इलाहाबाद के ओडीएफ घोषित गाँवों में दस फीसदी घरों में ही बने शौचालय  

इलाहाबाद के ओडीएफ घोषित गाँवों में दस फीसदी घरों में ही बने शौचालय  साभार: इंटरनेट 

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

इलाहाबाद। जिले के चार ब्लाक को जिला प्रशासन की ओर से ओडीएफ घोषित करने के विरोध में जिले के प्रधान उतर आए हैं। ग्राम प्रधानों का कहना है कि जिले के किसी भी ब्लाक में सौ फीसदी शौचालय निर्माण नहीं हुआ है, तो कैसे उस ब्लाक को खुले में शौचमुक्त घोषित किया जा सकता है।

अखिल भारतीय प्रधान संघ के प्रदेश महासचिव सत्येंद्र त्रिपाठी का कहना है, “जिला प्रशासन के आला अधिकारी गाँवों के साथ अन्याय करने में उतारू हो चुके हैं। गाँवों में 10 फीसदी घरों में भी शौचालय का निर्माण नहीं हो सका है और उसे जिलाधिकारी खुले में शौच मुक्त घोषित कर इनाम लेना चाह रहे हैं।”

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वह आगे बताते हैं, “प्रशासन के इस काम से गाँवों का कितना नुकसान होगा इसका अंदाज़ा जिलाधिकारी को नहीं है। ओडीएफ घोषित हो जाने के बाद इन गाँवों के लोगों को कभी शौचालय निर्माण के लिए धन नहीं मिल पायेगा।” अखिल भारतीय प्रधान संघ के बैनर तले जिले के सोरांव ब्लाक में ग्राम प्रधानों ने बैठक कर चाका, सोरांव, जसरा और उरुवा ब्लाक को फ़र्जी रूप से खुले में शौच मुक्त घोषित करने का विरोध का फैसला किया।

मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे थे ग्राम प्रधान

अखिल भारतीय प्रधान संघ का प्रतिनिधिमंडल शनिवार को मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर मिलने पहुंचा था। प्रतिनिधिमंडल में अखिल भारतीय प्रधान संघ के प्रदेश महासचिव सत्येंद्र त्रिपाठी, जिला अध्यक्ष विजय सिंह पटेल, मंडल अध्यक्ष शीतला प्रसाद पांडेय और कोषाध्यक्ष राजकुमार प्रजापति शामिल थे। जिलाध्यक्ष विजय सिंह पटेल के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ हवन कार्यक्रम में व्यस्त होने की वजह से मुलाकात नहीं कर सके। उनके प्रतिनिधि को लिखित रूप से अवगत करा दिया गया।

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ग्राम प्रधानों का आरोप बेबुनियाद नहीं है। इनका आरोप बिल्कुल सही है, लेकिन हमारे पास जितनी बजट है उतने शौचालय का निर्माण करा चुके हैं। योजना के मुताबिक पात्रों का चयन भी किया जा चुका है। जैसे-जैसे सरकार से धन आवंटित होगा हम शौचालय का निर्माण कराते रहेंगे। जिला का कोई गाँव वंचित नहीं रहेगा।
दुर्गा प्रसाद तिवारी, डीपीआरओ

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