उन्नाव : प्रतिबंधित पॉलीथिन से पटे शहर के नाले 

उन्नाव : प्रतिबंधित पॉलीथिन से पटे शहर के नाले पॉलीथिन की वजह से शहर के नाले पट चुके हैं।

नवनीत अवस्थी, स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

उन्नाव। पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगभग एक वर्ष पहले लगाया गया था, इसके बावजूद बाजारों में प्रतिबंधित पॉलीथिन का धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है। पॉलीथिन की वजह से शहर के नाले पट चुके हैं, जिससे बरसात के सीजन में जलभराव की समस्या पैदा हो गई है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जनवरी 2016 से पूरे प्रदेश में प्लास्टिक के कैरी बैग बनाने, आयात करने, भंडारण, विक्रय व इसके प्रयोग पर पूर्णरूप से प्रतिबंध लगा दिया था। शुरुआती दिनों में नगर पालिका और खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने प्रतिबंध को लागू कराने के लिए छापेमारी की।

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कार्रवाई कर दुकानों से प्लास्टिक की थैलियों को जब्त कर नष्ट भी करवाया, लेकिन लोगों की जरूरत बन चुकी पॉलीथीन के चलते धीरे-धीरे कर इसके खिलाफ जारी अभियान की गति धीरे-धीरे मंद होती गई जो वर्तमान में शून्य पर पहुंच गई है, जिसका नतीजा यह है कि पॉलीथिन का प्रयोग धड़ल्ले से जारी है। आज जिले की सभी किराने की दुकानों, कपड़ों की दुकानों, सब्जी की दुकानों व चाय, फल आदि की दुकानों पर पॉलीथीन का प्रयोग खुलेआम हो रहा है।

चलन तो बंद न हुआ पर कीमत बढ़ गई

प्रतिबंध का असर चलन पर भले ही न हुआ हो पर इसके व्यापार से जुड़े लोगों की आमदनी अवश्य बढ़ गई है। शुरुआती दिनों में छापेमारी के डर से चोरी छिपे चलता रहा पॉलीथिन का कारोबार अब लगभग खुलेआम शुरू हो गया है। यही नहीं प्रतिबंध का हवाला देते हुए दुकानदारों ने कीमतें भी बढ़ा दी हैं। सूत्रों जानकारी के मुताबिक, प्रतिबंध से पहले जो पन्नी 140 रुपए प्रति किलोग्राम मिलती थी अब वही पन्नी 180 रुपए प्रति किलोग्राम मिल रही है। 200 ग्राम वजन का पॉलीथीन का जो पैकेट पहले 30 रुपए में बिका करता था अब वह 35 रुपए में बिक रहा है।

शहर के मोहल्ला गांधी नगर में रहने वाले आदित्य वर्मा (27 वर्ष) ने बताया, “पर्यावरण के लिए पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाना आवश्यक है। जिम्मेदारों को चाहिए कि वह बिक्री और प्रयोग को रोकें।” पर्यावरण के लिए काम करने वाले आशुतोष पांडेय (62 वर्ष) ने बताया, “पॉलीथिन से सफाई व्यवस्था भी चौपट हो जाती है। नालियां चोक हो जाती हैं। यह जानवरों को भी नुकसान पहुंचाती हैं। कई वर्ष तक यह नष्ट नहीं होती।”

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प्रतिबंध का उल्लंघन करने पर सजा

पर्यावरण के लिए घातक पॉलीथिन पर लगाए गए प्रतिबंध का पालन हो इसके लिए सजा की व्यवस्था भी गई है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 19 के तहत शिकायत दर्ज कराए जाने का प्रावधान है। जिसमें पांच साल तक कारावास या एक लाख रुपए जुर्माना अथवा दोनों की सजा हो सकती है। दोष सिद्ध होने के एक साल बाद भी उल्लंघन जारी रहता है तो कारावास की अवधि सात साल तक बढ़ाई जा सकती है।

एसडीएम मेघा रूपम ने बताया जल्द ही शहर में अभियान चलाया जाएगा। लोगों को भी पॉलीथिन का प्रयोग न करने के लिए जागरूक किया जाएगा।

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