूप से काफी परेशान थी। नाम-पता भी नहीं बता सकी। कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद परिवर्तन सुधार गृह कानपुर भेज दिया गया।’’

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मीना (30 वर्ष) गूंगी-बहरी हैं। चार अप्रैल को उन्हें इंदरगढ़ थाना क्षेत्र से कन्नौज लाया गया। महिला का नाम हाथ में गुदा था। बाद में उसे भी डीएम, एसपी और महिला एसओ की राय के बाद इटावा नारी निकेतन गृह भेजा गया। किरन बताती हैं, ‘‘छह मई को महिला का हालचाल लेने के लिए इटावा जाकर फालोअप किया गया।’’

जिला प्रोबेशन अधिकारी पवन कुमार सिंह ने बताया, लावारिश बच्चों को कानपुर और महिलाओं को इटावा या कानपुर भेजा जाता है। कन्नौज जिले में ऐसा कोई स्थान नहीं है जहां रखा जा सके। हां, आशा ज्योति केंद्र में पीड़ित महिलाओं के मामले निपटाए जाते हैं। उनको कुछ दिन रखा जा सकता है।

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