स्वाइन फ्लू का खतरा बढ़ा, रहिये सतर्क

स्वाइन फ्लू का खतरा बढ़ा, रहिये सतर्कबेमौसम स्वाइन फ्लू का प्रकोप बढ़ गया है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। बेमौसम स्वाइन फ्लू का प्रकोप बढ़ गया है। मौसम न होने के बावजूद स्वाइन फ्लू के कहर से फिर भी लोग प्रभावित हो रहे हैं। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग भी बेचैन है और इसके लिए अलर्ट जारी किया है।

बिहार की गोपाल गंज निवासी माधुरी गुप्ता (49 वर्ष) की स्वाइन फ्लू की पुष्टि लखनऊ के केजीएमयू में हुई है। वहीं आशियाना निवासी अभिनव (आठ वर्ष) में भी स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। डॉ अन्नू बहारी (54 वर्ष) पीजीआई निवासी की स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई, राजाजीपुरम निवासी नमिता सिंह (50 वर्ष) में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है, सिमरन सिंह (28 वर्ष) कानपूर रोड निवासी में भी स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई, कानपूर रोड निवासी सुरेन्द्र सिंह (52 वर्ष) में भी स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है, गोमतीनगर निवासी प्रीती सिंह (30 वर्ष) में भी स्वाइन फ्लू में पुष्टि पायी गयी है। जनवरी से अब तक राजधानी में सात स्वाइन फ्लू के केस आये हैं जिनकी जांच में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है।

सीएमओ डॉ जीएस वाजपेयी ने बताया कि बच्चा परिवार के साथ 29 मई को नैनीताल घूमने गया था। दो जून को परिवार लखनऊ लौट कर आया। उसे केजीएमयू के बाल रोग विभाग में दिखाया गया। यहां जांच में स्वाइन फ्लू का वायरस पाया गया।

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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 12 फरवरी तक स्वाइन फ्लू से मरने वालों की संख्या 485 थी। आंकड़े बताते हैं कि 15 फरवरी तक एच1एन1 इंफेक्शन से 100 और लोगों की मौत हो गई। इस वजह से मरने वालों की संख्या 585 हो गई। इसके अलावा इस साल देश में 8,423 लोग स्वाइन फ्लू के संपर्क में आ चुके हैं।

लखनऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जीएस वाजपेई बताते हैं, “इस गर्मी में स्वाइन फ्लू का एच1एन1 वायरस नहीं पनप सकता है। फिलहाल सभी अस्पतालों को अलर्ट जारी कर दिया गया है। बलरामपुर, लोहिया और सिविल अस्पताल में स्वाइन फ्लू जांच के नमूने लिए जाने की व्यवस्था है। पीजीआई और केजीएमयू में जांच के बंदोबस्त किए गए हैं।”

स्वाइन फ्लू हवा के माध्यम से एक से दूसरे मनुष्य तक पहुंच सकता है इसलिए ये उन लोगों को अपनी चपेट में आसानी से ले लेता है जो भीड़-भाड़ के इलाकों में रहते हैं। इसके अलावा जिन्हें निमोनिया या सांस से जुड़े विकार जैसे अस्थमा, ब्रोंकायटिस हो, गर्भवती महिलाएं, हृदय या डायबिटिस जैसे रोगों से जूझ रहे लोग, 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग और दो वर्ष से कम उम्र के बच्चे इस रोग से जल्दी प्रभावित हो सकते हैं।

अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सुनील कुमार रावत ने बताया, “अभी तक जो भी मरीज स्वाइन फ्लू के आये है वो यहां से नही हैं वो कहीं न कहीं बाहर गये थे जहां से उन्हें खांसी और जुकाम जैसी बीमारी हुई। लखनऊ में आने पर उनमें स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई।”

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हमेशा रखें ख्याल

  • हमेशा रुमाल साथ लेकर चलें, छींक आए या खांसी, अपने रुमाल को अपने मुंह पर जरूर रखें।
  • कोई छींक रहा हो तो कम से कम चार मीटर की दूरी बनाएं।
  • स्वयं सर्दी खांसी या बुखार जैसा लगे तो घर से बाहर जाना बंद करें। परिवार के सदस्यों से एक नियत दूरी बनाये रखें।
  • बाजार या भीड़-भाड़ वाले इलाकों में मजबूरन ही सही, जाना पड़े तो विशेषतौर पर ध्यान रखें कि आप आंखों, नाक और मुंह में उंगलियों का स्पर्श ना करें।
  • घर पहुंचते ही हाथ को कम से कम 40 सेकेंड तक धो लें। चेहरे, नाक, और मुंह की भी सफाई जरूर करें।
  • यदि आपके इलाके में स्वाइन फ्लू फैला हुआ है तो स्टैण्डर्ड मास्क (एच-95) पहनकर ही घर से बाहर निकलें, स्टैण्डर्ड मास्क ही स्वाइन फ्लू से बचा सकता है।

स्वाइन फ्लू की आशंका पर जांच कराएं

  • जुखाम के साथ नाक से पानी आना
  • गले में खराश -आंखे लाल होना
  • बुखार आना
  • सांस लेने में तकलीफ
  • कमजोरी और थकान महसूस होना। सावधानी बरतें
  • पुष्टि के बाद मरीज से पांच फिट की दूरी बनाएं
  • मरीज को अलग कमरें में रखें
  • तौलिया अलग कर दें
  • भीड़-भाड़ वाले स्थान पर न निकलें
  • हाथ मिलाने से बचें
  • मास्क लगाएं -हाथ न मिलाएं
  • नाक व मुंह छुने पर साबुन से हाथ धुले
  • सर्दी-जुखाम व बुखार आने पर बिना डॉक्टरी सलाह पर दवाएं न लें
  • खानपान में सावधानी बरतें

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