आप के मन में ही यही आएगा काश ऐसा पंचायत भवन हमारे गाँव में भी होता

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 351 किलोमीटर की दूरी पर बसा बनारस मंडल में आने वाला चंदौली जिला खुद में 17 लाख लोगों की आबादी को समेटे हुए हैं। प्राकृतिक संसाधनों की नजर से इस जिलें में खेती और पशुपालन में अपार सम्भावनायें हैं, इस जिले में धान की पैदावार अधिक मात्रा में की जाती हैं। चंदौली को उत्तर प्रदेश का धान का कटोरा भी कहा जाता है।

आप के मन में ही यही आएगा काश ऐसा पंचायत भवन हमारे गाँव में भी होता

सीकरी (चन्दौली)। ''अरे यहां इतना खूबसूरत ग्रामीण मिनी सचिवालय और वो भी उत्तर प्रदेश के अति पिछडे जिले में, ये तो अचरज वाली बात हैं जरुर यहाँ के प्रधान बहुत सक्रीय होंगे।'' ये वो शब्द हैं, जो यहां पहली बार आने वाले हर किसी आम आदमी और अधिकारी के हदिमाग में जरुर आते होंगे?

जी हाँ, आज हम आपको ले चल रहे है, उत्तर प्रदेश के अतिपिछड़े जिलों में शुमार चंदौली जिले के ग्राम पंचायत सीकरी में जहां के प्रधान ने सरकारी योजनाओं में आने वाले धन से सरकार की मंशा को जमींन पर उतार दिया हैं। इस ग्रामीण मिनी सचिवालय को देखने के बाद आपके मन में भी यह ख्याल जरुर आएगा कि, काश हमारे गाँव में भी इतना खूबसूरत और अत्याधुनिक सुविधाओं से पूर्ण मिनी ग्रामीण सचिवालय होता।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 351 किलोमीटर की दूरी पर बसा बनारस मंडल में आने वाला चंदौली जिला खुद में 17 लाख लोगों की आबादी को समेटे हुए हैं। प्राकृतिक संसाधनों की नजर से इस जिलें में खेती और पशुपालन में अपार सम्भावनायें हैं, इस जिले में धान की पैदावार अधिक मात्रा में की जाती हैं। चंदौली को उत्तर प्रदेश का धान का कटोरा भी कहा जाता है। उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग में ये बिहार की सीमा से लगा हुए इस जिलें में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव हैं।


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नीति आयोग ने अति पिछडे जिलों की लिस्ट जारी की हैं उनमे जनपद चंदौली का नाम भी शामिल हैं लेकिन चंदौली जिलें के चंदौली ब्लाक में आने वाले ग्राम पंचायत सीकरी जाने के बाद आप का नजरिया चंदौली के लिए जरुर बदल जायेगा। पांच हजार की आबादी और 2300 मतदाताओ वाले इस ग्राम पंचायत में सरकारी योजनाये का क्रियान्वयन कैसे होता है ,इसका अंदाजा इस गाँव के मिनी सचिवालय को देख कर बखूबी लगाया जा सकता है।

जाने इस मिनी ग्रामीण सचिवालय की खूबियां

करीब 8 हजार वर्ग फीट में बने इस मिनी ग्रामीण सचिवालय में प्रधान कक्ष ,पंचायत सचिव कक्ष ,एक अतिथि /मीटिंग कक्ष के साथ एक अत्याधुनिक शौचालय जो की बिलकुल साफ सुथरा रहता है ,साथ ही पूरे भवन में बेहतरीन टाइल्स लगाने के साथ मीटिंग हाल में एलइडी टीवी ,पॉवर बैकअप की व्यवस्था के साथ इंटरनेट,लैपटॉप प्रिंटर की भी व्यवस्था हैं। साथ ही हर कक्ष में बेहतरीन कुर्सी ,मेज फ़ाइल रखने के आलमारी की भी व्यवस्था की गयी हैं। इसके प्रांगन में चारो तरफ हरे पेड़ ,फुल के पौधे और घास लगाई गयी है साथ ही सभी दीवालों पर प्रेरणा दायक स्लोगन भी लिखे गये है। इसकी सुरक्षा के लिए यहाँ एक चौकीदार भी 24 घंटे तैनात रहता हैं।


सीकरी गाँव में रहने वाले भाऊ जी बताते हैं, ''हमारे पंचायत में हमेशा समय से पंचायत की बैंठके होती है और गाँव वालों की जानकारी में सारी कार्य योजनाये बनाई जाती हैं।''

ग्राम पंचायत की प्रधान अर्चना सिंह के पति और पूर्व प्रधान राजेश सिंह ने बताया, व्यवस्था में कमी के चलते जो प्रधान इमानदारी से काम करते हैं उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, खासकर विकास कार्यो में कमीशनबाजी एक प्रथा का रूप ले चुकी है। लेकिन हमने अपने ग्राम पंचायत की किसी भी योजना में आज तक एक नया पैसा कमीशन नहीं दिया हालांकि इसके कारण हर योजना का फायदा हमारी पंचायत को देर से मिलता है।''

राजेश सिंह आगे बताते हैं, ''इस समय पंचायत में स्वच्छ भारत मिशन के तहत काम चल रहा हैं अब तक 100 शौचालय का निर्माण हो चुका हैं और सभी शौचालय मानक के अनुरूप बनाये गये है, साथ ही सरकार की कायाकल्प योजना के तहत गाँव के स्कूल के लिए टाइल्स लगाने का कार्य ,रंगाई -पुताई और पेयजल और शौचालय के लिए कार्ययोजना खुली बैठक में तैयार करके भेज दी गयी है। मेरी कोशिश है की हमारी पंचायत में सभी सरकारी निर्माण उत्कृष्ट और सरकार की मंशा के अनुरूप हो।

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कमीशन देने से मना करने पर नही आया मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना में नाम

राजेश सिंह बताते हैं, ''मुख्यमंत्री प्रोत्साहन पुरस्कार योजना के तहत आवेदन किया था वेबसाईट पर सभी प्रश्नों के उत्तर भी लॉक किये गये थे।''

डीपीएम गुंजन श्रीवास्तव ने बताया, ग्राम पंचायत सीकरी के नम्बर जिलें में सबसे अधिक है, अगर इनाम में मिलने वाली आधी राशि को खर्च कर सको तो ये पुरस्कार आपकी पंचायत को मिल जायेगा। मेरे द्वारा मना करने पर ग्राम पंचायत सीकरी को इस योजना से बाहर कर दिया गया। इसकी शिकायत और योजना के लिए पात्र ग्राम पंचायत के चयन के लिए निदेशक पंचायती राज को लिखित पत्र देने के साथ राजधानी जाकर मिला भी पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई मुख्यमंत्री जी को भी पत्र लिखा ,वेबसाईट पर शिकायत की लेकिन कार्यवाही जीरो है।अगर इस मामले की निष्पक्ष जांच करा ली जाए तो कम के आधार पर ये पुरस्कार मेरी ग्राम पंचायत को जरुर मिलेगा ,जनता के हक के पैसा डीपीएम् को कमिशन के रूप में दे पाना संभव नहीं है ,पुरस्कार भले ही न मिले।


डीपीएम् गुंजन श्रीवास्तव ने आगे बताया, ''हमने पूरे जनपद में 27 ग्राम पंचायतों को योजना में शामिल किया था जिनमें से हमें सिर्फ पांच पंचायतों का चयन करना था। दूसरे सीकरी को पहले भी रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार मिल चुका है। ग्राम प्रधान ने अपनी तरफ से ही अपने मन माफिक मार्किंग कर दी थी और इनकी पंचायत में वेरिफिकेशन भी नही कराया गया। ऊपर से जल्दी पांच पंचायत चिन्हित करने का दवाब था ,तो जिन पंचायतो का वेरिफिकेशन हो चुका था उनके नाम भेज दिए गये।

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