पानी की बर्बादी नहीं रुकी तो प्यासे मरने की आ जाएगी नौबत : कृषि मंत्री

Update: 2017-01-20 22:19 GMT
कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह।

नई दिल्ली (आईएएनएस)। केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि विश्व में सर्वाधिक सिंचित क्षेत्रफल होने के बावजूद भारत पानी की कमी का सामना कर रहा है। भारत में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता में तेजी से गिरावट आ रही है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1951 में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता 5,177 घन मीटर थी, जो 2025 व 2050 में क्रमश: घटकर 1341 व 1140 घन मीटर हो जाएंगी और तब हमारा देश जल अल्पता के श्रेणी में आ जाएगा। बर्लिन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय ग्रीन वीक 2017 पर विशेषज्ञ समिति की बैठक को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि भारत में कृषि में लगभग 86 प्रतिशत, उद्योग में छह प्रतिशत और घरेलू उपयोग में आठ प्रतिशत जल का उपयोग किया जाता है।

कृषि मंत्रालय के बयान के मुताबिक, सिंह ने कहा, "यदि पौधों को बेहतर ढंग से पानी नहीं जाता है तो बेहतर बीज एवं उर्वरक भी अपनी पूरी क्षमता दिखाने में असफल होते हैं। जल के असंतुलित उपयोग से इस महत्वपूर्ण संसाधन की बर्बादी नहीं होनी चाहिए, लिहाजा इसका समुचित उपयोग कर पर्यावरण को अनुकूल बनाना चाहिए।"

सिंह ने कहा, "वर्तमान में भारत और अन्य देश जल प्रबंधन से संबंधित समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इनमें भूमिगत जल संसाधन का अत्यधिक दोहन, उचित फसल चक्र की कमी, कमजोर जल उपयोग दक्षता (डब्लयूई), किसानों में जागरूकता की कमी, जल का अनुचित पुन:चक्रण कर उसका पुन: उपयोग व उद्योगों से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं।"

राधा मोहन ने भारत सरकार द्वारा कुशल जल प्रबंधन के लिए अपनाई गई कार्यनीतियों/योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने जल की पहुंच बढ़ाने, जल गुणवत्ता सुधार, जल की कमी का जोखिम घटाने और सरप्लस जल के प्रबंधन का संकल्प लेने का आग्रह किया।

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