भुखमरी की कगार पर असमायोजित शिक्षामित्रों के परिवार 

भुखमरी की कगार पर असमायोजित शिक्षामित्रों के परिवार प्रतीकात्मक तस्वीर

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। एक तो महीने भर का मानदेय मात्र 3500 रुपए, वह भी पिछले तीन महीनों से न मिला हो तो घर की आर्थिक स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। ऐसी ही आर्थिक स्थिति का सामना कर रहे 30,000 असमायोजित शिक्षामित्रों के परिवार भुखमरी की कगार पर आ गए हैं।

लखनऊ मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित काकोरी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय माधवपुर में पढ़ाने वाले असमायोजित शिक्षामित्र शिवकिशोर दिवेदी (38 वर्ष) कहते हैं, “आज के दौर में पहले से ही मात्र 3500 रुपए में परिवार चलाना मुश्किल था। अब पिछले तीन महीनों से वह मानदेय भी नहीं मिल रहा है। परिवार भुखमरी की कगार पर आ गया है।”

शिवकिशोर आगे कहते हैं, “नए शैक्षिक सत्र में तीन बच्चों की फीस और किताबों-कॉपियों का बोझ और बच्चों के साथ पत्नी और अपने माता-पिता के भरण-पोषण के लिए उधार लेना पड़ गया है। कुछ रास्ता नजर नहीं आ रहा, कभी-कभी मन करता है खुदकुशी कर लूं, लेकिन फिर परिवार की जिम्मेदारी का अहसास होता है कि इन सबका क्या होगा।”

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उत्तर प्रदेश में 1,72,000 शिक्षामित्रों में से अधिकतर का समायोजन किए जाने के बाद लगभग 30,000 हजार शिक्षामित्र असमायोजित रह गए थे, जिनके समायोजन का मामला सुप्रीम कोर्ट में लम्बित है। इन असमायोजित शिक्षामित्रों को प्रतिमाह 3500 रुपए मानदेय के रूप में दिए जा रहे थे। नई प्रदेश सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान के तहत पढ़ा रहे शिक्षामित्रों के मानदेय को चालू वित्त वर्ष में ही बढ़ाकर 10 हजार रुपए किये जाने का प्रस्ताव केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजा था, जिसको स्वीकार कर लिया गया था।

मार्च 2017 की पीएपी मीटिंग में शिक्षामित्रों का मानदेय 3500 से बढ़ाकर 10,000 रुपए किये जाने की स्वीकृति भी दे दी गई, जिसके लिए परियोजना निदेशक द्वारा मानदेय वृद्धि का प्रस्ताव शासन के पास भेजा गया था, लेकिन इसके बावजूद मानदेय वृद्धि का शासनादेश तो दूर शिक्षामित्रों को मार्च, अप्रैल व मई महीने का 3500 रुपए मानदेय भी नहीं दिया गया है।

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बहराइच के प्राथमिक विद्यालय बोंडी में पढ़ाने वाले असमायोजित शिक्षामित्र आशीष श्रीवास्तव (34 वर्ष) कहते हैं, “अपने घर में अकेला कमाने वाला हूं। वह भी मात्र 3500 रुपए मानदेय के रूप में मिल रहे थे, जिसमें मैं किसी तरह से अपनी पत्नी, दो बच्चों और माता-पिता का भरण-पोषण कर रहा था। पिछले तीन महीनों से यह भी नहीं मिल रहे हैं। बहुत परेशान हूं घरवालों का भरन-पोषण आखिर किस तरह से करूं। कहा गया था कि अब मानदेय 10,000 हजार होने जा रहा है वह तो अभी तक हुआ नहीं जो मिल रहा था वह भी नहीं मिल रहा है।”

अपर परियोजना निदेशक राजकुमारी वर्मा ने बताया नए वेतनमान के सम्बन्ध में अभी शासनादेश शासन से तैयार नहीं हुआ है। अभी असमायोजित शिक्षामित्रों के सम्बन्ध में जांच जारी है जैसे ही जांच पूरी होगी और शासनादेश तैयार होगा शिक्षामित्रों को नया वेतन मिलने लगेगा। पिछले तीन महीनों से मानदेय न मिलने की जो बात है उसको तीन-चार दिनों में जारी कर दिया जाएगा, बीएसए इस पर काम कर रहे हैं।

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