बजट ही नहीं, जनपद कैसे होगा खुले में शौच मुक्त? 

बजट ही नहीं, जनपद कैसे होगा खुले में शौच मुक्त? स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत दिसंबर 2017 तक ओडीएफ घोषित किया जाना है।

अनिल चौधरी, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

पीलीभीत। जनपद को स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत दिसंबर 2017 तक ओडीएफ घोषित किया जाना है, जिसमें लक्ष्य एक लाख 48 हज़ार शौचालय बनाए जाने का रखा गया है, जबकि अभी तक मात्र 8,846 शौचालय ही बन पाए हैं।

इसलिए इस लक्ष्य को प्राप्त करने की समय-सीमा दिसंबर 2017 से बढ़ाकर अक्टूबर 2018 तक कर दी गई है, लेकिन बजट न उपलब्ध हो पाने के कारण इस लक्ष्य की प्राप्ति होती नजर नहीं आ रही है। एक लाख 48 हज़ार शौचालय बनाने के लिए 177 करोड़ रुपए की आवश्यकता थी, जबकि अभी तक शासन से जनपद को मात्र 16 करोड़ रुपए ही प्राप्त हो पाए हैं।

ये भी पढ़ें- गोरखपुर जिले के खोराबार ब्लॉक का एक भी गाँव नहीं हो सका ओडीएफ

शुरुआती दौर में जनपद को ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) बनाने के लिए एक लाख 63 हज़ार शौचालयों की आवश्यकता थी, जिनका लक्ष्य दिसंबर 2017 रखा गया था, जबकि बाद में सर्वे के दौरान कुछ लाभार्थियों के शौचालय बने हुए पाए गए, इसलिए एक लाख 48 हज़ार शौचालयों की आवश्यकता महसूस की गई। इन शौचालयों के निर्माण के लिए 177 करोड़ रुपए धनराशि की जरूरत है, लेकिन मात्र 16 करोड़ रुपए ही शासन से प्राप्त हो पाए, जिनमें मात्र दस हज़ार शौचालय ही निर्मित किए जा सकते हैं।

शौचालय निर्माण के लिए 16 करोड़ की धनराशि को दस हज़ार शौचालयों के लिए जारी कर दी गई है और उनमें से 8,846 शौचालय बनकर तैयार हो चुके हैं, जबकि अभी कुछ शौचालयों पर काम चल रहा है। जनपद में टाइगर रिजर्व के किनारे सटे 99 गाँवों में लगातार बाघ द्वारा ग्रामीणों पर हमला किया जा रहा है, जिससे सालभर में अब तक 15 ग्रामीणों की जान भी जा चुकी है, इससे ग्रामीण खुले में शौच जाने से डर रहे हैं।

ये भी पढ़ें- सोनिया गांधी और राहुल के गोद लिए गांवों के लोगों का दर्द सुनिए

स्थानीय सांसद व केंद्रीय महिला एवं बाल विकास कल्याण मंत्री मेनका गांधी द्वारा चयनित गाँव गुलड़िया भूपसिंह में 600 शौचालयों का निर्माण होना था, जिनमें से मात्र 246 शौचालय ही बन पाए हैं। सांसद व केंद्रीय मंत्री का गोद लिया गाँव भी पूरी तरह ओडीएफ नहीं हो पाया। इस बारे में गुलड़िया भूप सिंह निवासी (70 वर्ष) दिलीप कुमार कहते हैं, “सांसद द्वारा गोद लिए गए हमारे गाँव में आज भी बहुत से लोग शौच के लिए जंगलों में ही जाते हैं क्योंकि चयन के समय परिवार को मात्र एक ही शौचालय मिला, जबकि एक परिवार में तीन चार भाई रहते हैं, जिस भाई के हिस्से में शौचालय का निर्माण होता है वह दूसरे भाई के परिवार को शौचालय इस्तेमाल नहीं करने देता।”

मुख्य विकास अधिकारी इंद्रदेव द्विवेदी ने बताया जनपद को स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शौचालय बनाने के लिए बजट टुकड़ों में प्राप्त हो रहा है, जो धनराशि प्राप्त हो जाती है, वह तुरंत ही शौचालय निर्माण के लिए स्वीकृत कर दी जाती है और लाभार्थियों के खातों में भेज दी जाती है। शासन से गुजारिश की गई है कि शौचालय निर्माण के लिए आवश्यक बजट को एक बार में ही आवंटित किया जाए, जिससे शौचालय निर्माण के कार्य में तेजी लाई जा सके।

ये भी देखें :

ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।

Share it
Top