प्रतिमाओं के विसर्जन से सरयू नदी हो रही प्रदूषित 

प्रतिमाओं के विसर्जन से सरयू नदी हो रही प्रदूषित फोटो: गाँव कनेक्शन 

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

करनैलगंज (गोंडा)। एक तरफ नदियों को बचाने के लिए पूरे देश में अभियान चल रहा है, वहीं दूसरी ओर मूर्तियों का विसर्जन सरयू नदी को न सिर्फ प्रदूषित कर रहा है, बल्कि इसके प्रवाह को बाधित कर रहा है। दुर्गापूजा के बाद अब दिवाली पर लक्ष्मी की प्रतिमा का विसर्जन होगा। इससे पहले कहा जा रहा था कि जमीन खोदकर प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा, लेकिन जनप्रतिनिधि अब खामोश हैं। प्रशासन भी अपनी जिम्मेदारी भूल गया।

जीवनदायिनी सरयू के जल में लाखों-करोड़ों छोटे-छोटे जीवों का वास है। प्रतिमाओं के नदी में विसर्जन से इन जीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाता है। यहां प्रति वर्ष सैकड़ों प्रतिमाओं का विसर्जन होता है। गत वर्ष 304 प्रतिमाओं का विसर्जन सरयू नदी में हुआ था। वहीं इस वर्ष भी करीब 300 से अधिक प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ। एक स्थान की एक प्रतिमा के साथ कम से कम चार प्रतिमाएं अलग-अलग देवी-देवताओं की होती हैं। इस तरह छोटी-बड़ी मूर्तियों की संख्या करीब एक हजार हो जाती है, जो सरयू नदी में विसर्जित होती हैं।

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ये मूर्तियां नदी में विसर्जित की जाती हैं तो उनकी मिट्टी, केमिकल युक्त रंग सरयू के जल में घुल जाने के बाद प्रदूषित हो जाता है। आने वाले दिनों में यही स्थिति रही तो सरयू का अस्तित्व भी समाप्त हो सकता है। चूंकि सरयू घाट के आसपास नदी की गहराई कम होने के साथ ही पानी कम हो रहा है या पट चुकी है।

सरयू के जल में बहाव भी नहीं है कि उसकी गंदगी बह सके, जबकि प्रति दिन सैकडों व वर्ष में छह मेलों का आयोजन होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु स्नान करते हैं। गंदगी को लेकर प्रशासनिक अक्षमता के चलते नदी का अस्तित्व खतरे में है।

  • 304 प्रतिमाओं का विसर्जन सरयू नदी में हुआ था गत वर्ष
  • 300 से अधिक प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ इस वर्ष

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नदियों में मूर्तियों का विसर्जन न हो, इसके लिए धार्मिक व सामाजिक संगठनों को भी आगे आना चाहिए। तभी नदियों की निर्मलता और प्रवाह बनाए रखने में मदद मिलेगी। फिर भी बीडीओ के माध्यम से सफाईकर्मियों से सफाई कराने के लिए आदेश जारी किए जा रहे हैं।
अर्चना वर्मा, एसडीएम

नदी के पानी में जलीय जीव व वनस्पतियां मौजूद रहती हैं। इसमें कोई बाहरी तत्व या पदार्थ आने पर उनका प्राकृतिक वास प्रभावित होता है। इसका असर समूचे पर्यावरण पर पड़ता है। प्रतिमाओं का विर्सजन श्रद्धा का विषय है तो नदी के किनारे गड्ढे में प्रतिमा डालकर सांकेतिक तरीके से प्रवाहित किया जाए।
टी रंगा राजू, डीएफओ, गोंडा

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