आर्मी में अफसर बनना चाहती हैं प्रियंका, फीस न जमा कर पाने के कारण लगा थी फांसी 

आर्मी में अफसर बनना चाहती हैं प्रियंका, फीस न जमा कर पाने के कारण लगा थी फांसी इसी घर में रहता है प्रियंका का परिवार

औरैया। ”आर्मी में अफसर बनकर देश की सेवा करना चाहती हूं इसके लिए मैं बडी मेहनत और लगन से पढती हूं। माता पिता के द्वारा लगाये गये पैसे को साकार कर अपने मां-बाप को गरीबी से उद्धार करना चाहती हूं। लेकिन प्रधानाचार्य ने जो मेरी बेईज्जती कर आत्महत्या करने पर मजबूर कर दिया। इसलिए मैंने ये कदम उठाया।” ये कहना है रामपुर बैहारी निवासी इंटर की छात्रा प्रियंका का।

जिला मुख्यालय से 10 किमी दूर उत्तर दिशा में रामपुर बैहारी गाँव में ब्रजेश कुमार अपनी पत्नी और चार बच्चों के साथ रहते है। कच्ची दीवार का एक कमरा और आंगन है जिस पर फूस के दो छप्पर रखे हुए हैं। जिसमें पूरा परिवार रहता है। दो बेटे और दो बेटियों में होनहार बेटी प्रियंका (17 वर्ष) श्रीराम शंकर गौरी शंकर इंटर कालेज फफूंद में कक्षा बारह में पढ़ रही है। प्रधानाचार्य द्वारा छमाही की परीक्षा से वंचित कर देने और आत्महत्या के लिए उकसाने पर प्रियंका ने घर जाकर आत्महत्या करने के मकसद से फांसी लगा ली थी।

जिला अस्पताल में इलाज होने के बाद चिकित्सकों ने सैफई रेफर कर दिया। पैसा न होने की वजह से परिजन वापस घर लेकर पहुंच गए। गले में सूजन और जुबान दांतो में दबकर कट जाने के कारण हकलाते हुए प्रियंका ने बताया, ”मैं आर्मी में अफसर बनना चाहती हूं सर, हमारे माता-पिता मजदूरी कर अपने लिए नये कपड़े न खरीदकर मेरी पढाई के लिए कापी-किताबों की व्यवस्था करते हैं। मैं जब अफसर बन जाऊंगी तो माता-पिता को गरीबी से उद्धार करना चाहती थी। पापा हमारे हमें खाना देने स्कूल जाते थे प्रधानाचार्य ने फीस के लिए पापा से नहीं कहा।”

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वो आगे बताती हैं, “क्लास में सबसे अधिक अंक आने पर प्रधानाचार्य मुझसे अपने बच्चों की मुनाफिक ईष्र्या करने लगा। समय-समय पर डांट-फटकार ऐसी की मानों मैंने उसकी कोई चोरी कर ली है। मुझे स्कूल में कई बार बेईज्जत किया गया मैंने गरीबी को देखते हुए सह लिया। इस बार परीक्षा से उठा दिया और झल्लाते हुए धक्का मारकर स्कूल से निकाल दिया, जिससे मैं ये सदमा सह न सकी। प्रधानाचार्य ने आत्महत्या करने के लिए मुझे उकसाया मैं ऐसा करना नहीं चाहती थी।” कहते हुए छात्रा रोने लगी। वहां मौजूद माता-पिता और गांव के लोगों ने उसे समझाया और आगे पढने के लिए उत्साह वर्धन किया। गले में सूजन होने की वजह से हालत में अभी ठीक नहीं है।

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प्रधानाचार्य का रवैया खराब

रामपुर बैहारी निवासी हर्षित (16 वर्ष) उसी कालेज में कक्षा बारह में पढता है उसने बताया ”कालेज के प्रधानाचार्य का रवैया बहुत खराब है। छात्रों से गलत शब्दों का इस्तेमाल कर बेइज्जत करता है। जिसकी फीस जमा नहीं होती है उसे बैठने नहीं देता है।”

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हमें में निकाला स्कूल से

रामपुर बैहारी निवासी राशिद खान (17 वर्ष) कक्षा बारह का छात्र है उसने बताया ”मेरी फीस तीन महीने की बाकी थी। प्रधानाचार्य ने मुझे स्कूल से भगा दिया। घर में पैसे न होने की वजह से फिर मैंे गया ही नहीं। छात्रों के साथ जानवरों जैसा सलूक करता है प्रधानाचार्य।”

संस्थान पर होनी चाहिए कार्रवाई

रामपुर बैहारी निवासी संजीव कुमार पाठक (40 वर्ष) का कहना है ”ऐसे संस्थान के खिलाफ कार्रवाई होनी बहुत जरूरी है। अभिभावक को बुलाकर फीस के लिए कहना चाहिए न कि बच्चों को लज्जित किया जाये।”

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कैसे होगा मेरी बेटी का इलाज

प्रियंका की मां माया देवी (45 वर्ष) ने बताया ”मेरी बेटी बहुत होशियार और होनहार है इसलिए हम पढा रहे है। हमारे दो बेटे और दो बेटिंया है। चारों में प्रियंका होशियार है। हम उसे कुछ बनाने के लिए पढा रहे थे लेकिन प्रधानाचार्य ने हमारे अरमानों पर पानी फेर दिया। हमारी बेटी की हालत नाजुक बनी हुई है हम कैसे इलाज करा पायेंगे।”

बहुत बेईज्जती होती साहब गाँव में

प्रियंका के पिता ब्रजेश कुमार (46 वर्ष) का कहना है ”हमारी बेटी ने तो पढाई छूटने की वजह से फांसी लगाकर आत्महत्या करने की कोशिश की है। अगर बेटी को कुछ हो जाता तो गाँव में बहुत बेईज्जती होती साहब, गाँव के लोग दूसरा अनुमान लगाकर गलत नजरों से मुझे देखते। मैं बहुत गरीब हूं।”

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